मध्य प्रदेश
2 घंटे पहले
3
विचारों
शिवपुरी से गहरा रिश्ता
प्रसिद्ध लेखक और गीतकार जावेद अख्तर का मध्य प्रदेश के शिवपुरी से एक पुराना संबंध है। शहर के बड़ा बाजार इलाके में स्थित कमलीगर मोहल्ले की एक ऐतिहासिक हवेली को उनके परिवार का पुश्तैनी ठिकाना माना जाता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वर्ष 1945 के दौरान जावेद अख्तर का शुरुआती बचपन इसी हवेली की दीवारों के बीच बीता था। आज भी यह इमारत उनके परिवार से जुड़ी स्मृतियों को संजोए हुए खड़ी है।
इतिहास और बुजुर्गों के दावे
स्थानीय निवासी निहाल अहमद शिवानी के अनुसार, पीढ़ियों से चली आ रही मान्यताओं में यह बात साफ है कि मशहूर शायर जां निसार अख्तर का यह घर हुआ करता था। उनके पिता, यानी जावेद अख्तर के दादा मुज़्तर ख़ैराबादी, उस समय ग्वालियर स्टेट में जज के पद पर तैनात थे। भले ही इस संबंध के लिखित दस्तावेजी प्रमाण उपलब्ध न हों, लेकिन मोहल्ले के बुजुर्गों की यादों में आज भी इस हवेली के साथ अख्तर परिवार का जुड़ाव स्पष्ट है।
हवेली की वर्तमान स्थिति
समय के साथ इस हवेली की भव्यता में कमी आई है। वर्ष 2024 में हुई भारी बारिश के कारण इस पुरानी इमारत का एक बड़ा हिस्सा ढह गया था। फिलहाल इस हवेली पर ताला जड़ा हुआ है। पड़ोस में रहने वाले अजमत अली बताते हैं कि 1942 के आसपास मुज़्तर ख़ैराबादी अपने बेटे जां निसार अख्तर के साथ यहीं रहते थे। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक जावेद अख्तर का जन्म 17 जनवरी 1945 को ग्वालियर में हुआ था, लेकिन उनके शुरुआती जीवन के करीब तीन साल इसी हवेली और शिवपुरी के वातावरण में बीते थे।
स्थानीय लोगों की इच्छा
शिवपुरी के निवासियों का कहना है कि जावेद अख्तर ने इस हवेली को दोबारा नहीं देखा है, लेकिन अगर वे यहाँ आते हैं तो शहर उनका गर्मजोशी से स्वागत करेगा। लोग इसे अपने शहर के गौरव से जोड़कर देखते हैं।
साहित्य में सक्रियता
81 वर्ष की उम्र में भी जावेद अख्तर अपनी रचनात्मकता के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने पाँच दशक से अधिक के करियर में अब पहली बार निर्देशन के क्षेत्र में भी कदम रखने का निर्णय लिया है। वे देश और दुनिया के बड़े साहित्यिक आयोजनों जैसे जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर साहित्य और कला पर निरंतर अपने विचार रखते रहते हैं।
Comments
0 comment