भारतीय वायुसेना की बढ़ेगी ताकत, Su-30 MKI और जैगुआर को मिलेगा स्वदेशी महाविनाशक बम भारत 2 घंटे पहले 8
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को नई ऊंचाई देने के लिए भारत डायनेमिक्स लिमिटेड के साथ 810.79 करोड़ रुपये का बड़ा रक्षा सौदा किया है। इसके तहत वायुसेना को 160 SAT-SAAW गाइडेड बम मिलेंगे जो दुश्मन के ठिकानों को दूर से ही तबाह करने में सक्षम हैं।

वायुसेना की मारक क्षमता में होगा ऐतिहासिक इजाफा

भारतीय वायुसेना अब और भी अधिक घातक और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। हाल ही में रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना की सामरिक ताकत को मजबूत करने के उद्देश्य से भारत डायनेमिक्स लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस करार के तहत कुल 810.79 करोड़ रुपये की लागत से 160 SAT-SAAW बमों की खरीद की जाएगी। ये अत्याधुनिक एयर-टू-ग्राउंड प्रिसिजन गाइडेड ग्लाइड बम भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों की मारक क्षमता में एक क्रांतिकारी बदलाव लेकर आएंगे। नई दिल्ली में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ यह समझौता रक्षा क्षेत्र में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।

क्या है SAT-SAAW की तकनीक और खासियत

SAT-SAAW का पूरा नाम सैटेलाइट स्मार्ट एंटी एयरफील्ड वेपन है। यह एक अत्यंत सटीक एयर-टू-ग्राउंड ग्लाइड बम है जिसे विशेष रूप से दुश्मन के हवाई अड्डों और महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों को ध्वस्त करने के लिए विकसित किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी स्टैंड-ऑफ रेंज है। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस बम को दागने के लिए लड़ाकू विमान को दुश्मन की हवाई रक्षा सीमा के बिल्कुल करीब जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। विमान एक सुरक्षित दूरी से इस बम को लॉन्च कर सकता है, और यह अपनी स्मार्ट तकनीक की मदद से ग्लाइड करते हुए सीधे अपने लक्ष्य पर सटीक प्रहार करेगा। इस हथियार को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी DRDO द्वारा पूर्णतः स्वदेशी तकनीक से डिजाइन और विकसित किया गया है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

किन विमानों में होगा तैनात

यह नई हथियार प्रणाली किसी एक विशेष विमान तक सीमित नहीं है। इसे भारतीय वायुसेना के प्रमुख लड़ाकू विमानों के साथ एकीकृत करने के लिए तैयार किया गया है। इन विमानों में Su-30 MKI, जैगुआर और हॉक जैसे फाइटर जेट्स शामिल हैं। इस बहु-उपयोगी क्षमता के कारण वायुसेना के पास युद्ध के दौरान अधिक लचीलापन होगा। पायलट अब विभिन्न प्रकार के विमानों का उपयोग करते हुए जरूरत के अनुसार दुश्मन के एयरफील्ड को निशाना बना सकेंगे। विमान की दूरी और दुश्मन के ठिकानों की सुरक्षा के बीच का जोखिम कम होने से हमारे वायु सैनिकों की सुरक्षा भी बढ़ेगी और मिशन की सफलता की दर में भी इजाफा होगा।

स्वदेशी उत्पादन और Buy Indian-IDDM श्रेणी

यह महत्वपूर्ण रक्षा सौदा Buy Indian-IDDM (इंडीजीनसली डिजाइंड, डेवलप्ड एंड मैन्युफैक्चर्ड) श्रेणी के अंतर्गत किया गया है। इसका अर्थ यह है कि इस प्रणाली के डिजाइन से लेकर निर्माण तक की पूरी प्रक्रिया में भारतीय क्षमताओं को वरीयता दी गई है। इस हथियार प्रणाली में करीब 60 फीसदी स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। इतना ही नहीं, इसके भीतर कई प्रमुख उप-प्रणालियां भी भारत में ही तैयार की गई हैं। यह कदम न केवल विदेशी हथियारों पर हमारी निर्भरता को कम करेगा, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग को भविष्य के लिए तकनीकी रूप से और अधिक परिपक्व बनाएगा।

डिलीवरी की समय सीमा

भारतीय वायुसेना को मिलने वाले इन 160 विनाशक बमों की आपूर्ति की प्रक्रिया भी स्पष्ट कर दी गई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन हथियारों की डिलीवरी वित्त वर्ष 2027-28 और 2028-29 के दौरान पूरी होगी। इन वर्षों के भीतर, इन स्मार्ट बमों को धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से वायुसेना के शस्त्रागार में शामिल किया जाएगा। इन हथियारों के शामिल होने के बाद भारतीय वायुसेना लंबी दूरी से सटीकता के साथ दुश्मन की कमर तोड़ने में और अधिक सक्षम हो जाएगी।

रणनीतिक महत्व और भविष्य की तैयारी

किसी भी हवाई युद्ध में एयरफील्ड या हवाई पट्टियां सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति होती हैं। यहीं से दुश्मन के लड़ाकू विमान उड़ान भरते हैं और वापस लौटते हैं। यदि किसी अभियान के दौरान इन एयरफील्ड को ही निष्क्रिय कर दिया जाए, तो दुश्मन की पूरी वायु शक्ति पंगु हो सकती है। SAT-SAAW बमों की यह खेप वायुसेना को ऐसी क्षमता प्रदान करेगी जिससे युद्ध की स्थिति में वे दुश्मन के महत्वपूर्ण सैन्य बुनियादी ढांचे को पलक झपकते ही तबाह करने में समर्थ होंगे। यह रक्षा सौदा न केवल एक खरीद प्रक्रिया है, बल्कि देश की रक्षा तैयारियों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की एक दूरदर्शी रणनीति का हिस्सा है। आने वाले समय में, यह स्वदेशी तकनीक भारतीय वायुसेना की परिचालन संबंधी जरूरतों को पूरा करने में मील का पत्थर साबित होगी।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

आपकी प्रतिक्रिया?

Comments

https://pabna.in/assets/images/user-avatar-s.jpg

0 comment

Write the first comment for this!

फेसबुक वार्तालाप