राहुल गांधी को पीएम बनाने पर कांग्रेस का अल्टीमेटम, TVK से कहा- सहमति नहीं तो मंत्री देंगे इस्तीफा भारत एक घंटा पहले 4
तमिलनाडु की गठबंधन सरकार में शामिल कांग्रेस ने विजय की पार्टी TVK को दो टूक चेतावनी दी है। कांग्रेस नेता का कहना है कि राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने पर समर्थन न मिला तो उनके मंत्री इस्तीफा दे देंगे।

राजनीतिक घमासान और कांग्रेस की चेतावनी

तमिलनाडु में चल रही गठबंधन सरकार में दरार की खबरें सामने आ रही हैं। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्री कझगम यानी TVK सरकार में कांग्रेस एक महत्वपूर्ण सहयोगी दल है। हालांकि, हाल ही में कांग्रेस नेता और राज्य सरकार के मंत्री राजेश कुमार ने TVK को एक बड़ी चेतावनी देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। उनका कहना है कि अगर TVK इस बात पर राजी नहीं होती है कि राहुल गांधी आगामी प्रधानमंत्री बनेंगे, तो कांग्रेस के दो मंत्री अपने पदों से इस्तीफा देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

मंत्री राजेश कुमार का बयान

कन्याकुमारी में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मंत्री राजेश कुमार ने कांग्रेस के रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि साल 2029 में राहुल गांधी निश्चित रूप से भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अगर TVK का नेतृत्व इस दावे से इत्तेफाक नहीं रखता है, तो गठबंधन में शामिल कांग्रेस के दोनों मंत्री अपने पद का त्याग कर देंगे। यह बयान राज्य के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों में कांग्रेस के कड़े स्टैंड को दर्शाता है।

एमके स्टालिन की सुरक्षा में कटौती

एक ओर जहां गठबंधन दलों के बीच तनाव की खबरें आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर TVK सरकार ने राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, राज्य सचिवालय में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के उपरांत तमिलनाडु पुलिस की कोर सेल सिक्योरिटी विंग ने एमके स्टालिन की सुरक्षा कैटेगरी को कम कर दिया है। अब उनकी सुरक्षा Z+ से घटाकर Z कैटेगरी कर दी गई है। इस बदलाव के चलते उनकी सुरक्षा में तैनात सुरक्षाकर्मियों की कुल संख्या 54 से घटाकर 34 कर दी गई है। यह घटनाक्रम राज्य में तेजी से बदलते राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों की ओर इशारा कर रहा है।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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