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2 घंटे पहले
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मैनपाट की वादियों में भुट्टे का अनोखा स्वाद
छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित हिल स्टेशन मैनपाट अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। लेकिन आज यहां की चर्चा केवल वादियों के लिए नहीं, बल्कि बालरीकिम कुमार द्वारा शुरू किए गए एक छोटे से कारोबार के कारण भी हो रही है। बालरीकिम ने बिना किसी आधुनिक तकनीक के, पूरी तरह से देसी अंदाज में भुट्टा बेचने का काम शुरू किया और आज वे आत्मनिर्भरता की एक बड़ी मिसाल बन चुके हैं। उनकी सफलता की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा है जो छोटे स्तर से काम शुरू करना चाहते हैं।
लकड़ी के चूल्हे और देसी स्वाद का जादू
बालरीकिम के भुट्टे की सबसे बड़ी खासियत उसे पकाने का तरीका है। वे किसी गैस या मशीन का उपयोग नहीं करते, बल्कि लकड़ी के चूल्हे पर भुट्टों को धीमी आंच पर सेंकते हैं। इस काम के लिए वे सुबह-सुबह जंगल जाते हैं और वहां से सूखी लकड़ियां चुनकर लाते हैं, जो पूरे दिन उनके चूल्हे को जलाने के काम आती हैं। यह पारंपरिक तरीका ही उनके भुट्टे को एक सोंधी खुशबू और लाजवाब स्वाद देता है। जब इन गर्मागरम भुट्टों पर नींबू, नमक और चटपटी देसी मिर्च रगड़कर परोसी जाती है, तो पर्यटक इसे चखे बिना रह नहीं पाते।
जलजली से हुई इस सफर की शुरुआत
इस कारोबार की नींव के बारे में बताते हुए बालरीकिम कहते हैं कि उन्होंने इसकी शुरुआत जलजली नामक स्थान से की थी। उस समय वहां कोई भी व्यक्ति इस तरह से भुट्टा बेचने का काम नहीं करता था। उन्होंने एक छोटी सी झोपड़ी बनाई और पर्यटकों को अपनी तरफ आकर्षित करना शुरू किया। उनकी मेहनत रंग लाई और देखते ही देखते यह भुट्टा मैनपाट आने वाले सैलानियों की पहली पसंद बन गया। आज स्थिति यह है कि बालरीकिम से प्रेरित होकर कई अन्य लोग भी मैनपाट के विभिन्न पर्यटन स्थलों पर भुट्टे बेचकर अपनी जीविका चला रहे हैं।
मौसम पर निर्भरता और आमदनी का गणित
भुट्टे की बिक्री पूरी तरह से मौसम और पर्यटकों की आमद पर टिकी होती है। बालरीकिम का कहना है कि उनकी रोजाना की कमाई निश्चित नहीं है। कभी-कभी पर्यटकों की संख्या अधिक होने पर वे 10 से 20 किलो तक भुट्टा बेच लेते हैं, तो कभी मांग कम होने पर 2 से 5 किलो की ही बिक्री हो पाती है। इसी तरह, उनकी कमाई भी घटती-बढ़ती रहती है। वे बताते हैं कि उन्हें रोजाना 300 से 500 रुपये तक की आमदनी हो जाती है, जो उनके परिवार के भरण-पोषण के लिए काफी मददगार साबित होती है।
पर्यटकों के बीच लोकप्रियता का कारण
मैनपाट की ठंडी आबोहवा और मैनपाट की खूबसूरती के बीच देसी भुट्टे का स्वाद पर्यटकों को एक अनोखा अनुभव देता है। बालरीकिम बताते हैं कि उनके द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला मसाला और चटनी भुट्टे के स्वाद को दोगुना कर देते हैं। यही कारण है कि जो भी पर्यटक एक बार उनके हाथ का भुट्टा खा लेते हैं, वे दोबारा वहां आने की इच्छा जरूर जताते हैं। उनकी सादगी और मेहनत ही है जिसने इस साधारण से कारोबार को एक ब्रांड की पहचान दी है। आज बालरीकिम न केवल अपने पैरों पर खड़े हैं, बल्कि उन्होंने इलाके में रोजगार के नए रास्ते भी खोले हैं।
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