रन भी नहीं, टीम में जगह भी नहीं—फिर भी रिटायरमेंट क्यों नहीं? सूर्यकुमार की कहानी का बड़ा सच क्रिकेट एक घंटा पहले 2
सूर्यकुमार यादव खेलना जारी रखना चाहते थे, मगर अंतिम फैसला चयनकर्ताओं का था और उन्होंने आगे देखने का रास्ता चुना। ऐसे में उनसे संन्यास की उम्मीद करना न तो उचित है और न ही व्यावहारिक।

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक सवाल जोर-शोर से तैर रहा है—क्या सूर्यकुमार यादव को रिटायर हो जाना चाहिए था? यह सवाल जितना सरल दिखता है, उतना है नहीं। अगर आप सूर्यकुमार नहीं हैं, तो यह सवाल वाजिब लग सकता है, लेकिन खुद सूर्यकुमार के लिए यह पूरी तरह निजी मामला है। यह उनका करियर है, उनका फैसला है और सबसे बढ़कर यह उनके आत्मविश्वास से जुड़ी कहानी है।

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में उठते सवालों के बीच IPL 2026 सूर्यकुमार के पास अपनी बादशाहत दोबारा साबित करने का सबसे बड़ा मंच था। मुंबई इंडियंस के इस खिलाड़ी से करोड़ों फैंस को उम्मीद थी कि घरेलू मैदान पर उतरते ही उनका पुराना ‘360 डिग्री’ अंदाज लौट आएगा। मगर यह सीजन उनके करियर का सबसे बड़ा दुःस्वप्न बन गया। पूरे टूर्नामेंट में वे रन-रन के लिए जूझते दिखे—न वह पुरानी टाइमिंग बची थी और न स्पिनरों के खिलाफ कलाई का वह जादू।

क्या वाकई रिटायरमेंट की राह पर हैं सूर्या?

सूर्यकुमार को हमेशा यकीन रहा कि उनके भीतर अब भी खेल बाकी है और सच कहें तो आज भी है। वे उपलब्ध थे, लेकिन लगातार रन न आने की वजह से चयनकर्ताओं को आगे देखना पड़ा। क्रिकेट में यह पूरी तरह जायज प्रक्रिया है। चयनकर्ताओं ने उन्हें लंबा मौका दिया और सूर्यकुमार खेलते रहना चाहते थे, मगर आखिरी फैसला चयनकर्ताओं का होता है और उन्होंने वही किया। ऐसे में उनसे संन्यास की उम्मीद करना न केवल अनुचित है, बल्कि पूरी तरह अव्यावहारिक भी है। सूर्यकुमार को कभी नहीं लगा कि उनका खेल खत्म हो चुका है।

एक दिलचस्प केस स्टडी

जिन लोगों ने कुछ महीने पहले ही उन्हें अपने चरम पर देखा है, उनके लिए यह मान पाना मुश्किल है कि वही बल्लेबाज अब रन नहीं बना पा रहा। लेकिन यही खेल है और यही इसकी सच्चाई है। यह रील नहीं, बल्कि रियल है और कई बार बेहद क्रूर भी।

सूर्यकुमार यादव हमेशा एक दिलचस्प केस स्टडी बने रहेंगे। उनके करियर को करीब से देखने वाले जानते हैं कि उन्हें मौका देर से मिला। कई घरेलू सीजन तक उन्होंने लगातार रन बनाए, लेकिन टीम इंडिया का दरवाजा नहीं खुला। जब मौका आया, तो उन्होंने दरवाजा तोड़कर एंट्री की और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।

टक्कर में कोई नहीं

टी20 क्रिकेट में उन्होंने खुद को तराशा और दुनिया भर में भारत के लिए मैच जिताऊ पारियां खेलीं। कप्तानी भी उन्हें आसानी से नहीं मिली। कई लोगों का मानना था कि रोहित शर्मा के बाद हार्दिक पांड्या को कप्तान बनाया जाना चाहिए था, लेकिन चोटों की वजह से चयनकर्ताओं ने सूर्यकुमार पर भरोसा जताया।

कप्तान के रूप में सूर्यकुमार ने लगभग सब कुछ जीता—द्विपक्षीय सीरीज, एशिया कप और वर्ल्ड कप। उन्होंने करीब 85 प्रतिशत मैचों में टीम को जीत दिलाई। इसके बावजूद उन्हें कप्तानी और टीम, दोनों से बाहर होना पड़ा। यही क्रिकेट है—टीम गेम होने के बावजूद यह सबसे ज्यादा व्यक्तिगत प्रदर्शन पर टिका रहता है। रन या विकेट ही आपकी जगह तय करते हैं।

क्या कप्तानी का दबाव उन पर हावी हो गया? क्या वे दोनों जिम्मेदारियां एक साथ नहीं संभाल पाए? या फिर कप्तानी की वेदी पर बल्लेबाज सूर्यकुमार की कुर्बानी हो गई? इन सवालों के जवाब शायद कभी नहीं मिलेंगे। पर इतना तय है कि यह एक ऐसे खिलाड़ी की कहानी है जिसने अपने मौके का इंतजार किया, फिर उसे मजबूती से थामा और भारत को घर में वर्ल्ड कप जिताने वाला कप्तान बना।

प्रेस कॉन्फ्रेंस बनी पतन की वजह

जब कामयाबी लगातार कदम चूमने लगती है, तो इंसान का आत्मविश्वास कभी-कभी दूसरों को अहंकार जैसा लगने लगता है। ऐसा ही एक वाकया तब हुआ जब टीम कॉम्बिनेशन और संजू सैमसन या तिलक वर्मा जैसे इन-फॉर्म खिलाड़ियों को बाहर बैठाने पर एक पत्रकार ने सवाल दागा। सूर्या ने उस गंभीर सवाल को अपनी जानी-पहचानी मुस्कान के साथ हल्के अंदाज में टालते हुए पलटकर पूछ लिया कि फिर किसकी जगह खिलाऊं—उसे ड्रॉप करूं या इसे?

लहजे में छिपी वह बेफिक्री और हंसी सोशल मीडिया को रास नहीं आई। लोगों ने इसे कप्तानी का घमंड कहा। मगर क्रिकेट का देवता बड़ा निर्मम है—जब सूर्या खुद रनों के लिए तरसने लगे, तो फैंस ने उसी वीडियो को ढाल बनाकर उन्हें बेरहमी से ट्रोल करना शुरू कर दिया। जो हंसी उस दिन सूर्या के चेहरे पर थी, वह अब गायब हो चुकी थी।

योगदान को कोई नहीं छीन सकता

आज जब सुर्खियां श्रेयस अय्यर की ओर मुड़ चुकी हैं और सूर्यकुमार पीछे छूटते नजर आ रहे हैं, तब भी उनके योगदान को कोई नहीं छीन सकता। वे हमेशा उस कप्तान के रूप में याद किए जाएंगे जिसने भारत को घरेलू टी20 वर्ल्ड कप जिताया और एशिया कप में पाकिस्तान के खिलाफ लगातार जीत दिलाई। अब जब वे खुद को दोबारा संवारने की कोशिश में जुटे हैं, तो यह कहना गलत नहीं होगा कि यह एक शानदार पारी रही है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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