सफलता की कहानी: सेल्स मैनेजर की नौकरी छोड़कर संजीव बने खुद के मालिक, आज करोड़ों का है कारोबार व्यापार एक महीने पहले 74
पूर्णिया के संजीव कुमार ने बीटेक और एमबीए की पढ़ाई के बाद कई शहरों में सेल्स मैनेजर के तौर पर काम किया, लेकिन उनका सपना खुद का व्यवसाय शुरू करने का था। आज वे अपनी कंपनी के मालिक हैं और सालाना 2.5 करोड़ रुपये का टर्नओवर हासिल कर रहे हैं।

सपनों को हकीकत में बदलने की मिसाल

अक्सर कहा जाता है कि दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो किसी भी बड़ी चुनौती को पार किया जा सकता है। बिहार के पूर्णिया जिले के निवासी संजीव कुमार ने इसे सच कर दिखाया है। एक समय था जब संजीव दूसरों की कंपनियों में काम किया करते थे, लेकिन उनके भीतर एक अपना संस्थान खड़ा करने की तीव्र ललक थी। अपनी कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन की बदौलत आज वे केवल खुद के मालिक ही नहीं हैं, बल्कि कई अन्य लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं। उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर आज 2.5 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।

शिक्षा और करियर का सफर

संजीव कुमार ने अपनी उच्च शिक्षा के अंतर्गत बीटेक और एमबीए जैसी डिग्रियां हासिल कीं। अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में विभिन्न निजी कंपनियों में काम किया। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत सेल्स मैनेजर के तौर पर की थी, जहां उन्होंने बैंक से लेकर कई प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं। हालांकि, कॉर्पोरेट जगत की यह भागदौड़ उन्हें लंबे समय तक संतुष्ट नहीं कर सकी क्योंकि उनके मन में कुछ अलग करने की योजना थी।

बिहार के युवाओं के लिए मिसाल

संजीव बताते हैं कि उन्होंने अपनी पढ़ाई के बाद जिस तरह रोजगार के लिए संघर्ष देखा था, वह नहीं चाहते थे कि बिहार का कोई भी युवा इसी तरह धक्के खाए। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने खुद का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। वे चाहते थे कि राज्य के युवाओं को रोजगार के लिए बाहर न जाना पड़े। इस सोच के साथ उन्होंने सबसे पहले छोटे उद्योगों से अपने स्टार्टअप की शुरुआत की। धीरे-धीरे उन्होंने अपने काम का विस्तार किया और बाद में बैद्यनाथ एक्वा प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना की, जो आज एक सफल वाटर प्लांट के रूप में पहचानी जाती है।

व्यवसाय का विस्तार और लोगों को रोजगार

संजीव ने अपने व्यापार को केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने अलग-अलग जिलों में अपने वाटर प्लांट की इकाइयां खोलनी शुरू कीं। इसके पीछे उनका मुख्य उद्देश्य रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देना था ताकि युवा वर्ग आत्मनिर्भर बन सके। संजीव के पास वर्तमान में आटा चक्की प्लांट, सोडा जूस और वाटर प्लांट जैसे उद्योगों के लिए जरूरी मशीनें भी उपलब्ध हैं। कोई भी युवा कम से कम लागत में उनके साथ जुड़कर अपना स्वयं का व्यवसाय शुरू कर सकता है।

व्यवसायी बनने के लिए जरूरी सीख

संजीव का मानना है कि नौकरीपेशा से मालिक बनने का सपना हर किसी का होता है, लेकिन इसे हकीकत में बदलने के लिए उचित मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। उनका सुझाव है कि यदि आप व्यवसाय में उतरना चाहते हैं, तो सबसे पहले खुद के भीतर आत्मविश्वास पैदा करें। एक व्यापारी की तरह सोचना सीखें और भविष्य के लिए योजना बनाएं। उन्होंने यह भी सलाह दी कि किसी भी व्यवसाय को शुरू करने से पहले उस क्षेत्र में एक या दो महीने का गहन अनुभव जरूर लें। व्यावहारिक अनुभव ही आपको बाजार की बारीकियों को समझने में मदद करेगा।

मध्यम वर्गीय परिवार से उठकर बनाई पहचान

संजीव की पारिवारिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उनके पिता पूर्णिया में एक सरकारी स्कूल में शिक्षक थे। एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद संजीव ने हिम्मत नहीं हारी और स्टार्टअप का रास्ता चुना। आज वे अपने प्लांट की विभिन्न फ्रेंचाइजी के माध्यम से न केवल अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं, बल्कि दर्जनों युवाओं को उनके पैरों पर खड़ा करने में भी मदद कर रहे हैं। संजीव की यह सफलता की कहानी उन सभी युवाओं के लिए एक प्रेरणा है जो शून्य से शुरुआत कर शिखर तक पहुंचना चाहते हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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