32 लाख गंवाकर एक-एक रुपये को मोहताज हुए रांची के संजीत, आज करोड़ों का कारोबार और 50 लोगों को रोजगार व्यापार एक घंटा पहले 1
कोरोना काल में 32 लाख रुपये डूबने के बाद रांची के संजीत ने लोन लेकर संजीत एवियशन एकेडमी और एक होम डेकोर कंपनी खड़ी की। आज उनका सालाना टर्नओवर करोड़ों रुपये में है और उनके साथ 50 से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं।

झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले संजीत की कहानी हार के बाद दोबारा खड़े होने की मिसाल है। कोरोना काल में जब उनका 32 लाख रुपये डूब गया, तो हालात ऐसे हो गए कि वह एक-एक रुपये के लिए मोहताज हो गए। अपनी सारी सेविंग खर्च करनी पड़ी और घर चलाने के लिए दूसरों से पैसे मांगने की नौबत आ गई। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और लोन लेकर अपनी खुद की एयर होस्टेस अकादमी शुरू की। आज उनके पास अपनी एकेडमी है और एक होम डेकोर कंपनी भी।

17 साल की कमाई एक झटके में डूबी

संजीत बताते हैं कि उन्होंने 17 साल नौकरी करके अपने बिजनेस के लिए 32 लाख रुपये जोड़े थे। कोरोना काल में यह पूरी रकम डूब गई और वह सड़क पर आ गए। इस झटके ने उन्हें डिप्रेशन में धकेल दिया। उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था और ऐसा महसूस होता था कि सब कुछ खत्म हो चुका है, अब कुछ नहीं बचा।

एक इंस्टिट्यूट देखकर बदली जिंदगी

संजीत के मुताबिक, एक दिन उन्होंने एक व्यक्ति को एयर होस्टेस का इंस्टिट्यूट चलाते देखा। तभी उन्हें लगा कि यह काम तो वह भी कर सकते हैं। आसमान में उड़ने का शौक तो उन्हें हमेशा से रहा है, लेकिन इससे भी ज्यादा उन्हें निचले तबके के लोगों को आगे बढ़ाने का शौक है। यहीं से उन्हें विचार आया कि क्यों न लोअर मिडिल क्लास की लड़कियों को स्कॉलरशिप देकर एयर होस्टेस और क्रू मेंबर की ट्रेनिंग दी जाए।

इसी सोच के साथ उन्होंने एक बार फिर लोन लिया, दोस्तों से कुछ पैसे उधार मांगे और अपनी अकादमी शुरू कर दी, जिसका नाम है संजीत एवियशन एकेडमी। आज उनके पास लाइसेंस है और उनके इंस्टिट्यूट में 300 से अधिक लड़कियां और लड़के ट्रेनिंग ले रहे हैं। खास बात यह है कि वह गरीब लड़कियों को मुफ्त में स्कॉलरशिप देते हैं। यहां से ट्रेनिंग लेने वाली लड़कियों की प्लेसमेंट सीधे इंडिगो और एयर इंडिया जैसी कंपनियों में होती है।

होम डेकोर कंपनी भी चल रही हिट

संजीत बताते हैं कि एकेडमी के अलावा उनकी एक होम डेकोर कंपनी भी है, जहां घर सजाने के कई तरह के सामान मिलते हैं। ये सारे आइटम वह खुद तैयार करते हैं और इसके लिए उनके अपने कारीगर हैं, जो डिजाइन का काम संभालते हैं। आज एकेडमी और डेकोर मिलाकर उनके साथ 50 से अधिक लोग जुड़े हुए हैं। एक समय था जब वह खुद एक रुपये के लिए मोहताज थे, और आज वह 50 लोगों को रोजगार दे रहे हैं।

पॉजिटिव सोच ही असली ताकत

संजीत मानते हैं कि यह सब उनकी सकारात्मक सोच की वजह से ही संभव हो पाया। वह कहते हैं कि चाहे आप जीरो ही क्यों न हो जाएं, हमेशा पॉजिटिव रहिए और यह विश्वास रखिए कि एक दिन सब कुछ अच्छा होगा। यह सिर्फ वक्त की बात है, जिंदगी में ऊपर-नीचे चलता रहता है। जब आप सकारात्मक रहते हैं तो आपके भीतर भरोसा बना रहता है, और तब आपका वक्त जरूर बदलता है।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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