जीवनशैली
23 घंटे पहले
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अगर आप गाय, भैंस या कोई अन्य दुधारू पशु पालते हैं, तो यह जानकारी आपके लिए बेहद अहम है। मई का महीना समाप्ति की ओर है और जून दस्तक देने वाला है। ऐसे में पशुओं की सेहत को लेकर बरती गई जरा सी भी लापरवाही पशुपालकों को बड़े नुकसान में डाल सकती है।
हर साल जुलाई के दौरान मवेशियों में एक अत्यंत घातक और जानलेवा रोग फैलता है, जिसकी चपेट में आने के बाद पशुओं को बचा पाना बहुत कठिन हो जाता है। यह बीमारी है पशुओं में होने वाली ‘गलघोंटू’। अपने बेजुबान जानवरों को इससे सुरक्षित रखने के लिए पशुपालकों को अभी से कुछ खास सावधानियां बरतनी होंगी।
क्या है गलघोंटू और कैसे करती है हमला
बलिया सदर के डिप्टी सीवीओ डॉ. एस.डी. द्विवेदी के अनुसार, गलघोंटू पशुओं के लिए एक बेहद गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जो मुख्य रूप से गाय और भैंस जैसे दुधारू पशुओं को अपना शिकार बनाती है। यह रोग एक विशेष प्रकार के बैक्टीरिया के कारण पनपता है। बीमारी होते ही पशु के शरीर का तापमान तेजी से बढ़ने लगता है, गले में भयंकर सूजन आ जाती है और सांस लेना मुश्किल हो जाता है। समय पर सही उपचार न मिलने पर पशु तड़प-तड़पकर दम तोड़ देता है।
इन लक्षणों से करें पहचान
डॉ. द्विवेदी का कहना है कि इस बीमारी को शुरुआती चरण में ही पहचान लेना बहुत जरूरी है। इसके प्रमुख लक्षणों में पशु के गले से अजीब सी ‘घर-घर’ की आवाज आना शामिल है।
- गले से ‘घर-घर’ की असामान्य आवाज आना
- आंखें एकदम लाल हो जाना और उनसे लगातार पानी गिरना
- गले के आसपास तेज सूजन, जिससे सांस लेने में भारी तकलीफ
- बहुत तेज बुखार और दाना-पानी पूरी तरह छोड़ देना
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि अगर मवेशी में ऐसे लक्षण नजर आएं, तो एक मिनट की भी देरी किए बिना तुरंत नजदीकी पशु अस्पताल जाकर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
बचाव का इकलौता कारगर उपाय
डॉ. द्विवेदी के मुताबिक, इस जानलेवा बीमारी से निपटने का सबसे प्रभावी और एकमात्र तरीका समय पर टीकाकरण कराना है। चूंकि यह रोग जुलाई के महीने में सबसे ज्यादा फैलता है, इसलिए इससे बचाव का टीका मई से जून के बीच ही लग जाना चाहिए।
सरकारी अभियान का उठाएं लाभ
राहत की बात यह है कि इस समय सरकारी स्तर पर पशुओं के टीकाकरण का विशेष अभियान चलाया जा रहा है और क्षेत्र के कई मवेशियों को यह सुरक्षा कवच दिया जा चुका है। जिन पशुपालकों ने अब तक अपने पशुओं का टीकाकरण नहीं कराया है, वे तुरंत अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय या टीम से संपर्क कर टीका लगवा सकते हैं।
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