हिमाचल प्रदेश में लॉटरी वापसी पर सियासी घमासान: सुक्खू सरकार का प्लान और विपक्ष का जोरदार विरोध हिमाचल प्रदेश एक घंटा पहले 3
हिमाचल प्रदेश में करीब दो दशक बाद लॉटरी को फिर से शुरू करने की तैयारी को लेकर राज्य की राजनीति में उबाल आ गया है, जहां सरकार इसे राजस्व का जरिया मान रही है, वहीं विपक्ष इसे युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ बता रहा है।

हिमाचल में लॉटरी का आगाज और सियासत

हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने राज्य में करीब 27 साल बाद लॉटरी व्यवस्था को फिर से बहाल करने का निर्णय लिया है, जिससे प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। सुक्खू सरकार ने राज्य की बिगड़ती आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए इसे राजस्व जुटाने का एक जरूरी उपाय बताया है। सरकार की योजना है कि आगामी दिवाली के शुभ अवसर पर प्रदेश में लॉटरी का आधिकारिक तौर पर आगाज किया जाए। हालांकि, भाजपा ने इस फैसले को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करार देते हुए तीखा विरोध शुरू कर दिया है। सरकार का दावा है कि इस पहल से राज्य को प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये से अधिक की आय होने की संभावना है।

मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने दी सफाई

हाल ही में विधानसभा सत्र के दौरान उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि राज्य की वित्तीय सेहत को सुधारने के लिए कड़े कदम उठाना वक्त की मांग है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लॉटरी शुरू करने से जुड़ी सभी आवश्यक कानूनी और प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं पूरी की जा चुकी हैं। मंत्री के अनुसार, पंजाब जैसे कई अन्य राज्यों में पहले से ही लॉटरी संचालित हो रही है और वहां के राजस्व मॉडल का अध्ययन करने के बाद ही यह निर्णय लिया गया है। मंत्री ने तर्क दिया कि हिमाचल के लोग पहले से ही दूसरे राज्यों की लॉटरी खरीद रहे हैं, जिसका सारा आर्थिक लाभ उन राज्यों को मिल रहा है। यदि राज्य में ही लॉटरी शुरू की जाए, तो यह राजस्व सीधे हिमाचल के खजाने में आएगा। शुरुआती दौर में सरकार को 10 करोड़ रुपये की आय होने की उम्मीद है, जो समय के साथ बढ़कर 100 करोड़ सालाना तक पहुंच सकती है।

भाजपा का तीखा हमला: युवाओं के भविष्य का मुद्दा

भाजपा के सुंदरनगर से विधायक राकेश जम्वाल ने इस फैसले को सरकार की विफलता का प्रतीक बताया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने चुनावों के दौरान युवाओं को हर साल 1 लाख नौकरियां देने का वादा किया था, लेकिन लगभग 4 साल पूरे होने के बावजूद सरकार अपने वादों को पूरा करने में नाकाम रही है। जम्वाल ने कटाक्ष करते हुए कहा कि रोजगार देने के बजाय सरकार अब युवाओं को लॉटरी की लत लगाने की तैयारी कर रही है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी कि यदि भविष्य में भाजपा सत्ता में आती है, तो इस लॉटरी सिस्टम को तुरंत प्रभाव से बंद कर दिया जाएगा। हालांकि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इस पर बचाव करते हुए कहा कि लॉटरी पूरी तरह से भाग्य का खेल है और इसे जुए की श्रेणी में नहीं रखा जाना चाहिए।

युवाओं के भविष्य पर मंडराता खतरा

भाजपा विधायक राकेश जम्वाल ने इस बात पर जोर दिया कि लॉटरी शुरू करने से हिमाचल के युवाओं का ध्यान मेहनत और रोजगार से भटककर आसान पैसे की ओर लग जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार को युवाओं के लिए स्वरोजगार और औद्योगिक अवसर पैदा करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि ऐसी प्रणालियों को बढ़ावा देना चाहिए जिनसे सामाजिक बुराइयां फैलती हैं। जम्वाल ने याद दिलाया कि दो दशक पूर्व तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने राज्य में लॉटरी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। उसके बाद वीरभद्र सिंह और जय राम ठाकुर के नेतृत्व वाली सरकारों ने भी इस प्रतिबंध को बरकरार रखा था, क्योंकि वे जानते थे कि लॉटरी समाज के लिए घातक है।

भांग की खेती और लॉटरी: सरकार की नीतियों पर सवाल

भाजपा विधायक ने सरकार की नीतियों को एक-दूसरे से जोड़ते हुए निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि पहले भांग की खेती को वैध बनाने का तर्क देकर उसे रोजगार से जोड़ा गया और अब लॉटरी को आर्थिक सुधार का नाम दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में नशाखोरी की समस्या पहले ही विकराल रूप ले चुकी है और ऐसे में लॉटरी जैसी व्यवस्था युवाओं को और अधिक मानसिक और आर्थिक बर्बादी की ओर धकेलेगी। जम्वाल ने कहा कि सरकार को राजस्व बढ़ाने के लिए पर्यटन जैसे क्षेत्रों पर ध्यान देना चाहिए, जहां हिमाचल में असीम संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार के दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय राज्य की आय बढ़ाने के लिए स्थायी और उत्पादक संसाधनों के निर्माण पर जोर दिया गया था, न कि लॉटरी जैसे अस्थाई माध्यमों पर।

अनुराग ठाकुर की निविदा वापस लेने की मांग

पूर्व केंद्रीय मंत्री और हमीरपुर से लोकसभा सांसद अनुराग ठाकुर ने भी इस मुद्दे पर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुक्खू को एक कड़ा पत्र लिखकर लॉटरी के लिए जारी की गई निविदा को तत्काल वापस लेने की मांग की है। हिमाचल सरकार ने 19 अगस्त को लॉटरी टिकटों की बिक्री के लिए एकमात्र एजेंट नियुक्त करने के उद्देश्य से एक ई-निविदा जारी की थी। इस 51 पृष्ठों लंबी ई-निविदा के माध्यम से इच्छुक पक्षों को आमंत्रित किया गया है। अनुराग ठाकुर ने खुलासा किया कि निविदा शुल्क के रूप में 5 लाख रुपये की गैर-वापसी योग्य राशि जमा करना अनिवार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन भाजपा सरकार ने 1999 में और बाद में कांग्रेस सरकार ने 2007 में इसे प्रतिबंधित किया था। यह प्रतिबंध राज्य के उन परिवारों के कड़वे अनुभवों के आधार पर लगाया गया था, जिन्होंने अपनी पूरी जमा-पूंजी और पेंशन लॉटरी में गंवा दी थी। उन्होंने सरकार को आगाह किया कि वित्तीय दबाव के बावजूद पूर्व की सरकारों ने जनता के हित में इस फैसले को कभी नहीं पलटा था।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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