व्यापार
एक घंटा पहले
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विचारों
बिहार के जहानाबाद जिले से उद्यमिता की एक बेहद खूबसूरत और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। आमतौर पर हम व्यापार क्षेत्र में पिता-पुत्र, भाई-भाई या फिर पति-पत्नी की जोड़ियों को एक साथ काम करते हुए देखते हैं। लेकिन जहानाबाद में एक भाई और बहन की जोड़ी ने मिलकर व्यापार की दुनिया में एक नई मिसाल पेश की है। उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद दोनों ने नौकरी के पारंपरिक रास्ते को छोड़कर खुद का व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया। आज यह भाई-बहन मिलकर केक का एक सफल ब्रांडेड आउटलेट चला रहे हैं और हर महीने बेहतरीन कमाई कर रहे हैं।
बाजार की कमी को पहचानकर शुरू किया काम
इस सफल व्यावसायिक सफर की शुरुआत साल 2021 में हुई थी। उस समय जहानाबाद शहर में कोई भी ब्रांडेड केक का आउटलेट मौजूद नहीं था। स्थानीय लोगों को जब भी किसी खास मौके जैसे जन्मदिन, सालगिरह या किसी उत्सव के लिए अच्छे और ब्रांडेड केक की जरूरत होती थी, तो उन्हें पटना या गया जैसे बड़े शहरों पर निर्भर रहना पड़ता था। लोगों को इन शहरों से केक मंगवाना पड़ता था, जिसमें समय और पैसा दोनों ही अधिक खर्च होते थे। शैली केशरी और सौमिक केशरी ने इस कमी को भांप लिया। उन्होंने तय किया कि वे बाहर जाकर नौकरी करने के बजाय अपने ही शहर में इस समस्या का समाधान करेंगे। इसी सोच के साथ उन्होंने जहानाबाद में प्रसिद्ध ब्रांड मोंजिनीस का पहला आउटलेट खोला।
उच्च शिक्षित हैं दोनों भाई-बहन
इस व्यवसाय को शुरू करने वाले दोनों भाई-बहन उच्च शिक्षित हैं और व्यावसायिक प्रबंधन की गहरी समझ रखते हैं। बहन शैली केशरी ने पटना यूनिवर्सिटी से MBA की पढ़ाई पूरी की है। पढ़ाई पूरी होने के बाद उनका चयन एक अच्छी कंपनी में भी हो गया था, जहां उन्हें आकर्षक वेतन मिल सकता था। लेकिन शैली के मन में कुछ अलग करने की चाह थी। वह नौकरी करने के बजाय दूसरों को रोजगार देने का सपना देखती थीं। इसी सपने को पूरा करने के लिए उन्होंने नौकरी का प्रस्ताव ठुकरा दिया और साल 2021 में सौमिक कैफे की नींव रखी। इस यात्रा में उन्हें अपने भाई सौमिक केशरी का पूरा साथ मिला। सौमिक खुद भी पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी से MBA की पढ़ाई कर रहे हैं और अपनी बहन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस कारोबार को संभाल रहे हैं।
घर पर रहकर व्यापार करने की अनूठी सोच
शैली और सौमिक दोनों का मानना है कि बड़े शहरों में जाकर नौकरी करने से बेहतर है कि अपने घर पर रहकर ही कुछ बड़ा किया जाए। उनका कहना है कि बाहर के शहरों में जाकर इंसान चाहे कितनी भी कमाई कर ले, लेकिन वहां परिवार का वह साथ और प्यार नहीं मिल पाएगा जो अपने घर पर मिलता है। इसके अलावा, महानगरों में रहने का खर्च भी बहुत ज्यादा होता है, जिससे होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा खर्च हो जाता है। ऐसे में अपने ही गृह नगर में व्यवसाय शुरू करना एक बेहद व्यावहारिक और फायदेमंद निर्णय साबित हुआ। आज दोनों भाई-बहन अपने इस फैसले से बेहद खुश हैं और दोनों ही आउटलेट्स के काम में पूरी तरह व्यस्त रहते हैं।
एक से दो आउटलेट तक का सफर और लाखों का टर्नओवर
शुरुआती दिनों को याद करते हुए शैली केशरी बताती हैं कि जब उन्होंने साल 2021 में इस काम की शुरुआत की थी, तब उनके मन में कई तरह की शंकाएं थीं। वे अक्सर सोचती थीं कि क्या जहानाबाद जैसा छोटा शहर उनके इस नए प्रयोग को स्वीकार करेगा और क्या लोगों का भरपूर प्यार और सहयोग उन्हें मिल पाएगा? लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, ग्राहकों का उन पर भरोसा बढ़ता गया। ग्राहकों के इसी अटूट विश्वास और मांग के कारण आज वे एक नहीं बल्कि दो-दो आउटलेट का संचालन कर रहे हैं। आज उनके इस व्यवसाय का सालाना टर्नओवर लाखों रुपये में पहुंच चुका है। शैली का कहना है कि आज उन्हें जो पहचान और आर्थिक आत्मनिर्भरता अपने घर पर रहकर मिली है, वह किसी महानगर के बंद दफ्तर में बैठकर नौकरी करने से कभी हासिल नहीं हो पाती।
भाई-बहन की सफलता के मुख्य कारण
- बाजार की सही समझ: जहानाबाद में ब्रांडेड केक की कमी को समय पर पहचानना और उस अंतर को पाटना।
- नौकरी के बजाय स्वरोजगार को प्राथमिकता: शैली का नौकरी देने वाला बनने का सपना और आकर्षक जॉब ऑफर को ठुकराना।
- आपसी तालमेल और सहयोग: दोनों भाई-बहन का एक साथ मिलकर काम करना और व्यावसायिक कौशल का सही उपयोग करना।
- गुणवत्ता और विश्वसनीयता: ग्राहकों को बेहतरीन स्वाद और ब्रांडेड सेवाएं प्रदान कर उनका भरोसा जीतना।
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