राष्ट्रीय राजनीति
2 घंटे पहले
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हिजाब पर कानूनी रुख का समर्थन
शिक्षा संस्थानों में हिजाब पहनने को लेकर चल रही लंबी कानूनी और सियासी बहस के बीच केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले का बड़ा बयान सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए जिसमें अदालत ने हिजाब को स्कूल यूनिफॉर्म का अनिवार्य हिस्सा मानने से इनकार कर दिया था, आठवले ने कहा कि भारत देश परंपराओं से नहीं, बल्कि देश के संविधान और कानून से चलता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि मुस्लिम समुदाय के लिए हिजाब उनकी पारंपरिक प्रथा हो सकती है, लेकिन स्कूलों और शिक्षण संस्थानों के भीतर अदालत के निर्देशों और तय नियमों का पालन करना अनिवार्य है।
कानून सर्वोपरि है
आईएएनएस के साथ एक विशेष बातचीत में रामदास आठवले ने स्पष्ट किया कि यद्यपि मुस्लिम समाज की महिलाएं और स्कूल जाने वाली छात्राएं हिजाब पहनती हैं और यह उनकी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है, फिर भी देश में सबको कानून का पालन करना होगा। उन्होंने कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जो फैसला सुनाया है, उसके अनुसार हिजाब पहनना आवश्यक नहीं है और इसे लेकर अदालत के आदेश का पूर्ण सम्मान किया जाना चाहिए। मंत्री के अनुसार, हमें देश को कानून के दायरे में ही आगे ले जाना चाहिए।
राम मंदिर के फैसले का दिया उदाहरण
केंद्रीय मंत्री ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखने के लिए अयोध्या के राम मंदिर जन्मभूमि विवाद का उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे यह मामला कई दशकों से लंबित था और कोई स्पष्ट समाधान नहीं निकल पा रहा था। आठवले ने बताया कि पूर्व में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक तिहाई हिस्सा मुस्लिम पक्ष को देने का निर्णय सुनाया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट का यह मानना था कि यदि विवादित जमीन का केवल 25 प्रतिशत हिस्सा दिया गया, तो यह विवाद भविष्य में भी कभी खत्म नहीं होगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि उस दौरान पुरातात्विक उत्खनन की टीम में शामिल रहे एक मुस्लिम अधिकारी ने भी विवादित ढांचे के नीचे मंदिर के अवशेष होने की बात स्वीकार की थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने पूरी जमीन राम मंदिर निर्माण के लिए सौंप दी। आठवले ने रेखांकित किया कि मुस्लिम समाज ने सुप्रीम कोर्ट के उस अंतिम फैसले को पूरी गरिमा के साथ स्वीकार किया था, जो एकता और कानून के प्रति सम्मान का प्रतीक था।
आधुनिक दौर और परंपराओं का तालमेल
रामदास आठवले ने कहा कि हम 21वीं शताब्दी में प्रवेश कर चुके हैं और देश निरंतर प्रगति की ओर अग्रसर है। उन्होंने सुझाव दिया कि परंपराओं का अपना महत्व है, लेकिन उन्हें हमेशा देश के कानून और संवैधानिक ढांचे के भीतर रहकर ही निभाया जाना चाहिए।
असदुद्दीन ओवैसी पर प्रतिक्रिया
हाईकोर्ट के फैसले पर असदुद्दीन ओवैसी द्वारा की गई टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को अपना नेतृत्व चुनने और उसे मजबूत करने का पूरा अधिकार है। उन्होंने कहा कि ओवैसी जैसे कई नेता हैं जो अपने-अपने तरीके से समुदाय के लिए काम कर रहे हैं। आठवले ने उल्लेख किया कि भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस और उनकी खुद की पार्टी आईपीआई में भी कई मुस्लिम नेता सक्रिय हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम समुदाय में कई ऐसे नेता मौजूद हैं जो अपने लोगों की आवाज उठाते हैं, हालांकि यह एक अलग बहस का विषय है कि क्या मुस्लिम समुदाय का कोई एक बड़ा और सर्वमान्य नेता होना चाहिए। अंत में, आठवले ने आह्वान किया कि सभी राजनीतिक दलों और मुस्लिम समाज के लोगों को आपसी भाईचारे और सौहार्द को मजबूत करने के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ना चाहिए।
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