जीवनशैली
एक घंटा पहले
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विचारों
जूते खरीदते समय अक्सर उन पर 8/10, 6/10 या 4/10 जैसे अंक लिखे दिखते हैं, लेकिन बहुत कम लोग इन पर ध्यान देते हैं। सीधे शब्दों में कहें तो इनके दो मतलब होते हैं। पहला मतलब साइज से जुड़ा है। दरअसल जूते पर दो साइज इसलिए दिए जाते हैं क्योंकि एक ब्रिटेन का माप होता है और दूसरा भारत का। मगर इसका एक और खास मतलब भी होता है, जो आपकी सेहत से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
सही जूते की पहचान कैसे करें
जूते का साइज बेहद अहम है। अगर साइज में जरा भी गड़बड़ हो तो पैरों में दर्द होने लगता है और पहनते ही जूता उतार देने का मन करता है। लेकिन साइज के अलावा एक और चीज मायने रखती है और वह है जूते की रेटिंग। अगर जूते की रेटिंग सही नहीं है तो यह आपकी सेहत को सीधा नुकसान पहुंचा सकता है।
किस तरह के जूते की क्या रेटिंग होनी चाहिए, इसे लेकर आर्थोपेडिक सर्जन और इंटीग्रेटिव मेडिसिन स्पेशलिस्ट डॉ. किरण शेटे ने हाल ही में सोशल मीडिया पर कुछ जूतों की रेटिंग साझा की। उन्होंने ट्रेनिंग शूज को 10/10 रेटिंग दी है, जबकि स्लिप-ऑन्स और सस्ते लचीले जूतों को सबसे निचले पायदान पर रखा है।
आखिर इस रेटिंग का मतलब क्या है
इस सवाल पर नी रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ. राकेश नायर ने बताया कि यह रेटिंग दर्शाती है कि मेडिकली किसी जूते की गुणवत्ता 10 में से कितनी है। इसका मकसद जूते का सही चयन है। उनके मुताबिक गलत जूते पैरों, टखनों, घुटनों और यहां तक कि रीढ़ की हड्डी तक को नुकसान पहुंचा सकते हैं, इसलिए सही चुनाव बहुत जरूरी है।
पांच तरह के जूतों की रेटिंग
रनिंग शूज : 8/10
डॉ. शेटे ने रनिंग शूज को 8/10 की रेटिंग दी है और डॉ. राकेश नायर भी इसे सही मानते हैं। डॉ. नायर के अनुसार बेहतर कुशनिंग और झटका सोखने की क्षमता के कारण ये जूते चलने, जॉगिंग करने और रोजाना के इस्तेमाल के लिए सबसे उपयुक्त हैं। ये चलते-फिरते समय घुटनों और पैरों पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद करते हैं। हालांकि ये हर एक्टिविटी के लिए बेहतरीन नहीं होते, क्योंकि कुछ रनिंग शूज जिम वर्कआउट या अचानक दिशा बदलने वाले मूवमेंट में पैरों को पर्याप्त साइड-सपोर्ट नहीं दे पाते।
स्लिप-ऑन शूज : 3/10
स्लिप-ऑन्स शूज को सबसे कम रेटिंग में से एक मिली है। इसकी वजह यह है कि ये जूते आमतौर पर पैर को अच्छी ग्रिप और मजबूती नहीं दे पाते, जिससे चलते समय पैर इनके भीतर हिलता-डुलता रहता है। इस हलचल से संतुलन बिगड़ने, टखना मुड़ने या पैर में खिंचाव आने का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक चलने या खड़े रहने पर ये और मुश्किलें खड़ी करते हैं। छोटी-मोटी भागदौड़ या कैजुअल इस्तेमाल के लिए भले ही ये सुविधाजनक हों, पर लंबे समय तक पहनने के लिए सही विकल्प नहीं माने जाते।
ट्रेनिंग शूज : 10/10
ट्रेनिंग शूज को सबसे ज्यादा रेटिंग दी गई है। डॉ. राकेश नायर का मानना है कि ज्यादा कुशनिंग वाले रनिंग शूज के उलट ट्रेनिंग शूज पैरों की स्थिरता और मजबूती के लिए डिजाइन किए जाते हैं। यही वजह है कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, जिम वर्कआउट और फंक्शनल एक्सरसाइज के दौरान संतुलन बनाए रखने में ये बेहद मददगार साबित होते हैं। इनका डिजाइन पैरों की स्थिरता सुधारता है और वर्कआउट के दौरान चोट लगने का खतरा घटाता है। अगर आपके रूटीन में स्क्वैट्स, लंजेस या वेट लिफ्टिंग शामिल है तो ये सबसे सुरक्षित विकल्पों में से एक हो सकते हैं।
हल्के और कम सपोर्ट वाले जूते : 6/10
मिनिमलिस्ट शूज को औसत रेटिंग मिली है। ये जूते पैर के प्राकृतिक मूवमेंट और लचीलेपन को बढ़ावा देते हैं, लेकिन हर किसी के लिए सही नहीं होते। डॉ. नायर बताते हैं कि जहां कुछ लोग इनके आदी हो जाते हैं, वहीं दूसरों को, खासकर शुरुआती लोगों या जिन्हें पहले से पैर की कोई समस्या है, कम कुशनिंग और सपोर्ट के कारण पैरों और पिंडलियों की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव झेलना पड़ सकता है।
हाई-कुशन शूज : 6/10
ज्यादा कुशनिंग वाले जूतों को भी औसत रेटिंग मिली है। इनके बेहद सॉफ्ट तलवे शुरुआत में काफी आरामदायक लग सकते हैं, लेकिन बहुत अधिक कुशनिंग कभी-कभी पैरों की स्थिरता को कम कर देती है। खासकर वर्कआउट या ऐसे मूवमेंट के दौरान जहां पैर का जमीन पर मजबूती से टिकना जरूरी हो, वहां ये परेशानी दे सकते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि सिर्फ आराम का मतलब सही सपोर्ट होना नहीं है।
सस्ते लचीले जूते : 2/10
इन जूतों को सबसे कम रेटिंग दी गई है। इन कमजोर जूतों में अक्सर पैर के तलवे को मिलने वाला सही सपोर्ट, शॉक एब्जॉर्प्शन और बनावट की मजबूती नहीं होती। समय के साथ सही सपोर्ट न मिलने से पैरों का अलाइनमेंट बिगड़ सकता है और जोड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। जो जूता आसानी से मुड़ जाता है वह शुरुआत में हल्का और आरामदायक भले लगे, पर विशेषज्ञ चेताते हैं कि लंबे समय में पैर का सपोर्ट ज्यादा मायने रखता है।
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