राष्ट्रीय राजनीति
3 घंटे पहले
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विचारों
नक्सलवाद के प्रभावितों के लिए सरकार का संकल्प
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक महत्वपूर्ण संबोधन में स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद का अंत होने के बाद भी सरकार की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। उन्होंने कहा कि बीते पांच दशकों के दौरान आम लोगों, विशेषकर गरीब आदिवासी समुदायों ने जो अकल्पनीय पीड़ा झेली है, उसे मिटाना और उनके जीवन में सम्मान लौटाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। शाह ने जोर देकर कहा कि नक्सलवाद का खात्मा तो एक पड़ाव है, लेकिन वास्तविक चुनौती उन जख्मों को भरने की है जो इतने लंबे समय तक हिंसा के कारण बने हैं।
दिव्यांग सहायता और पुनर्वास के प्रयास
अमित शाह ने डिजिटल माध्यम से आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बताया कि सरकार छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की भलाई के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने जगदलपुर में पांच से सात अक्टूबर तक आयोजित दिव्यांग सहायता शिविर का जिक्र किया। इस कार्यक्रम का लाभ 3,600 से अधिक लोगों ने उठाया, जिनमें केवल बस्तर क्षेत्र के ही करीब 1,570 लोग शामिल थे। इस पहल के जरिए पीड़ितों को व्हीलचेयर, कृत्रिम अंग, तिपहिया साइकिल, सुनने की मशीन और चलने के लिए छड़ियां जैसे आवश्यक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।
आत्मसमर्पण और पुनर्वास की प्रगति
गृह मंत्री ने नक्सलियों के आत्मसमर्पण और उनके मुख्यधारा में लौटने की प्रक्रिया पर भी आंकड़े साझा किए। उनके अनुसार, अब तक लगभग 8,526 नक्सलियों ने हथियार डाल दिए हैं। सरकार की ओर से वित्तीय सहायता और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। लगभग 7,500 ऐसे लोगों के बैंक खाते खुलवाए गए हैं जिनके पास पहले कोई बैंकिंग सुविधा उपलब्ध नहीं थी। इसके अतिरिक्त, 1,625 लोगों को इनाम की राशि प्रदान की गई है ताकि वे अपना नया जीवन शुरू कर सकें।
रोजगार और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार
पीड़ितों के पुनर्वास के आंकड़ों का ब्योरा देते हुए अमित शाह ने बताया कि कुल 7,882 लोगों को सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि दी गई है। रोजगार के मोर्चे पर भी ठोस कदम उठाए गए हैं, जिसके तहत 455 लोगों को रोजगार मिला है और 129 लोगों को जमीन आवंटित की गई है। सरकार का उद्देश्य केवल सहायता देना नहीं, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। शाह ने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ सरकार के साथ मिलकर इन पुनर्वास कार्यों को पूरा सहयोग प्रदान करेगी।
सुरक्षा शिविरों की नई भूमिका
एक बड़ा बदलाव लाते हुए सरकार ने फैसला किया है कि नक्सल प्रभावित इलाकों में मौजूद सुरक्षा शिविरों को अब सेवा केंद्रों और सामुदायिक केंद्रों में तब्दील किया जाएगा। इस बारे में अमित शाह ने कहा कि जिन जगहों पर कभी सुरक्षा बल रक्षा के लिए तैनात रहते थे, अब वहां सरकारी अधिकारी बैठेंगे। ये केंद्र स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और आदिवासी समुदायों की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए हब के रूप में काम करेंगे। उन्होंने इसे विकसित बस्तर की नींव रखने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
सांस्कृतिक पुनरुत्थान और विकास
सरकार की अन्य पहलों का जिक्र करते हुए शाह ने 'बस्तर ओलंपिक', 'बस्तर पंडुम' और 'नियद नेल्लानार' जैसी योजनाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य न केवल बुनियादी ढांचे का विकास करना है, बल्कि आदिवासी संस्कृति को फिर से जीवित करना भी है। उन्होंने विशेष रूप से 'बस्तर ओलंपिक' का उल्लेख करते हुए कहा कि आज जिन स्थानों पर खेलकूद और उत्सव का माहौल है, वहां पहले केवल गोलियों की गूंज और बम विस्फोटों का खौफ हुआ करता था। यह बदलाव बस्तर में लौट रही शांति और प्रगति का प्रमाण है।
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