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एक घंटा पहले
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विचारों
मानसून और अनाज के भंडारण की चुनौती
मानसून का मौसम अपने साथ सुहावना अहसास तो लेकर आता है, लेकिन यह हमारे किचन के लिए कई चुनौतियां भी पैदा करता है। भीलवाड़ा समेत कई इलाकों में इस दौरान हवा में उमस और नमी काफी बढ़ जाती है। इस नमी का सीधा असर हमारे रसोई घर में रखे अनाज पर पड़ता है। विशेष रूप से चावल ऐसी चीज है जो बहुत जल्दी वातावरण की नमी को सोख लेता है। अगर सही सावधानी न बरती जाए, तो चावल में सीलन आ सकती है, इसमें अजीब सी बदबू पैदा हो सकती है या फिर छोटे-छोटे कीड़े पनपने लगते हैं। यह स्थिति न केवल चावल की गुणवत्ता को बिगाड़ती है, बल्कि लंबे समय तक ऐसी परिस्थितियों में रहने से इसमें फंगस भी लग सकता है, जो सेहत के लिए भी हानिकारक हो सकता है।
एयरटाइट कंटेनर का करें उपयोग
चावल को मानसून के दौरान सुरक्षित रखने का सबसे पहला और महत्वपूर्ण नियम है उसे सही पात्र में रखना। चावल को कभी भी खुले या ढीले ढक्कन वाले डिब्बे में नहीं छोड़ना चाहिए। हमेशा अच्छी गुणवत्ता वाले एयरटाइट कंटेनर का ही उपयोग करें। जब डिब्बा पूरी तरह बंद रहता है, तो बाहरी नमी अंदर प्रवेश नहीं कर पाती, जिससे चावल सूखे और सुरक्षित बने रहते हैं। कंटेनर को चुनते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि वह अंदर से पूरी तरह सूखा और साफ हो। यदि डिब्बे में पहले से ही थोड़ी नमी मौजूद है, तो वह चावल को जल्दी खराब कर सकती है।
नमी से बचाव के लिए सही जगह का चुनाव
केवल डिब्बा एयरटाइट होना ही काफी नहीं है, बल्कि उस स्थान का चुनाव करना भी जरूरी है जहां आप चावल का डिब्बा रख रहे हैं। मानसून में अपने किचन के उन हिस्सों से परहेज करें जहां नमी अधिक रहती है। अक्सर हम सुविधा के लिए चावल का डिब्बा सिंक के नीचे या गैस चूल्हे के बिल्कुल पास रख देते हैं, लेकिन यह गलत है। सिंक के पास पानी की नमी और गैस के पास बनने वाली भाप चावल को तेजी से खराब कर सकती है। डिब्बे को हमेशा घर के ऐसे शुष्क और ठंडे स्थान पर रखें जहां सीधी धूप या पानी की बौछारें न पहुंचती हों।
पुराने और नए चावल का प्रबंधन
अक्सर घरों में यह देखा जाता है कि लोग पुराने बचे हुए चावल के डिब्बे के ऊपर ही नया चावल डाल देते हैं। यह आदत मानसून के दौरान बहुत भारी पड़ सकती है। यदि आप ऐसा करते हैं, तो नीचे पड़ा हुआ पुराना चावल जल्दी खराब होकर फंगस का कारण बन सकता है। नियम यह होना चाहिए कि जब आप नया स्टॉक लाएं, तो पुराने डिब्बे को पहले पूरी तरह खाली करें, उसे अच्छी तरह से साफ करके सुखाएं और फिर उसमें नया चावल भरें। इसके अलावा, पूरा चावल एक ही बड़े ड्रम में रखने के बजाय उसे छोटे एयरटाइट कंटेनर में बांटकर रखना अधिक समझदारी है। बार-बार बड़ा डिब्बा खोलने से नमी अंदर जाती है, जबकि छोटे डिब्बे का उपयोग करने से बाहरी हवा का संपर्क सीमित रहता है।
नियमित निगरानी है जरूरी
मानसून के दौरान यह उम्मीद न करें कि एक बार स्टोर करने के बाद आप निश्चिंत हो जाएंगे। समय-समय पर चावल के डिब्बे को खोलकर उसकी जांच करते रहना बहुत आवश्यक है। चेक करें कि कहीं चावल का रंग तो नहीं बदल रहा या उसमें से कोई अजीब सी गंध तो नहीं आ रही है। यदि आपको जरा भी शक हो कि चावल में कीड़े या फंगस की शुरुआत हो गई है, तो उस डिब्बे को बाकी अनाज से तुरंत अलग कर दें। ऐसा न करने पर समस्या बाकी खाद्य सामग्रियों तक भी फैल सकती है। यदि चावल में स्पष्ट रूप से कीड़े दिख रहे हैं या बहुत ज्यादा सीलन और खराब गंध आ रही है, तो बेहतर होगा कि उस चावल का सेवन न करें। केवल कीड़े बीनकर या साफ करके खराब हो चुके चावल को खाने में इस्तेमाल करना स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा हो सकता है। इन सावधानियों का पालन करके आप मानसून में भी अपने चावल को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बनाए रख सकते हैं।
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