उपनाम: मेवाड़
चित्तौड़गढ़ के सांवलिया सेठ मंदिर में दान का नया रिकॉर्ड, चार महीने में मिले 153 करोड़ रुपये से ज्यादा
मेवाड़ के प्रसिद्ध सांवलिया सेठ मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है, जहां महज चार महीनों में दान राशि और कीमती धातुओं का रिकॉर्ड स्तर पर चढ़ावा दर्ज किया गया है।
सांवलिया सेठ के खजाने में भक्तों की अटूट आस्था: दान राशि 16.60 करोड़ के पार
राजस्थान के प्रसिद्ध सांवलियाजी मंदिर में दान की गणना के दूसरे दौर के बाद खजाना 16 करोड़ 60 लाख 83 हजार रुपये तक पहुंच गया है।
सांवलिया सेठ के खजाने से पहले दिन ही निकला 10 करोड़ से ज्यादा का दान, जारी है गणना का सिलसिला
मेवाड़ के सुप्रसिद्ध सांवलिया सेठ मंदिर में दानपात्र खुलने के पहले चरण में 10 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी प्राप्त हुई है, और अभी पूरी गिनती होना शेष है।
चित्तौड़गढ़ का कुम्भा महल: मेवाड़ की वीरता और मीराबाई की भक्ति का जीवंत प्रमाण
चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित कुम्भा महल न केवल अपनी वास्तुकला के लिए मशहूर है, बल्कि यह पन्नाधाय के त्याग और मीराबाई की भक्ति गाथाओं का गवाह भी है।
काचरा चटनी: राजस्थानी थाली का वो जादुई स्वाद, जिसके सामने फीकी पड़ जाती है हर सब्जी
राजस्थान के मेवाड़ अंचल की पारंपरिक काचरा चटनी अपने तीखे और चटपटे स्वाद के लिए मशहूर है, जो बाजरे की रोटी के साथ परोसे जाने पर किसी भी खाने का जायका दोगुना कर देती है।
उदयपुर: थर्माकोल या प्लास्टिक नहीं, अभ्रक से तैयार होता है रियासतकालीन परंपरा वाला खास ताजिया
राजस्थान के उदयपुर में मेवाफरोश समाज द्वारा तैयार किया जाने वाला अभ्रक का ताजिया मोहर्रम का मुख्य केंद्र है, जिसकी परंपरा रियासतकाल से चली आ रही है।
महाराणा प्रताप जयंती: हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूरे, उदयपुर में उमड़ा शौर्य का सैलाब
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती और हल्दीघाटी विजय के 450 वर्ष पूरे होने पर उदयपुर में भव्य आयोजन हो रहे हैं। गांधी ग्राउंड में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और सीएम भजनलाल शर्मा पहुंचे, जबकि मोती मगरी पर प्रताप के वंशज डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने व...
मेवाड़ की पहली महिला फाइटर पायलट बनीं उदयपुर की खुशी, 23 की उम्र में वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर
उदयपुर की 23 वर्षीय खुशी गंभीर भारतीय वायुसेना में फ्लाइंग ऑफिसर बनकर मेवाड़ की पहली महिला फाइटर पायलट बन गई हैं। पहले ही प्रयास में AFCAT और SSB पास कर हैदराबाद में कठोर प्रशिक्षण पूरा करने वाली खुशी अब क्षेत्र की बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं।
‘हार वहीं से शुरू होती है जहां तुम उसे मान लो’ — महाराणा प्रताप की वह कहानी, जो आज भी रगों में जोश भर देती है
महाराणा प्रताप ने घास की रोटी तो स्वीकार की, पर गुलामी नहीं। उनका यह संदेश कि हार तभी आती है जब इंसान उसे स्वीकार कर ले, आज भी जीवन की हर चुनौती में राह दिखाता है।