करौली और सवाई माधोपुर के लिए बड़ी राहत: 2944 करोड़ की चम्बल परियोजना को मंजूरी, 1426 गांवों की प्यास बुझेगी राजस्थान एक दिन पहले 9
राजस्थान के करौली और सवाई माधोपुर जिलों में पेयजल की समस्या को खत्म करने के लिए 2944 करोड़ रुपये की वृहद चम्बल परियोजना स्वीकृत की गई है, जिससे 1426 गांवों और 8 शहरों को लाभ मिलेगा।

परियोजना से लाखों लोगों को मिलेगी राहत

करौली और सवाई माधोपुर जिलों के निवासियों के लिए एक अत्यंत सुखद समाचार सामने आया है। लंबे समय से पेयजल के गंभीर संकट से जूझ रहे इन इलाकों के लिए सरकार ने 2944 करोड़ रुपये की एक वृहद पेयजल परियोजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य चम्बल नदी के पानी को पाइपलाइन के माध्यम से दूर-दराज के गांवों और शहरों तक पहुंचाना है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना से कुल 1426 गांवों और 8 शहरों को सीधा लाभ प्राप्त होगा।

कैसे काम करेगी चम्बल पेयजल परियोजना

क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए, विशेषकर करौली के डांग इलाके में जहां पथरीली जमीन के कारण बोरवेल असफल रहते हैं, यह योजना एक स्थायी समाधान के रूप में देखी जा रही है। जानकारी के अनुसार, मंडरायल क्षेत्र में चम्बल नदी पर एक इनटेक वेल का निर्माण किया जाएगा। यहाँ से पानी को लिफ्ट करके पाइपलाइन के जरिए विभिन्न गंतव्यों तक वितरित किया जाएगा, जिससे हजारों परिवारों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सकेगा।

टेंडर और क्रियान्वयन की रूपरेखा

परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए प्रक्रिया तेज हो गई है। आगामी 17 सितंबर को इस महत्वपूर्ण योजना के टेंडर खोले जाएंगे, जिसके बाद निर्माण कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है। योजना के पहले चरण में 148 गांवों को विशेष प्राथमिकता दी गई है।

  • परियोजना का कुल बजट: 2944 करोड़ रुपये
  • लाभान्वित होने वाले कुल गांव: 1426
  • लाभान्वित होने वाले कुल शहर: 8
  • प्रथम चरण में शामिल गांव: 148
  • नल कनेक्शन की संख्या: 27 हजार 826 घरेलू नल कनेक्शन।

इस योजना के पूर्ण होने से न केवल स्थानीय निवासियों को नियमित जल आपूर्ति मिलेगी, बल्कि महिलाओं और बच्चों को मीलों दूर जाकर पानी लाने की दैनिक मशक्कत से भी स्थायी निजात मिलेगी। स्थानीय लोगों की निगाहें अब 17 सितंबर की टेंडर प्रक्रिया पर टिकी हैं।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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