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एक घंटा पहले
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तिब्बत से आया मौत का सैलाब
नेपाल में बुधवार को जो कुछ हुआ, वह किसी डरावने सपने से कम नहीं था। तिब्बत की तरफ से अचानक आए पानी के भीषण सैलाब ने नेपाल के कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। भोटेकोशी नदी में जलस्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि वहां मौजूद लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। स्थानीय निवासियों के अनुसार, कुछ ही पलों में पानी का एक विशाल गुबार सब कुछ बहा ले जाने के लिए काफी था। महज 30 सेकंड के भीतर, दो बड़े बाजार इस सैलाब की भेंट चढ़ गए। अभी तक प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस आपदा में 98 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है और मरने वालों की संख्या में अभी और बढ़ोतरी होने की आशंका जताई जा रही है।
बुनियादी ढांचे का भारी नुकसान
इस बाढ़ ने नेपाल के इंफ्रास्ट्रक्चर को बुरी तरह प्रभावित किया है। नदी के रास्ते में आने वाली तीन पुलिस चौकियां, कई महत्वपूर्ण पुल और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स मलबे के साथ बह गए। सड़कों का एक बड़ा हिस्सा पूरी तरह से नष्ट हो गया है, जिससे राहत और बचाव कार्यों में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। सैटेलाइट से प्राप्त तस्वीरों ने तबाही की भयावहता की पुष्टि की है, जिसमें नदी के आसपास की बस्तियां और बुनियादी ढांचा पूरी तरह से नदारद दिख रहा है।
लापता लोगों की तलाश में जुटी एजेंसियां
बाढ़ के बाद से करीब 500 लोग अभी भी लापता हैं, जिनकी तलाश में राहत एजेंसियां दिन-रात काम कर रही हैं। लापता लोगों में सुरक्षा बल के जवान भी शामिल हैं। रसुवा के उत्तरी इलाके में तैनात नेपाल आर्म्ड पुलिस फोर्स के चार जवान बाढ़ के बाद से लापता हैं। नेपाल टूरिज्म बोर्ड की प्रारंभिक सूची के मुताबिक, कुल 384 यात्री गायब हैं, जिनमें 291 विदेशी और 93 नेपाली नागरिक हैं। विदेशी नागरिकों में 105 भारतीय और 37 एनआरआई शामिल हैं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा उन लोगों का है जो कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले थे।
सैलाब की संभावित वजह और वैज्ञानिक पहलू
नेपाल में आई इस आपदा के कारणों पर विशेषज्ञों की राय है कि तिब्बत-नेपाल सीमा के पास आए 4.4 तीव्रता के भूकंप ने पहाड़ के ऊपरी हिस्से को अस्थिर कर दिया होगा। इसके कारण बर्फ और चट्टानें खिसक गईं, जिससे नदी का मार्ग अवरुद्ध हो गया। जब यह प्राकृतिक बांध टूटा, तो पानी और मलबे का एक जोरदार बहाव नीचे की तरफ आया। फिलहाल वैज्ञानिक ग्लेशियर से जुड़ी घटनाओं और अचानक बने इस जलभराव के कारणों की विस्तृत जांच कर रहे हैं ताकि भविष्य के खतरों का आकलन किया जा सके।
कैलाश मानसरोवर यात्रियों पर बड़ी मुसीबत
इस आपदा का सबसे दुखद पहलू उन कैलाश मानसरोवर यात्रियों के साथ जुड़ा है जो उस समय ग्यिरोंग इमिग्रेशन सेंटर पर मौजूद थे। सदगुरु जग्गी वासुदेव ने बताया कि उनके समूह के यात्री वापस लौटते समय वहां फंसे थे, जिसमें पांच मंजिला इमिग्रेशन बिल्डिंग भी पूरी तरह जलमग्न हो गई। सदगुरु ने साझा किया कि उनके कुल 21 समूहों में से 495 लोग सुरक्षित हैं, जबकि अभी भी 743 लोग तिब्बत में, 148 लोग नेपाल में और 77 लोग इमिग्रेशन सेंटर के पास मौजूद हैं। बचाव अभियान में वे स्वयं भी स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर रहे हैं।
नेपाल में युद्धस्तर पर राहत कार्य
नेपाल की सेना और पुलिस लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है। हेलीकॉप्टरों की मदद से कई लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने इस स्थिति को देखते हुए उच्च स्तरीय बैठकें की हैं और प्रभावित क्षेत्रों में बचाव दल की संख्या बढ़ाई है। गृह मंत्री ने लोगों से निचले इलाकों को खाली कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। संचार व्यवस्था ठप होने के कारण सही आंकड़े जुटाना एक चुनौती बनी हुई है।
भारत की ओर से मानवीय सहायता
भारत ने संकट की इस घड़ी में अपने पड़ोसी देश नेपाल के साथ खड़े होने का संदेश दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से टेलीफोन पर बात कर हर संभव मदद का भरोसा दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि 10 टन राहत सामग्री भेजी जा चुकी है। भारतीय वायुसेना का C-17 ग्लोबमास्टर बचाव उपकरणों के साथ काठमांडू पहुंच रहा है। भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं ताकि प्रभावित भारतीयों की सूचना ली जा सके।
बिहार और उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट
नेपाल से निकलने वाली नदियां अब भारत के लिए खतरा बन गई हैं। भोटेकोशी का पानी गंडक नदी में पहुंचने से बिहार के छह जिलों में अलर्ट जारी किया गया है। वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश के कुशीनगर, महाराजगंज और देवरिया में भी स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की नौ टीमें इन क्षेत्रों में तैनात हैं। गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से बात कर स्थितियों की समीक्षा की है और केंद्र से हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।
क्या चीन की तरफ से अलर्ट में देरी हुई?
इस बीच, यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या चीन ने बाढ़ की चेतावनी देने में देरी की। कुछ खबरों के अनुसार, नेपाल को सैलाब के आने से करीब 45 मिनट पहले ही जानकारी मिल पाई थी, जो पर्याप्त नहीं थी। यदि यह सूचना समय पर मिलती, तो जनहानि को काफी हद तक कम किया जा सकता था। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि की प्रतीक्षा है। फिलहाल पूरा ध्यान उन सैकड़ों लापता लोगों को ढूंढने और प्रभावितों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराने पर केंद्रित है।
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