धर्म
2 घंटे पहले
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सावन की अंतिम सोमवारी पर शिवमय हुआ कोडरमा
सावन के पवित्र महीने की चौथी और अंतिम सोमवारी को कोडरमा पूरी तरह से भगवान शिव की भक्ति में डूबा नजर आया। इस खास अवसर पर शहर में एक भव्य कांवड़ पदयात्रा का आयोजन किया गया, जिसने पूरे वातावरण को शिवमय बना दिया। श्री राम संकीर्तन मंडल की ओर से आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम के अंतर्गत झुमरी तिलैया के झरनाकुंड धाम से लेकर कोडरमा के विख्यात ध्वजाधारी धाम तक श्रद्धालुओं का जत्था उमड़ पड़ा। यह कांवड़ यात्रा अपने आयोजन के 27वें वर्ष में प्रवेश कर चुकी है, जिसमें भारी संख्या में महिला-पुरुष और युवाओं ने पूरे उत्साह के साथ अपनी सहभागिता सुनिश्चित की।
12 किलोमीटर की पदयात्रा और 777 सीढ़ियों का सफर
श्रद्धालुओं ने अपनी यात्रा की शुरुआत झरनाकुंड धाम से पवित्र जल भरकर की। यहाँ से करीब 12 किलोमीटर का लंबा रास्ता तय करते हुए भक्त पैदल ध्वजाधारी धाम पहुंचे। इस यात्रा का सबसे कठिन लेकिन आस्था से भरा पड़ाव पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक पहुंचना रहा, जहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को 777 सीढ़ियां चढ़नी पड़ीं। ऊपर पहुंचकर भक्तों ने शिव लिंग पर जलाभिषेक किया और अपनी मन्नतें मांगीं। इस पूरे मार्ग पर हर-हर महादेव के जयघोष से वातावरण गुंजायमान रहा।
झांकियों और कला प्रदर्शन ने बढ़ाया उत्साह
इस वर्ष की कांवड़ पदयात्रा में कानपुर से विशेष रूप से आई महाकाल की भव्य झांकी लोगों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। कलाकारों ने अपनी अद्भुत प्रस्तुतियों से कांवड़ियों का उत्साहवर्धन किया। यात्रा के दौरान कलाकारों ने विभिन्न स्थानों पर आग के साथ कलाबाजी दिखाते हुए अनूठी आकृतियां बनाईं, जिसे देखकर राहगीर और भक्त मंत्रमुग्ध हो गए। इसके अलावा, बाईपास रोड पर स्थित शिव वाटिका में दुर्गापुर से आए कलाकारों द्वारा शिव तांडव नृत्य और इच्छाधारी नागिन की प्रस्तुति दी गई। इन प्रस्तुतियों ने वहां मौजूद भीड़ का मन मोह लिया और लोगों ने कलाकारों की खूब सराहना की।
सेवा शिविरों का आयोजन और प्रशासन की मुस्तैदी
पूरी 12 किलोमीटर की लंबी यात्रा के दौरान कांवड़ियों के लिए जगह-जगह सेवा शिविर लगाए गए थे। स्थानीय लोगों, विभिन्न सामाजिक संस्थाओं और सेवा समितियों ने आगे बढ़कर श्रद्धालुओं की सेवा की। इन शिविरों में निशुल्क चाय, शर्बत, जूस, फल, पूड़ी और हलवा जैसी खाद्य सामग्री का वितरण किया गया, जिससे कांवड़ियों को अपनी थकान मिटाने में मदद मिली। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला और पुलिस प्रशासन पूरी तरह चौकन्ना रहा। ध्वजाधारी धाम स्थित मुख्य नियंत्रण कक्ष से सीसीटीवी कैमरों के जरिए मंदिर परिसर, कतारों और श्रद्धालुओं की आवाजाही पर निरंतर निगरानी रखी गई ताकि किसी भी भक्त को असुविधा न हो और विधि-व्यवस्था बनी रहे।
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