मध्य प्रदेश
2 घंटे पहले
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परीक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट गाइडलाइन
मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेजों के फर्जीवाड़े का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है, जिससे हजारों छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। इस बीच सुप्रीम कोर्ट ने ग्वालियर और चंबल संभाग के लगभग 130 नर्सिंग कॉलेजों में अध्ययनरत 8 से 10 हजार छात्रों की परीक्षाओं को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि जिन कॉलेजों को सीबीआई जांच में ग्रीन चेक यानी क्लीन चिट मिलेगी, केवल उन्हीं संस्थानों के छात्र अपनी परीक्षा दे पाएंगे। जिन कॉलेजों को जांच में अयोग्य पाया जाएगा, उनके छात्रों को दूसरे वैध कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाएगा।
सीबीआई जांच अनिवार्य
बीते 25 अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कॉलेजों को हर हाल में सीबीआई जांच की प्रक्रिया से गुजरना होगा। छात्रों के वकील ने कोर्ट के समक्ष पक्ष रखते हुए बताया कि प्रभावित छात्रों ने वर्ष 2021-22 में इन कॉलेजों में दाखिला लिया था। हालांकि, उच्चतम न्यायालय द्वारा गठित एक विशेष समिति ने पहले भी इन संस्थानों का निरीक्षण किया था और उन्हें तय मानकों के अनुरूप पाया था, लेकिन दाखिले के बाद से ही मामला कानूनी दांव-पेच में उलझा हुआ है। कोर्ट ने अब यह सुनिश्चित किया है कि यदि कॉलेज जांच में खरा उतरता है, तभी वह परीक्षा के लिए मान्य होगा।
फीस वसूली को लेकर छात्रों को नसीहत
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने छात्रों को भी एक अहम सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों ने अपनी फीस, डोनेशन या अन्य शुल्क जिस कॉलेज मैनेजमेंट को जमा किए हैं, उन्हें जवाबदेही भी उसी प्रबंधन से मांगनी चाहिए। अदालत का मानना है कि कॉलेज प्रबंधन को सीबीआई जांच का सामना करने से डरने की जरूरत नहीं है, यदि संस्थान नियमों का पूरी तरह पालन कर रहा है। जब वकील ने यह तर्क दिया कि छात्र प्रबंधन की किसी नीति या गलती के लिए जिम्मेदार नहीं हैं, तो सीजेआई ने सुझाव दिया कि छात्रों को खुद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए और प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करनी चाहिए।
हाई कोर्ट का रुख करेंगे छात्र
छात्रों के अधिवक्ताओं का कहना है कि वे इस मामले में शीघ्र सुनवाई के लिए 31 अगस्त से पहले हाई कोर्ट में याचिका दायर करने की योजना बना रहे हैं। एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार के अनुसार, सीबीआई जांच पर लगी रोक के कारण हजारों छात्रों का शैक्षिक सत्र प्रभावित हो रहा है और वे अपने भविष्य को लेकर भारी असमंजस की स्थिति में हैं। दूसरी ओर, जबलपुर हाई कोर्ट ने भी अपना रुख स्पष्ट करते हुए कह दिया है कि सीबीआई जांच पूरी होने से पहले नर्सिंग कॉलेजों को किसी भी प्रकार की राहत मिलना असंभव है। जिन कॉलेजों ने अंडरटेकिंग दी है, उन्हें पहले सुप्रीम कोर्ट से स्पष्ट निर्देश लेकर आने होंगे। परीक्षा का आयोजन अब पूरी तरह से सीबीआई द्वारा कॉलेजों को दी गई कैटेगरी और जांच रिपोर्ट पर ही निर्भर करेगा।
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