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एक घंटा पहले
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सफलता की अनोखी दास्तां
जीवन में आने वाली कठिनाइयां अक्सर लोगों का हौसला तोड़ देती हैं, लेकिन पटना के पालीगंज प्रखंड के रहने वाले गिरिधर ने साबित कर दिया कि दृढ़ संकल्प और निरंतर प्रयास से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है। वर्तमान में गया जिले के मोहनपुर डिग्री कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे गिरिधर का सफर प्रेरणा से भरा है। उनके पिता एक सरपंच हैं और उनकी माताजी आंगनवाड़ी सहायिका के रूप में कार्यरत हैं, जिन्होंने हमेशा उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
नवोदय विद्यालय से शुरू हुआ शैक्षणिक सफर
गिरिधर की प्रारंभिक शिक्षा और मेधा के बारे में बात करें तो उन्होंने कक्षा 6 से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई जवाहर नवोदय विद्यालय, पटना से पूरी की। बचपन से ही मेधावी रहे गिरिधर ने कड़ी मेहनत के दम पर नवोदय की प्रवेश परीक्षा पास की थी। स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय यानी इग्नू से अपनी ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। इस दौरान उन्होंने सरकारी नौकरी पाने के लिए काफी प्रयास किए, लेकिन सफलता हाथ न लगने पर उन्होंने अपनी दिशा बदलने का निर्णय लिया।
सीयूएसबी में हासिल की बड़ी उपलब्धि
ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा की ओर कदम बढ़ाए और गया में स्थित दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUSB) में स्नातकोत्तर यानी एमए में दाखिला लिया। वर्ष 2022-24 के सत्र के दौरान उन्होंने पॉलिटिकल साइंस और इंटरनेशनल रिलेशन जैसे विषयों में अपनी पढ़ाई पूरी की। इस दौरान उनका प्रदर्शन असाधारण रहा और उन्होंने अपने विभाग में सर्वोच्च अंक प्राप्त किए। उनकी इसी शैक्षणिक उत्कृष्टता के कारण उन्हें विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।
संघर्ष से सफलता तक का मंत्र
गिरिधर बताते हैं कि कुछ साल पहले तक उनके परिवार की आर्थिक स्थिति काफी चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन शिक्षा के प्रति उनके जुनून में कभी कमी नहीं आई। उन्होंने न केवल अपनी पढ़ाई जारी रखी, बल्कि यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा भी सफलतापूर्वक उत्तीर्ण की। नेट और जेआरएफ क्वालिफाई करने के बाद वे आज एक असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में अपना योगदान दे रहे हैं।
सफलता के लिए युवाओं को सीख
अपनी सफलता का श्रेय वे अपनी मेहनत और सही समय पर लिए गए फैसलों को देते हैं। उनका मानना है कि यदि किसी क्षेत्र में सफलता न मिले, तो हताश होने के बजाय विकल्पों पर विचार करना चाहिए। उन्होंने सरकारी नौकरी की तैयारी के दौर में असफलता मिलने के बावजूद हार नहीं मानी और एमए करने का निर्णय लिया, जिसने उनके करियर की दिशा ही बदल दी। आज गिरिधर उन छात्रों के लिए एक मिसाल हैं जो सीमित संसाधनों के बीच भी बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।
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