पशुओं का दूध उत्पादन बढ़ाना है आसान: महंगे चारे की जगह अपनाएं पशु चिकित्सकों का यह सस्ता और कारगर डाइट फार्मूला जीवनशैली 2 महीने पहले 84
अगर आपके दुधारू पशु उम्मीद के मुताबिक दूध नहीं दे रहे हैं, तो महंगे चारे के बजाय उनके खानपान के तरीके को बदलने की जरूरत है। गोंडा के पशु चिकित्सा अधिकारी ने दूध बढ़ाने के लिए कुछ आसान और किफायती तरीके बताए हैं।

पशुपालन में संतुलित आहार का महत्व

पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक बड़ा आधार है और किसानों की आय बढ़ाने में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। हालांकि, कई बार पशुपालक इस बात से परेशान रहते हैं कि उनके मवेशी अपेक्षा के अनुरूप दूध नहीं दे रहे हैं। अक्सर लोग दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए बाजार से महंगे चारे या सप्लीमेंट्स पर निर्भर हो जाते हैं, लेकिन विशेषज्ञ इसे हमेशा सही नहीं मानते। गोंडा के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश कुमार तिवारी के अनुसार, पशुओं की सेहत और उनके दूध की गुणवत्ता सीधे तौर पर उनके खानपान और दैनिक देखभाल से जुड़ी होती है। सही जानकारी और संतुलित आहार के माध्यम से कम खर्च में भी दूध की पैदावार में अच्छी खासी वृद्धि की जा सकती है।

क्या हो पशुओं के आहार का सही संतुलन

पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार तिवारी के मुताबिक, एक दुधारू पशु की डाइट में तीन प्रमुख चीजों का सही तालमेल होना चाहिए: हरा चारा, सूखा चारा और संतुलित दाना। पशुओं को हरा चारा देना उनके शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति करता है, जबकि सूखा चारा पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है। इसके साथ ही, दाना पशु को जरूरी ऊर्जा देता है, जिससे दूध उत्पादन की क्षमता में सुधार आता है। उन्होंने सलाह दी है कि पशुपालकों को अपनी डाइट योजना में 60 प्रतिशत हिस्सा सूखे चारे का और 40 प्रतिशत हिस्सा हरा चारा व दाने का रखना चाहिए। यह अनुपात दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए सबसे प्रभावी माना जाता है।

पौष्टिक चारे का चयन

आहार में चारे का चयन करते समय भी सावधानी बरतना जरूरी है। हरे चारे के रूप में नेपियर घास, मक्का, चारी और बरसीम का उपयोग किया जा सकता है। इनमें भरपूर पोषक तत्व पाए जाते हैं जो पशुओं की सेहत के लिए काफी लाभकारी हैं। वहीं सूखे चारे के तौर पर गेहूं का भूसा और धान की भूसी का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। दाने के रूप में आप घर पर पिसा हुआ अनाज या संतुलित फीड दे सकते हैं। यह न केवल किफायती है, बल्कि पशुओं के लिए पूरी तरह सुरक्षित और प्राकृतिक भी है।

पानी और खनिज मिश्रण की भूमिका

अक्सर पशुपालक पशुओं को पर्याप्त पानी पिलाने की ओर ध्यान नहीं देते, जिसका सीधा असर दूध की मात्रा पर पड़ता है। डॉ. राकेश का स्पष्ट कहना है कि पशुओं को हर समय साफ और ताजा पानी उपलब्ध कराना अनिवार्य है। पानी की कमी न केवल पशु को बीमार कर सकती है, बल्कि उत्पादन को भी घटाती है। खास तौर पर गर्मी के मौसम में पशुओं के शरीर में पानी की कमी होने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। साथ ही, पशुओं के आहार में नियमित रूप से खनिज मिश्रण यानी मिनरल मिक्सचर और नमक शामिल करना चाहिए ताकि उनके शरीर में पोषक तत्वों की कोई कमी न हो। एक स्वस्थ पशु ही अपनी क्षमता के अनुसार बेहतर दूध दे सकता है।

नियमित देखभाल और टीकाकरण

केवल आहार ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि पशुओं की नियमित स्वास्थ्य निगरानी भी आवश्यक है। समय पर टीकाकरण और बीमारियों की जांच करना बहुत जरूरी होता है। यदि पशु किसी आंतरिक बीमारी या संक्रमण का शिकार है, तो उसका पूरा ध्यान बीमारी लड़ने में चला जाएगा, जिससे दूध उत्पादन अपने आप गिर जाएगा। डॉ. राकेश के अनुसार, यदि किसान अपनी दिनचर्या में उचित आहार प्रबंधन और देखभाल को शामिल करें, तो वे कम खर्च में भी अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। सही देखभाल से पशु स्वस्थ रहेंगे और लंबे समय तक दूध उत्पादन करते रहेंगे, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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