खंडवा में बतख पालन और एक्वा पार्क से बदली तस्वीर, 160 महिलाओं को मिला रोजगार का नया रास्ता व्यापार 2 घंटे पहले 3
खंडवा जिले की नई पहल ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं के लिए उम्मीद बनकर उभरी है। बतख पालन और एकीकृत एक्वा मॉडल के जरिए महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं और अंडों से कमाई की तैयारी कर रही हैं।

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं की जिंदगी संवारने वाली एक नई पहल सामने आई है। यहां एकीकृत कृषि मॉडल के तहत बतख पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिसके चलते महिलाएं अब आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं और अंडों के जरिए अच्छी कमाई करेंगी। खासतौर पर खालवा विकासखंड के ग्राम रोशनी में करीब 1 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए क्लस्टर में महिलाएं बतख पालन के साथ-साथ अन्य पशुपालन गतिविधियों से भी जुड़ी हुई हैं।

इस पहल ने न केवल उनकी आमदनी बढ़ाई है, बल्कि उन्हें “लखपति दीदी” जैसी योजनाओं से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त भी बनाया है। यहां की महिलाएं अब बतख के अंडों का उत्पादन कर उन्हें बाजार में बेचने की तैयारी कर रही हैं, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और गांव में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

जीरो-वेस्ट मॉडल पर आधारित परियोजना

यह पूरी परियोजना नीति आयोग और शासन की अलग-अलग योजनाओं के सहयोग से तैयार की गई है, जो जीरो-वेस्ट मॉडल पर आधारित है। बतख पालन से निकलने वाले जैविक तत्व यानी मल-मूत्र पानी में घुलकर मछलियों के लिए प्राकृतिक भोजन यानी प्लैंकटन तैयार करते हैं, जिससे मछली पालन भी आसान और कम लागत वाला बन जाता है।

आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल

इस परियोजना में आधुनिक तकनीकों का भी भरपूर उपयोग किया जा रहा है। पानी को साफ करने और दोबारा इस्तेमाल में लाने के लिए बायोफ्लॉक तकनीक अपनाई गई है, जिसके तहत करीब 14 बायोफ्लॉक टैंक और रिवर्स एक्वा सिस्टम लगाए गए हैं। इससे एक ओर पानी की बचत होती है, वहीं दूसरी ओर उत्पादन में भी बढ़ोतरी होती है।

50 एकड़ में फैला एक्वा पार्क

करीब 50 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस एक्वा पार्क ने जनजातीय समाज, खासकर महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए रास्ते खोल दिए हैं। इस परियोजना से 16 स्वयं सहायता समूहों की लगभग 160 महिलाएं सीधे जुड़ी हुई हैं, जो मिलकर इसका संचालन करेंगी। यहां बतख पालन, अंडा उत्पादन, प्रशिक्षण और विपणन की पूरी व्यवस्था तैयार की गई है, जिससे महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने में आसानी होगी।

महिलाओं के लिए बड़ा अवसर

इस योजना को लेकर अनीता धोत्रे का कहना है कि यह पहल आदिवासी महिलाओं के लिए बहुत बड़ा अवसर है। इससे उन्हें रोजगार मिलेगा और वे अपना खुद का काम भी खड़ा कर सकेंगी। खंडवा जिले में पहली बार इस तरह का एकीकृत एक्वा मॉडल विकसित किया गया है, जहां बतख पालन के साथ मछली पालन भी किया जाएगा। इससे एक ओर मछलियों को प्राकृतिक भोजन मिलेगा, वहीं दूसरी ओर बतख के अंडों से अच्छी कमाई भी होगी।

खंडवा जिले की यह पहल ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं के लिए एक नई उम्मीद बनकर सामने आई है। बतख पालन के जरिए महिलाएं न सिर्फ आर्थिक रूप से मजबूत हो रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज के विकास में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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