प्रसून जोशी को हिंदी रत्न पुरस्कार से नवाजा गया, रजत शर्मा ने कहा- उन्होंने भाषा का मान बढ़ाया है भारत एक घंटा पहले 5
इंडिया टीवी के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा ने प्रसिद्ध गीतकार प्रसून जोशी को हिंदी रत्न सम्मान से सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने हिंदी के प्रति अपने जुड़ाव और पत्रकारिता के सफर के कई अनसुने किस्से साझा किए।

प्रसून जोशी के योगदान की सराहना

इंडिया टीवी के चेयरमैन और एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा ने हाल ही में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में मशहूर कवि और गीतकार प्रसून जोशी को हिंदी रत्न सम्मान से अलंकृत किया। इस मौके पर रजत शर्मा ने कहा कि प्रसून जोशी जैसे व्यक्तित्व को सम्मानित करना उनके लिए गर्व और गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रसून जोशी ने अपने कार्यों और लेखन के माध्यम से पूरे देश में हिंदी भाषा का सम्मान और गौरव बढ़ाया है। इस दौरान उन्होंने प्रसून जोशी की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए उनकी प्रशंसा भी की।

हिंदी भवन से जुड़ी पुरानी यादें

कार्यक्रम के दौरान भावुक होते हुए रजत शर्मा ने बताया कि हिंदी भवन में आना उनके लिए एक बहुत ही भावनात्मक क्षण है। उन्होंने अपने बचपन को याद करते हुए कहा कि वे 6-7 साल की उम्र से ही हिंदी भवन से जुड़े रहे हैं। उनके दादाजी इस संस्थान में लाइब्रेरियन थे और उसी वेतन से उनका घर चलता था। वे अपने दादाजी द्वारा लाई गई किताबों को पढ़कर ही बड़े हुए। उन्होंने अपनी शिक्षा हिंदी माध्यम से पूरी की, लेकिन जब वे SRCC कॉलेज पहुंचे तो वहां अंग्रेजी का बोलबाला था। उस दौर में चले जेपी आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस आंदोलन की भाषा हिंदी ही थी और वे उसमें सक्रिय भूमिका निभा रहे थे, जिसकी वजह से उन्हें आगे चलकर किसी बड़ी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा।

अंग्रेजी के दौर में हिंदी को दी प्राथमिकता

रजत शर्मा ने अपने करियर के संघर्षों को साझा करते हुए बताया कि उन्होंने अंग्रेजी सीखी जरूर, लेकिन अपनी पत्रकारिता की शुरुआत हिंदी भाषा से ही की। उन्होंने स्वीकार किया कि करियर के शुरुआती 2 वर्षों में हिंदी में बेहतर लिखने के बावजूद उन्हें पर्याप्त पहचान नहीं मिली। उसके बाद उन्होंने अंग्रेजी में लेखन शुरू किया और संपादक तक बने। हालांकि, जब उन्हें टेलीविजन पर अपना पहला शो करने का मौका मिला, तो उन्होंने उसे हिंदी में ही किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि वह शो हिंदी में नहीं होता, तो उसे इतनी बड़ी सफलता मिलना संभव नहीं था। उन्होंने लालू प्रसाद यादव के साथ हुए अपने पहले शो के अनुभव को याद करते हुए बताया कि उस दौरान परिस्थितियां कैसी थीं और कैसे वह शो हिंदी की ताकत के कारण जबरदस्त हिट साबित हुआ।

हिंदी का बढ़ता हुआ प्रभाव

अंत में, रजत शर्मा ने हिंदी भाषा की वर्तमान स्थिति पर बात करते हुए कहा कि आज हिंदी निरीह भाषा नहीं रह गई है, बल्कि यह देश के शासन और सत्ता की भाषा बन चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रसून जोशी ने अंग्रेजी भाषी लोगों के बीच रहकर भी हिंदी का जो मान बढ़ाया है, उसके लिए वे पूरी तरह से इस सम्मान के हकदार हैं। उन्होंने डेटा का हवाला देते हुए बताया कि हिंदी भाषा आज बहुत सशक्त और मजबूत हो गई है। रजत शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि आज के समय में हिंदी समाचार चैनलों की व्यूअरशिप अंग्रेजी समाचार चैनलों की तुलना में 140 प्रतिशत अधिक है, जो हिंदी की बढ़ती व्यापकता का प्रमाण है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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