राष्ट्रीय राजनीति
एक घंटा पहले
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किराना हिल्स को लेकर फैली अफवाहों का सच
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान को पूरी तरह हिलाकर रख दिया था। इस अभियान के दौरान एक समय ऐसा आया था जब पाकिस्तान में हड़कंप मच गया और वहां की किराना हिल्स से धुआं उठता हुआ दिखाई दिया। इस दृश्य ने न केवल पाकिस्तानी सेना बल्कि पूरे देश में दहशत फैला दी थी। हर तरफ यह चर्चा होने लगी थी कि क्या भारत ने पाकिस्तान के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले परमाणु ठिकानों पर हमला कर दिया है। अब इस पूरे प्रकरण पर पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने विस्तार से अपनी बात रखी है और उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है जो काफी समय से सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर चल रही थीं।
अनिल चौहान ने किया दावों का खंडन
पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने एक चर्चा के दौरान इस बात को पूरी तरह से नकार दिया कि भारतीय सेना ने जानबूझकर किराना हिल्स को निशाना बनाया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि किराना हिल्स, जो पाकिस्तान का एक संवेदनशील परमाणु प्रतिष्ठान है, वहां भारत का कोई हमला नहीं हुआ था। उन्होंने उन तस्वीरों के पीछे के वास्तविक कारण का खुलासा करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने सरगोधा क्षेत्र में दुश्मन के रडार सिस्टम का पता लगाने के लिए कई आत्मघाती ड्रोन भेजे थे।
ड्रोन का पहाड़ी से टकराना ही धुएं की असली वजह
जनरल अनिल चौहान ने विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि सरगोधा से लगभग 10 किलोमीटर उत्तर में स्थित किराना हिल्स की पहाड़ियों से जो धुआं उठता हुआ दिखाई दिया था, वह किसी मिसाइल हमले का नतीजा नहीं था। उन्होंने बताया कि ये आत्मघाती ड्रोन एक निश्चित समय सीमा तक हवा में मंडराने के लिए डिजाइन किए गए थे, जो लगभग दो घंटे का समय होता है। यदि इस अवधि के दौरान ड्रोन को कोई निर्धारित लक्ष्य नहीं मिलता या उसकी उड़ान क्षमता समाप्त हो जाती है, तो वे अनियंत्रित होकर जमीन या किसी पहाड़ी से टकरा सकते हैं। संभवतः, उन्हीं में से एक ड्रोन अपनी क्षमता खत्म होने के बाद किराना हिल्स की पहाड़ियों से टकराया, जिससे वहां आग लगी और धुआं उठने लगा। इसी दृश्य को देखकर पाकिस्तानी अधिकारी घबरा गए थे और उन्हें लगा कि भारत ने उन पर हमला बोल दिया है।
वायुसेना की आधिकारिक स्थिति
पूर्व सीडीएस ने एयर मार्शल ए.के. भारती के उस पुराने बयान का भी समर्थन किया, जो उन्होंने पिछले साल 12 मई को दिया था। वायुसेना के तत्कालीन वायु संचालन महानिदेशक के रूप में, एयर मार्शल भारती ने स्पष्ट रूप से कहा था कि भारत ने किराना हिल्स पर कोई हमला नहीं किया है। एयर मार्शल भारती, जो 31 जुलाई को उप वायुसेना प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हुए, ने उस वक्त सोशल मीडिया पर चल रही तमाम अफवाहों को खारिज किया था। अनिल चौहान ने कहा कि मुझे लगा कि इस विषय पर स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक है, क्योंकि कई बार यह सवाल उठाया गया है कि क्या भारत ने वहां परमाणु ठिकानों को निशाना बनाया था।
ऑपरेशन सिंदूर की पृष्ठभूमि
यह पूरा घटनाक्रम 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ था। भारत ने इस हमले का कड़ा जवाब देने का संकल्प लिया था। इसके परिणामस्वरूप मई 2025 में भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित नौ आतंकी ठिकानों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर का संचालन किया। इस बड़े सैन्य अभियान में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे और उनके ठिकानों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था।
पाकिस्तान की हताशा और सीजफायर की मांग
ऑपरेशन सिंदूर के प्रभाव से पाकिस्तानी सेना पूरी तरह बेबस नजर आने लगी थी। भारतीय सेना द्वारा दागी गई ब्रह्मोस मिसाइलों ने न केवल आतंकियों के ठिकानों को बर्बाद किया, बल्कि उनके मुख्य एयरबेस को भी भारी नुकसान पहुंचाया था। किराना हिल्स की घटना ने पाकिस्तान की रही-सही हिम्मत भी तोड़ दी थी। उन्हें लगा था कि भारत का अगला निशाना उनके परमाणु ठिकाने हो सकते हैं, जिसके चलते पाकिस्तान ने तुरंत भारत के सामने सीजफायर यानी संघर्ष विराम की गुहार लगाना शुरू कर दिया था। इस पूरे घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया था कि भारत की जवाबी कार्रवाई कितनी सटीक और प्रभावी थी, जिसने दुश्मन को रक्षात्मक मुद्रा में आने पर मजबूर कर दिया था।
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