भारत
3 घंटे पहले
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विचारों
भारत की कूटनीतिक क्षमता का प्रदर्शन
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में संपन्न हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को भारत के लिए एक बड़ी सफलता करार दिया है। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि एक तरफ दुनिया भर में चल रहे युद्ध और गहरे मतभेद हैं, तो दूसरी तरफ भारत की आयोजन शक्ति ने यह साबित कर दिया है कि वह विपरीत परिस्थितियों में भी सबको साथ लेकर चलने की क्षमता रखता है। जयशंकर के अनुसार, यह समिट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की मजबूत कन्वीनिंग पावर यानी सबको एक मंच पर लाने की शक्ति का सटीक उदाहरण है। इस सम्मेलन ने यह स्पष्ट रूप से दिखा दिया है कि आज के ग्लोबल ध्रुवीकरण और आपसी झगड़ों के बावजूद संवाद और आम सहमति बनाना संभव है।
सम्मेलन में दिखी वैश्विक भागीदारी
जयशंकर ने प्रेस वार्ता के दौरान सम्मेलन में शामिल होने वाले प्रतिनिधियों की व्यापक संख्या की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में कुल 32 डेलिगेशन ने भाग लिया। इस विशाल समूह में 11 सदस्य देश, 10 पार्टनर देश, 4 क्षेत्रीय संगठन और 7 अंतर्राष्ट्रीय संगठन शामिल थे। सम्मेलन में भाग लेने वाले प्रमुख वैश्विक नेताओं में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांटो, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान शामिल थे।
विदेश मंत्री ने विशेष रूप से यह रेखांकित किया कि अधिकांश डेलिगेशन का नेतृत्व या तो राष्ट्राध्यक्षों ने किया या फिर सरकार के प्रमुखों ने किया। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और अन्य बड़े अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के प्रमुखों की मौजूदगी ने इस आयोजन के महत्व को और अधिक बढ़ा दिया। जयशंकर ने कहा कि इस मंच ने वैश्विक नेताओं को एक अत्यंत खुली और सौहार्दपूर्ण वातावरण में चर्चा करने का अवसर प्रदान किया।
चुनौतियों के बीच आम सहमति का निर्माण
दुनिया इस समय भारी भू-राजनीतिक तनाव और दो बड़े युद्धों के बीच फंसी हुई है, जहां विभिन्न देशों के हितों के बीच गहरा टकराव देखने को मिल रहा है। इन कठिन परिस्थितियों का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि इस पोलराइज्ड यानी विभाजित माहौल में भी भारत ने सभी सहभागी देशों के बीच एक आम सहमति तैयार की, जो वास्तव में एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने वेस्ट एशिया यानी पश्चिम एशिया के विवाद को समिट के सामने मौजूद सबसे कठिन और जटिल मुद्दों में से एक माना। इसके बावजूद, सभी देश एक साझा बयान पर सहमत हुए, जिस पर सबकी मुहर लगी।
शांति और विकास पर केंद्रित एजेंडा
ब्रिक्स नेताओं के बीच शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने की तत्काल आवश्यकता पर सहमति बनी। संयुक्त वक्तव्य में ग्लोबल ट्रेड यानी वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और ऊर्जा के निर्बाध प्रवाह के साथ-साथ नागरिक और नागरिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा पर भी जोर दिया गया। विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि समिट का मुख्य एजेंडा अर्थव्यवस्था, विकास और तकनीक के इर्द-गिर्द केंद्रित था। उन्होंने कहा कि इस समिट में विशेष रूप से ग्लोबल साउथ के हितों को प्राथमिकता दी गई, जो भारत की कूटनीति का एक बहुत मजबूत संदेश बनकर उभरा। यह सम्मेलन न केवल अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच देशों को करीब लाने की भारत की क्षमता को दर्शाता है, बल्कि वैश्विक आर्थिक विकास और तकनीक के मुद्दों पर चर्चा को आकार देने में देश की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करता है। इस सफलता को रेखांकित करते हुए अमेरिका के दक्षिण एशिया विशेषज्ञ माइकल कुगेलमैन ने भी ब्रिक्स सम्मेलन में जारी नई दिल्ली घोषणापत्र को भारत की एक बड़ी कूटनीतिक जीत बताया है।
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