सफलता की मिसाल: 64 साल की लक्ष्मी हर 3 महीने में बदल देती हैं अपना बिजनेस, हर महीने कमाती हैं 50,000 रुपये व्यापार 2 घंटे पहले 5
रांची की 64 वर्षीय लक्ष्मी अपने अनोखे बिजनेस मॉडल से न केवल खुद आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी हुनर सिखाकर स्वावलंबी बना रही हैं।

रांची की प्रेरणादायक कहानी

झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली 64 वर्षीय लक्ष्मी आज उन महिलाओं के लिए एक बड़ी मिसाल बनकर उभरी हैं जो अपने पैरों पर खड़ा होना चाहती हैं। लक्ष्मी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह हर तीसरे महीने अपने व्यवसाय का स्वरूप पूरी तरह बदल देती हैं। मौसम और त्योहारों के अनुसार खुद को ढालने की उनकी कला ही उनकी सफलता का मुख्य राज है। फिलहाल वह जन्माष्टमी और तीज के त्योहारों को ध्यान में रखते हुए गुजरात से विशेष कलेक्शन मंगा रही हैं। उनका अपना ब्रांड लक्ष्मी कलेक्शन अब रांची में एक जाना-माना नाम बन चुका है।

हर मौसम के साथ बदलता है व्यापार

लक्ष्मी का व्यापार पूरी तरह से मौसम और मांग पर आधारित है। वह बताती हैं कि जब ठंड का मौसम आता है, तो वह रागी के लड्डू और गर्म कुर्तियों का कारोबार करती हैं। वहीं, गर्मी के दिनों में वह मौसम की अनुकूलता के हिसाब से अपना स्टॉक बदल लेती हैं। वर्तमान में उनका पूरा ध्यान आने वाले त्योहारों जैसे जन्माष्टमी, तीज, नवरात्रि और दीपावली पर केंद्रित है। वह इन त्योहारों के लिए विशेष रूप से खरीदारी करती हैं और बाजार की मांग को समझते हुए अपना स्टॉक तैयार करती हैं। इस चतुर रणनीति के दम पर वह हर महीने लगभग 50,000 रुपये की शानदार कमाई कर लेती हैं।

सिलाई के हुनर में 40 सालों का अनुभव

लक्ष्मी के काम में जो फिनिशिंग और डिजाइन दिखता है, उसके पीछे उनका 40 सालों का लंबा अनुभव है। सिलाई उनका ऐसा हुनर है जिसे वह बेहद बारीकी से करती हैं। वह बताती हैं कि जन्माष्टमी के मौके पर वह बच्चों के लिए राधा रानी की पोशाक, लड्डू गोपाल के कपड़े और बांसुरी जैसी चीजें खुद अपने हाथों से तैयार करती हैं। उनके डिजाइन्स बाजार में मिलने वाले सामान्य उत्पादों से काफी अलग और अनूठे होते हैं। यही कारण है कि जो ग्राहक एक बार उनका सामान खरीदता है, वह उनका स्थायी ग्राहक बन जाता है।

महिलाओं को बना रही हैं आत्मनिर्भर

लक्ष्मी केवल अपनी कमाई तक सीमित नहीं हैं। वह अपने घर और बच्चों की जिम्मेदारियों को बखूबी निभाने के साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने का रास्ता दिखा रही हैं। वह अपने पास आने वाली महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण देती हैं ताकि वे भी आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकें। लक्ष्मी ने अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाकर उन्हें काबिल बनाया है, जो अब अपने पैरों पर खड़े हो चुके हैं। 64 साल की उम्र में भी उनका उत्साह युवाओं के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है। उनका मानना है कि अगर मन में कुछ करने का जज्बा हो, तो उम्र कभी भी बाधा नहीं बनती। वे आज एक सफल उद्यमी के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं और समाज की अन्य महिलाओं के लिए एक बड़ा सहारा साबित हो रही हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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