कंप्यूटर शिक्षिका से कलाकार तक: पुनीता ने सोहराय कला से गढ़ी झारखंड की नई पहचान व्यापार एक महीने पहले 29
जमशेदपुर की पुनीता कुमारी ने कंप्यूटर शिक्षा से करियर शुरू किया और आज सोहराय चित्रकला के जरिए झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिला रही हैं।

जमशेदपुर की रहने वाली पुनीता कुमारी की जीवन यात्रा जुनून और बदलाव की एक प्रेरक मिसाल है। एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक का उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि लगन हो तो रास्ते अपने आप बनते चले जाते हैं।

करियर की शुरुआत

पुनीता ने अपने पेशेवर जीवन की नींव कंप्यूटर शिक्षा के क्षेत्र से रखी। इसके बाद उन्होंने शेयर बाजार और शिक्षण के क्षेत्र में भी अपनी सेवाएं दीं। अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हुए उन्होंने व्यापक अनुभव अर्जित किया।

सोहराय कला से जुड़ाव

वर्ष 2009 के बाद झारखंड के गांवों में मिट्टी की दीवारों पर उकेरी जाने वाली सोहराय चित्रकला ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। इस पारंपरिक कला की सुंदरता ने उनके मन में एक नई दिशा की ओर कदम बढ़ाने की प्रेरणा जगाई। उन्होंने इस कला का विधिवत प्रशिक्षण लिया और धीरे-धीरे इसे अपने जीवन का जुनून बना लिया।

विरासत को नई पहचान

आज पुनीता "कलर एंड ब्रश" के माध्यम से सोहराय कला को आगे बढ़ाने का काम कर रही हैं। वे जूट बैग, फाइल फोल्डर और अन्य उत्पादों पर इस पारंपरिक कला को उकेरकर न सिर्फ इसे संरक्षित कर रही हैं, बल्कि झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को एक नई पहचान भी दिला रही हैं।

राजीव खन्ना पाबना के व्यापार संवाददाता हैं और कंपनियों, बाजार तथा अर्थव्यवस्था की खबरों को सरल भाषा में समझाते हैं। कारोबार जगत के बड़े फैसलों, नीतिगत बदलावों और उनके आम आदमी पर असर को वे गहराई से कवर करते हैं। उनका मकसद जटिल आर्थिक खबरों को हर पाठक के लिए आसान बनाना है।

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