हिमाचल: सरकारी और वन भूमि पर पुराने कब्जे होंगे नियमित, सुक्खू सरकार ने तैयार की नई पॉलिसी हिमाचल प्रदेश एक घंटा पहले 1
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने सरकारी और वन भूमि पर लघु एवं सीमांत किसानों के पुराने कब्जों को शर्तों के साथ नियमित करने की ड्राफ्ट पॉलिसी को मंजूरी देकर केंद्र को भेजा है। राज्य में 1.67 लाख लोगों ने इस संबंध में आवेदन किए हैं।

हिमाचल प्रदेश में सरकारी जमीन पर मकान बनाकर रहने या खेती करने वाले लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। सुक्खू सरकार ने ऐसे पुराने कब्जों को कुछ शर्तों के साथ नियमित करने की दिशा में योजना तैयार की है। कैबिनेट ने इस ड्राफ्ट को हरी झंडी दे दी है और मंजूरी के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेज दिया गया है।

उप-समिति की बैठक में बनी रूपरेखा

हाल ही में राजस्व, बागवानी, जनजातीय विकास एवं जन शिकायत निवारण मंत्री जगत सिंह नेगी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडलीय उप-समिति की बैठक हुई। इस बैठक में आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण तथा नगर नियोजन मंत्री राजेश धर्माणी भी शामिल हुए। सभी जिलों के उपायुक्त वर्चुअल माध्यम से बैठक से जुड़े।

बैठक से मिली जानकारी के मुताबिक, लघु एवं सीमांत किसानों तथा भूमिहीन लोगों द्वारा सरकारी या वन भूमि पर किए गए अतिक्रमण को नियमित किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार ने यह नई नीति तैयार की है। राजस्व विभाग ने इस पॉलिसी ड्राफ्ट को पहले कानून मंत्रालय को भेजा और वहां से होते हुए यह ड्राफ्ट कैबिनेट तक पहुंचा।

किन कब्जाधारकों को मिलेगी राहत

राज्य में 20 बीघा से कम भूमि रखने वाले कब्जाधारकों को इस नीति के तहत राहत दी जाएगी। सरकारी भूमि पर कुछ अतिक्रमणों के नियमितीकरण के लिए नियमितीकरण पॉलिसी फॉर रेगुलराइजेशन सर्टेन एनक्रोचमेंट ऑन गवर्नमेंट लैंड-2026 को मंजूरी मिली है। इसका लाभ उन भूमिहीन और सीमांत किसानों को मिलेगा, जिन्होंने आवासीय, कृषि एवं बागवानी कार्यों के लिए सरकारी भूमि पर कब्जा कर रखा है।

कब्जा नियमित कराने के लिए क्या करना होगा

नियमितीकरण का लाभ लेने के लिए सीमांत किसानों और भूमिहीन परिवारों के पास अपने गांव के एक गवाह तथा ग्रामसभा का अनुमोदन होना जरूरी है। साथ ही कब्जाधारी को यह साबित करना होगा कि वह संबंधित भूमि का लंबे समय से उपयोग कर रहा है।

कितने हैं अवैध कब्जाधारी

हिमाचल प्रदेश में 1.67 लाख लोग ऐसे हैं, जिन्होंने सरकारी जमीन पर कब्जा किया हुआ है। हालांकि इसका फायदा केवल उन्हीं को मिल सकेगा, जिनके पास कुल जमीन बीस बीघा से कम है।

विभागों के पास उपलब्ध भूमि का ब्यौरा

बैठक में बताया गया कि उद्योग विभाग के पास 849 हेक्टेयर, तकनीकी शिक्षा विभाग के पास 70 हेक्टेयर, शिक्षा विभाग के पास 50 हेक्टेयर, पर्यटन विभाग के पास 160 हेक्टेयर, परिवहन विभाग के पास 11 हेक्टेयर और पंचायती राज विभाग के पास 20 हेक्टेयर अप्रयुक्त भूमि उपलब्ध है।

बैठक में सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए गए कि शेष बची एंट्रीज को जल्द दर्ज कराकर उनका सत्यापन किया जाए। सभी विभागों को एक चार्ट भेजा जाएगा, ताकि वे अपनी भूमि का सत्यापन कर सकें। इसके अलावा सभी पीएसयू को दी गई भूमि का ब्यौरा भी मांगा गया है, जिसके लिए स्प्रेडशीट के माध्यम से डाटा भरा जाएगा।

चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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