हार्ट अटैक का खतरा पहले ही भांप लेगा ये खास टेस्ट, डॉक्टर ने बताया बचाव का तरीका स्वास्थ्य एक घंटा पहले 4
दिल के दौरे की आशंका को कई साल पहले ही पहचाना जा सकता है, जिसके लिए विशेषज्ञों ने एक महत्वपूर्ण ब्लड टेस्ट की सलाह दी है। यह टेस्ट न केवल खतरे को दर्शाता है, बल्कि जीवनशैली में बदलाव कर जीवन बचाने में भी मदद करता है।

दिल की सेहत और बचाव का नया नजरिया

आज के दौर में कैंसर और हार्ट अटैक जैसी बीमारियां लोगों के बीच सबसे ज्यादा खौफ पैदा करती हैं। अक्सर लोग यह मानते हैं कि दिल का दौरा अचानक आता है और इसका पहले से अनुमान लगाना नामुमकिन है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान इसे पूरी तरह सही नहीं मानता है। हृदय रोग विशेषज्ञों का कहना है कि सही समय पर सही जांच कराने से हार्ट अटैक के खतरे को वर्षों पहले ही पहचाना जा सकता है। जिन लोगों के परिवार में दिल की बीमारियों का इतिहास रहा है या जो खुद जोखिम महसूस कर रहे हैं, उनके लिए यह विशेष जांच बेहद जरूरी है।

डॉक्टर ने दी महत्वपूर्ण जानकारी

सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट साकेत गोयल ने सोशल मीडिया के माध्यम से एक वीडियो साझा किया है, जिसमें उन्होंने हार्ट अटैक से जुड़े एक बड़े खुलासे के बारे में बताया है। उन्होंने एक ऐसे जेनेटिक फैक्टर का जिक्र किया है जो हार्ट अटैक के जोखिम को काफी पहले से भांप सकता है। डॉक्टर साकेत के अनुसार, यह कारक इतना प्रभावशाली है कि यदि किसी नवजात शिशु की गर्भनाल या गर्भाशय के सैंपल की जांच की जाए, तो उससे भी यह पता लगाया जा सकता है कि उसके माता-पिता को हृदय संबंधी समस्याओं का कितना अधिक खतरा है।

लिपोप्रोटीन ए टेस्ट है रामबाण

अक्सर हम ऐसी खबरें सुनते हैं जिनमें कोई व्यक्ति जिम, दफ्तर या किसी समारोह के दौरान अचानक गिर पड़ता है और हार्ट अटैक से उसकी जान चली जाती है। ऐसी घटनाओं के पीछे एक प्रमुख कारण छिपा हो सकता है जो हर चौथे भारतीय में देखा जाता है। डॉक्टर साकेत गोयल के अनुसार, इसका पता लगाने के लिए एक बहुत ही सरल ब्लड टेस्ट उपलब्ध है, जिसे लिपोप्रोटीन ए के नाम से जाना जाता है। यह जांच अब आसानी से उपलब्ध है और इसे हर किसी को गंभीरता से लेना चाहिए।

रिपोर्ट को कैसे समझें और सावधानी बरतें

अगर आपकी जांच रिपोर्ट में लिपोप्रोटीन ए का स्तर बढ़ा हुआ आता है, तो घबराने के बजाय सावधानी बरतने की आवश्यकता है। यह एक जेनेटिक फैक्टर है, इसलिए इसे बार-बार करवाने की जरूरत नहीं होती। यहां एक बात गौर करने वाली है कि लोग अक्सर लिपिड प्रोफाइल में एपोलिपोप्रोटीन ए और बी के साथ भ्रमित हो जाते हैं। डॉक्टर साकेत स्पष्ट करते हैं कि हमें केवल लिपोप्रोटीन ए पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।

लिपोप्रोटीन ए का स्तर और सुरक्षित सीमा

जांच के परिणामों को समझने के लिए मानक इस प्रकार हैं: यदि लिपोप्रोटीन ए का स्तर 30 mg/dl तक है, तो यह सामान्य माना जाता है। यदि यह 30 से 50 mg/dl के बीच है, तो आप बॉर्डर लाइन पर हैं। वहीं, यदि यह स्तर 50 mg/dl से अधिक है, तो यह उच्च जोखिम की श्रेणी में आता है।

खतरे से बचने के लिए जीवनशैली में बदलाव

यदि रिपोर्ट में लिपोप्रोटीन ए उच्च आता है, तो हृदय रोग से बचने के लिए आपको अपनी जीवनशैली में कड़े अनुशासन की आवश्यकता है। इसके लिए नीचे दिए गए कदम उठाए जा सकते हैं:

  • एंटी इंफ्लेमेटरी डाइट को अपनाएं।
  • भोजन में शुगर की मात्रा शून्य करें और गेहूं का सेवन कम रखें।
  • नियमित रूप से व्यायाम और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें।
  • एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर विशेष ध्यान दें। सामान्य व्यक्ति के लिए 100 mg/dl का एलडीएल ठीक माना जाता है, जबकि मधुमेह या हार्ट के मरीज के लिए यह सीमा 70 mg/dl होती है। लेकिन यदि आपका लिपोप्रोटीन ए अधिक है, तो आपको अपना एलडीएल कोलेस्ट्रॉल 50 mg/dl से नीचे रखना होगा।

यह छोटा सा बदलाव और समय पर की गई यह ब्लड जांच आपकी जान बचाने के लिए निर्णायक साबित हो सकती है।

डॉ. आलोक मिश्रा पाबना के स्वास्थ्य संवाददाता हैं और चिकित्सा, बीमारियों तथा वेलनेस से जुड़ी खबरों को प्रामाणिक तरीके से पाठकों तक पहुंचाते हैं। नई रिसर्च, इलाज और रोकथाम पर वे विशेषज्ञों के हवाले से सटीक जानकारी देते हैं। उनका जोर भरोसेमंद और जिम्मेदार स्वास्थ्य पत्रकारिता पर है।

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