पुनौरा धाम में माता सीता की भव्य प्रतिमा के लिए काम शुरू, उर्विजा कुंड के पास मिली नई पहचान बिहार 2 घंटे पहले 2
सीतामढ़ी के ऐतिहासिक पुनौरा धाम में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और अब यहां माता सीता की एक दिव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी, जिसके लिए कार्यस्थल पर नींव का काम शुरू हो गया है।

पुनौरा धाम के कायाकल्प की दिशा में बड़ा कदम

सीतामढ़ी स्थित विश्व प्रसिद्ध पौराणिक स्थल पुनौरा धाम का स्वरूप अब पूरी तरह बदलने वाला है। इस तीर्थ स्थल को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की परियोजना ने अब रफ्तार पकड़ ली है। लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए अब यह आधिकारिक तौर पर स्पष्ट कर दिया गया है कि पुनौरा धाम में जगत जननी माता सीता की एक अत्यंत भव्य प्रतिमा स्थापित की जाएगी। निर्माण कार्य में लगी एजेंसी अहलुवालिया कंस्ट्रक्शन कंपनी ने स्थल पर आधिकारिक बोर्ड लगाकर इस बात की पुष्टि कर दी है।

उर्विजा कुंड के पास आकार लेगी प्रतिमा

यह भव्य प्रतिमा पुनौरा धाम परिसर में स्थित ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व वाले उर्विजा कुंड के ठीक निकट स्थापित की जाएगी। इस घोषणा के बाद से स्थानीय निवासियों और दुनिया भर से आने वाले श्रद्धालुओं में काफी उत्साह है। अब प्रतिमा के स्थान को लेकर किसी भी प्रकार का संशय नहीं बचा है। निर्माण कार्य करने वाली टीम ने अब अपना पूरा ध्यान इस स्थल की नींव और पिलर के ढांचे को तैयार करने पर केंद्रित कर दिया है।

तकनीकी प्रक्रियाएं पूरी, निर्माण कार्य में तेजी

परियोजना से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इस बड़े निर्माण कार्य के लिए आवश्यक सभी तकनीकी औपचारिकताएं अब पूरी हो चुकी हैं। इसमें मुख्य रूप से मिट्टी की जांच यानि सॉइल सर्वे और पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया शामिल थी, जिसे सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया गया है। हालांकि प्रतिमा की अंतिम ऊंचाई और उसके विशिष्ट डिजाइन की औपचारिक घोषणा अभी बाकी है, लेकिन धरातल पर कंक्रीट के पिलर खड़े करने का काम शुरू हो चुका है। जिलाधिकारी ने इस पूरे प्रोजेक्ट की गुणवत्ता बनाए रखने और निर्धारित समय-सीमा के भीतर काम को पूरा करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं।

उर्विजा कुंड का आध्यात्मिक महत्व

प्रतिमा स्थापना के लिए उर्विजा कुंड का चयन अत्यंत सोच समझकर किया गया है। धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक कथाओं के अनुसार, पुनौरा धाम का यही वह पावन स्थान है जहां मिथिला नरेश राजा जनक ने हल चलाया था और धरती माता के गर्भ से माता सीता प्रकट हुई थीं। संस्कृत में उर्वी का अर्थ पृथ्वी होता है, इसी कारण माता जानकी को उर्विजा नाम से भी जाना जाता है। इस ऐतिहासिक कुंड के किनारे प्रतिमा का निर्माण श्रद्धालुओं के लिए माता सीता के प्राकट्य की पावन कथा को जीवंत करने जैसा होगा।

परिसर में चल रहे बड़े बदलाव

पुनौरा धाम को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन हब के रूप में विकसित करने के लिए पूरे परिसर से पुराने ढांचों को हटाने का काम युद्धस्तर पर किया गया है। निर्माण में बाधा बन रहे स्वास्थ्य केंद्र, पर्यटन भवन, वाटर फाउंटेन और मां जानकी यात्री निवास जैसे भवनों को पहले ही ध्वस्त कर मलबे को साफ कर दिया गया है। फिलहाल मुख्य मंदिर के निर्माण के साथ-साथ परिसर की बाउंड्री वॉल या परिकोटा तैयार करने की प्रक्रिया पूरी तेजी से चल रही है। निर्माण स्थल पर पिलर और नींव का ढांचा साफ देखा जा सकता है, जो यह दर्शाता है कि यह परियोजना अब ठोस रूप ले चुकी है।

पर्यटन के नए द्वार खुलेंगे

उम्मीद जताई जा रही है कि माता सीता की इस भव्य प्रतिमा और नए मंदिर के निर्माण के बाद पुनौरा धाम वैश्विक मानचित्र पर एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में उभरेगा। अहलुवालिया कंस्ट्रक्शन कंपनी द्वारा कार्य शुरू किए जाने से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न होंगे। आने वाले समय में जब उर्विजा कुंड के किनारे यह भव्य प्रतिमा बनकर तैयार होगी, तो यह आस्था और वास्तुकला का एक अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। स्थानीय प्रशासन पूरी तरह से प्रतिबद्ध है कि निर्माण कार्य में कोई बाधा न आए और श्रद्धालु जल्द ही इस नए और दिव्य पुनौरा धाम के दर्शन कर सकें।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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