व्यापार
9 घंटे पहले
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विचारों
बचपन से शुरू हुआ संघर्ष और मेहनत
बिलासपुर शहर के कंपनी गार्डन के समीप जब शाम ढलती है, तो एक साइकिल लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेती है। इस साइकिल पर लदे रंग-बिरंगे डिब्बे और उन्हें बेचते हुए नंद कुमार निर्मलकर का चेहरा, कई लोगों के लिए एक परिचित दृश्य है। नंद कुमार यहाँ शक्कर और फ्लेवर से तैयार होने वाली बंबई मिठाई बेचते हैं, जिसे आमतौर पर लोग कॉटन कैंडी या हवाई मिठाई के नाम से जानते हैं। उनके लिए यह केवल व्यापार नहीं, बल्कि जीवन जीने का आधार है। नंद कुमार बताते हैं कि उन्होंने महज 10-11 साल की उम्र में इस काम की शुरुआत की थी। तब से लेकर आज तक वे पूरी मेहनत और ईमानदारी से इस पेशे में लगे हुए हैं।
काम से ही बनाई अपनी पहचान
इस छोटे से व्यवसाय ने उन्हें वह सब कुछ दिया है जो एक व्यक्ति अपनी मेहनत के बल पर चाहता है। नंद कुमार ने साइकिल पर मिठाई बेचकर न केवल अपने परिवार का पालन-पोषण किया, बल्कि इसी कमाई के जरिए उन्होंने अपना पक्का घर भी बनाया है। यही नहीं, उनके परिश्रम का ही नतीजा है कि उन्होंने जमीन खरीदी और अब वे खेती-बाड़ी भी कर रहे हैं। कंपनी गार्डन के पास उनकी मौजूदगी अब नियमित हो चुकी है, जहाँ वे अपनी साइकिल लेकर पहुंचते हैं और ग्राहकों को लुभाते हैं।
कैसे तैयार होती है यह खास मिठाई
नंद कुमार के अनुसार, इस मिठाई को बनाने की प्रक्रिया बहुत ही रोचक और सरल है। इसमें मुख्य सामग्री के रूप में शक्कर, अलग-अलग प्रकार के फ्लेवर और खाद्य रंगों का उपयोग किया जाता है। वे इसे तैयार करने के लिए एक विशेष चिमनी वाली मशीन का सहारा लेते हैं। हालाँकि बाजार में आज इलेक्ट्रिक मशीनें भी उपलब्ध हैं, लेकिन नंद कुमार का मानना है कि चिमनी वाली मशीन से काम करना अधिक सुविधाजनक और प्रभावी होता है। अलग-अलग रंगों के मिश्रण से तैयार यह मिठाई बच्चों और बड़ों सभी को खूब पसंद आती है।
मुनाफे का गणित और दैनिक बिक्री
आर्थिक पहलुओं की बात करें तो नंद कुमार का कहना है कि यह काम काफी किफायती है। वे बताते हैं कि लगभग एक किलो शक्कर का इस्तेमाल करके बंबई मिठाई बनाने में करीब एक से सवा घंटे का समय लग जाता है। इतनी शक्कर से वे करीब 650 से 700 रुपये तक की मिठाई तैयार कर लेते हैं। उनकी बिक्री के आंकड़ों पर गौर करें तो वे रोजाना करीब 100 से 120 पीस 10 रुपये वाले बेचते हैं। इसके अलावा, उनके पास 20 रुपये वाले पैक भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहते हैं। इस तरह, अपनी मेहनत से वे रोजाना करीब 1000 रुपये तक का कारोबार कर लेते हैं।
कम लागत में रोजगार का जरिया
नंद कुमार का मानना है कि जो लोग छोटे स्तर पर अपना काम शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है। इसमें बहुत भारी-भरकम निवेश की आवश्यकता नहीं होती है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार भी कम लागत लगाकर इसे अपना रोजगार बना सकते हैं और अपने जीवन स्तर में सुधार कर सकते हैं। वे इसे उन बच्चों के लिए भी एक अच्छा अवसर मानते हैं जो अपनी पढ़ाई के साथ-साथ कुछ खाली समय में जेब खर्च कमाना चाहते हैं।
बच्चों को सिखा रहे हैं आत्मनिर्भरता
अपनी सफलता की कहानी के साथ-साथ नंद कुमार अपने बच्चों को भी आत्मनिर्भर बनाने की सीख दे रहे हैं। उनके बच्चे स्कूल से आने के बाद अपनी पढ़ाई पूरी करने के साथ-साथ रोजाना एक-दो घंटे इस काम में उनका हाथ भी बंटाते हैं। उनके परिवार की स्थिति यह है कि बड़ा बेटा 12वीं कक्षा में पढ़ रहा है, जबकि बाकी बच्चे भी विद्यालय जा रहे हैं। नंद कुमार का उद्देश्य सिर्फ पैसा कमाना नहीं, बल्कि अपने बच्चों को यह सिखाना है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता और मेहनत से ही सफलता हासिल की जा सकती है। इसी जज्बे के साथ वे आज भी अपनी साइकिल लेकर लोगों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर रहे हैं।
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