भारतीय स्टेट बैंक का बड़ा फैसला, लोन की ब्याज दरों में हुआ बदलाव, बढ़ सकता है EMI का बोझ मेरा पैसा 2 घंटे पहले 6
देश के सबसे बड़े ऋणदाता बैंक एसबीआई ने अपनी प्रमुख लेंडिंग दरों में इजाफा कर दिया है, जिसका सीधा असर अब ग्राहकों की जेब पर पड़ने वाला है।

ब्याज दरों में बढ़ोतरी से ग्राहकों पर असर

भारतीय स्टेट बैंक यानी एसबीआई ने अपने ग्राहकों के लिए ऋण की ब्याज दरों में महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। बैंक ने अपनी EBLR, RLLR और MCLR दरों में वृद्धि की है, जिसके चलते होम लोन समेत अन्य कर्जों पर ब्याज का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। यदि आपने बैंक से लोन ले रखा है, तो नई दरों के लागू होने के बाद आपकी मासिक किस्त यानी EMI में बढ़ोतरी होने की पूरी संभावना है। ये नई दरें 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो चुकी हैं। बैंक द्वारा किए गए इस बदलाव का सीधा संबंध रेपो दर में होने वाले उतार-चढ़ाव से है, जिसके कारण लोन लेने वाले उपभोक्ताओं को अपनी जेब ढीली करनी पड़ सकती है। हालांकि, ग्राहकों पर इसका कितना असर पड़ेगा, यह पूरी तरह से लोन की शर्तों और बैंक की रीसेट व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

नई दरें और प्रभावित लेंडिंग रेट्स

बैंक ने एक्सटर्नल बेंचमार्क लिंक्ड लेंडिंग रेट यानी EBLR को 7.90% से बढ़ाकर 8.15% कर दिया है। इसके साथ ही, रेपो लिंक्ड लेंडिंग रेट यानी RLLR को भी 7.50% से संशोधित कर 7.75% कर दिया गया है। बैंक का यह स्पष्ट कहना है कि रेपो रेट में होने वाला कोई भी बदलाव सीधे तौर पर होम लोन की ब्याज दरों को प्रभावित करता है। यदि ब्याज दरों में वृद्धि होती है, तो ग्राहकों के पास दो ही विकल्प होते हैं, या तो उनकी मासिक EMI बढ़ जाती है या फिर लोन चुकाने की अवधि को बैंक की ओर से लंबा कर दिया जाता है।

MCLR में भी हुआ इजाफा

एसबीआई ने मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट यानी MCLR में भी 0.15% अंक की बढ़ोतरी करने का निर्णय लिया है। दरों का विवरण इस प्रकार है:

  • ओवरनाइट: 7.85%
  • एक महीना: 7.85%
  • तीन महीने: 8.40%
  • छह महीने: 8.75%
  • एक साल: 8.85%
  • दो साल: 8.90%
  • तीन साल: 8.95%

ध्यान देने वाली बात यह है कि ओवरनाइट और एक महीने की अवधि के लिए दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। वहीं, तीन महीने से लेकर तीन साल तक की अवधि के लिए 0.15% अंक की वृद्धि लागू की गई है। MCLR वह न्यूनतम दर होती है जिस पर बैंक अपने ग्राहकों को ऋण उपलब्ध कराते हैं। इसमें धन जुटाने की लागत और बैंक का परिचालन खर्च शामिल होता है।

फिक्स्ड डिपॉजिट दरों की स्थिति

जहां एक ओर लोन महंगे हुए हैं, वहीं बैंक ने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD की ब्याज दरों में कोई संशोधन नहीं किया है। बैंक द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, सामान्य ग्राहकों को 3.05% से लेकर 6.60% तक ब्याज मिल रहा है, जबकि वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह दर 3.55% से 7.10% के बीच है। ये दरें 15 दिसंबर 2025 से प्रभावी हैं। किसी भी निवेश से पहले बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर ताजा दरों की जानकारी अवश्य देख लें।

पूजा जैन पाबना की फाइनेंस लेखिका हैं, जो पर्सनल फाइनेंस और ऑनलाइन बिजनेस पर लिखती हैं। डिजिटल कमाई, बचत और स्मार्ट खर्च के व्यावहारिक तरीकों पर उनकी रिपोर्ट्स केंद्रित रहती हैं। वे आम लोगों के लिए पैसों की उलझनों को सरल बनाती हैं।

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