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एक घंटा पहले
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सावन की अधूरी पूजा और पूर्णिमा का महत्व
हिन्दू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना गया है। इस दौरान भक्त पूरी श्रद्धा के साथ महादेव को प्रसन्न करने के लिए जल और बेलपत्र अर्पित करते हैं। हालांकि, व्यस्त जीवनशैली या किन्हीं अन्य कारणों से कई भक्त पूरे माह या सावन के सोमवारों पर विधिवत पूजा नहीं कर पाते हैं। यदि आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो आपको निराश होने की आवश्यकता नहीं है। धर्मग्रंथों के अनुसार श्रावण मास के अंतिम दिन यानी श्रावण पूर्णिमा पर कुछ विशेष उपाय करने से आपको पूरे सावन महीने की पूजा का पूर्ण फल प्राप्त हो सकता है। पूर्णिमा की तिथि भक्ति और उपासना के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।
प्रदोष काल में शिव महिम्न स्तोत्र का अनुष्ठान
हरिद्वार के जाने-माने ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री का कहना है कि पूरे महीने की छूटी हुई भक्ति का फल अर्जित करने के लिए शिव महिम्न स्तोत्र का पाठ सबसे प्रभावी उपाय है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस स्तोत्र का लाभ तब और अधिक बढ़ जाता है, जब इसे सही मुहूर्त यानी प्रदोष काल में किया जाए। प्रदोष काल का समय सूर्यास्त से करीब 45 मिनट पहले शुरू होता है और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक रहता है। इस तरह कुल मिलाकर यह अवधि लगभग डेढ़ घंटे की होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महादेव को प्रदोष काल का समय बहुत प्रिय है और इस दौरान की गई पूजा सीधे भगवान तक पहुँचती है।
108 बार पाठ का चमत्कारिक लाभ
पंडित श्रीधर शास्त्री ने बताया कि यदि कोई भक्त प्रदोष काल के दौरान पूर्ण आस्था के साथ शास्त्रोक्त विधि से शिव महिम्न स्तोत्र का 108 बार पाठ करता है, तो भगवान शिव की असीम कृपा उस पर सदैव बनी रहती है। यह विशेष पाठ न केवल पूरे श्रावण मास का संपूर्ण पुण्य फल प्रदान करता है, बल्कि जीवन में आ रही तमाम बाधाओं, मानसिक तनाव और ग्रह दोषों को भी दूर करने में सहायक है। जो भक्त पूरे महीने नियमों का पालन नहीं कर पाए हैं, उनके लिए श्रावण पूर्णिमा का यह दिन महादेव को मनाने का सबसे सुगम और अचूक अवसर है।
पूजा का सही समय और शुभ मुहूर्त
इस वर्ष श्रावण पूर्णिमा के दिन होने वाले इस विशेष अनुष्ठान के लिए समय का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। जानकारों के अनुसार, प्रदोष काल का समय शाम 5:20 बजे से शुरू होकर शाम 6:50 बजे तक रहेगा। भक्तों को सलाह दी गई है कि वे इसी समय अंतराल के भीतर अपने पूजा पाठ और स्तोत्र का अनुष्ठान पूरा करें। शिव कृपा प्राप्त करने के लिए यह समय सबसे उत्तम माना गया है। यदि आप भी सावन के पावन माह का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो पूर्णिमा के दिन इस विधि को अपनाकर अपने जीवन को सुखद और समृद्ध बना सकते हैं।
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