बिहार का रहस्यमयी ब्रह्मकुंड: यहाँ भगवान ब्रह्मा ने बनवाए थे 22 कुंड, जानें क्यों हमेशा गर्म रहता है पानी जीवनशैली एक महीने पहले 78
बिहार के राजगीर में स्थित ब्रह्मकुंड आस्था और विज्ञान का अद्भुत मेल है। यह देश का सबसे गर्म जलकुंड माना जाता है, जहाँ का पानी प्राकृतिक रूप से 45 डिग्री सेल्सियस पर गर्म रहता है।

आस्था और विज्ञान का संगम: राजगीर का ब्रह्मकुंड

बिहार के नालंदा जिले में स्थित राजगीर अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहाँ का ब्रह्मकुंड न केवल आस्था का एक बड़ा केंद्र है, बल्कि यह एक प्राकृतिक रहस्य भी है। यह कुंड देश के सबसे गर्म जलकुंडों में गिना जाता है। इस स्थान की खासियत यह है कि यहाँ का पानी पूरे साल करीब 45 डिग्री सेल्सियस तापमान पर स्थिर रहता है, जो पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आश्चर्यचकित कर देता है।

पौराणिक कथाओं में ब्रह्मकुंड का उल्लेख

इस कुंड के निर्माण के पीछे एक दिलचस्प पौराणिक मान्यता जुड़ी हुई है। कथाओं के अनुसार, भगवान ब्रह्मा के मानस पुत्र राजा बसु ने राजगीर में एक विशाल यज्ञ का आयोजन किया था। उस दौरान यज्ञ में शामिल होने वाले देवी-देवताओं के स्नान के लिए पर्याप्त जल स्रोतों का अभाव था। माना जाता है कि इस समस्या को हल करने के लिए स्वयं भगवान ब्रह्मा ने यहाँ 22 पवित्र कुंडों का निर्माण करवाया था। इन्हीं सभी कुंडों में से ब्रह्मकुंड को सबसे मुख्य और प्रमुख स्थान प्राप्त है। आज भी श्रद्धालु इसे अत्यंत पवित्र मानते हैं और यहाँ स्नान करने को मोक्ष प्राप्ति का साधन समझते हैं।

क्यों गर्म रहता है ब्रह्मकुंड का पानी?

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो ब्रह्मकुंड का गर्म पानी किसी चमत्कार से कम नहीं लगता, लेकिन इसके पीछे भूगर्भिक कारण मौजूद हैं। जानकारों का मानना है कि इस कुंड का जल वैभारगिरी पर्वत पर स्थित सप्तकर्णी गुफाओं और भेलवाडोव तालाब से होकर जमीन के अंदर से आता है। इस पर्वत श्रृंखला में प्रचुर मात्रा में सल्फर, गंधक और अन्य महत्वपूर्ण खनिज तत्व पाए जाते हैं। जब पानी इन खनिजों के संपर्क में आता है, तो वह प्राकृतिक रूप से गर्म हो जाता है। यही कारण है कि बाहरी मौसम चाहे जैसा भी हो, इस कुंड का तापमान साल भर एक जैसा बना रहता है।

मलमास मेले का धार्मिक महत्व

राजगीर का मलमास मेला देशभर में बहुत प्रसिद्ध है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मलमास की अवधि में ब्रह्मकुंड का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। कहा जाता है कि इस दौरान सभी देवी-देवता राजगीर में ही निवास करते हैं और ब्रह्मकुंड में पवित्र स्नान करते हैं। अग्नि पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में भी इस बात का जिक्र मिलता है। मेले के समय श्रद्धालु तड़के 4 बजे से ही स्नान के लिए कतारों में लग जाते हैं। पूरे महीने यहाँ धार्मिक अनुष्ठानों और दान-पुण्य का दौर चलता रहता है, जहाँ लाखों लोग अपने जीवन में सुख और समृद्धि की कामना लेकर आते हैं।

राजगीर कैसे पहुंचें?

ब्रह्मकुंड की यात्रा करना बेहद सरल है और यहाँ परिवहन के साधन आसानी से उपलब्ध हैं। यदि आप हवाई मार्ग से आना चाहते हैं, तो सबसे नजदीकी हवाई अड्डा पटना है, जो यहाँ से लगभग 107 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। रेल मार्ग के माध्यम से भी राजगीर पटना सहित देश के कई प्रमुख शहरों से सीधे जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, सड़क मार्ग से यात्रा करने वालों के लिए पटना, गया और नवादा जैसे पड़ोसी शहरों से बस और टैक्सी की नियमित सेवाएं उपलब्ध हैं, जो इस ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल तक पहुंचना आसान बनाती हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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