सहारनपुर की पांच मशहूर मिठाइयां: स्वाद ऐसा कि देश-विदेश तक है चर्चा, जानिए क्या है खास उत्तर प्रदेश 2 महीने पहले 72
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर का स्वाद अपनी विशिष्टता के लिए जाना जाता है। यहाँ के गंगोह से लेकर सरसावा तक की मिठाइयां न केवल स्थानीय लोगों, बल्कि दूर-दराज के राज्यों और विदेशों में रहने वालों के बीच भी बेहद लोकप्रिय हैं।

सहारनपुर की मिठास का जादू

उत्तर प्रदेश का सहारनपुर जिला अपने लकड़ी के नक्काशीदार फर्नीचर के साथ-साथ खाने-पीने के अनूठे जायके के लिए भी मशहूर है। यहाँ के पारंपरिक मिठाइयों का स्वाद इतना लाजवाब है कि लोग इन्हें चखने के लिए दूर-दराज के राज्यों से खिंचे चले आते हैं। इन मिठाइयों की लोकप्रियता सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इनकी मिठास सात समंदर पार विदेशों तक फैली हुई है। आज हम आपको सहारनपुर की पांच ऐसी प्रसिद्ध और सस्ती मिठाइयों के बारे में बताएंगे, जिनकी दीवानगी लोगों के सिर चढ़कर बोलती है।

मोधू की दुकान के 350 साल पुराने पेड़े

सहारनपुर के गंगोह कस्बे में स्थित 'मोधू की दुकान' की विरासत लगभग 350 साल पुरानी बताई जाती है। इस दुकान के पेड़े न केवल भारत में मशहूर हैं, बल्कि विदेशों में रहने वाले लोग भी इनकी मांग करते हैं। दुकान के मौजूदा मालिक मनोज कुमार गोयल के अनुसार, यह दुकान अंग्रेजों के जमाने से अपनी गुणवत्ता और पारंपरिक स्वाद के लिए जानी जाती है। वर्तमान में इस विरासत की सातवीं पीढ़ी इसे आगे बढ़ा रही है। दिलचस्प बात यह है कि दुकान के मालिक खुद हलवाई के साथ रहकर पेड़ों की गुणवत्ता की निगरानी करते हैं। इस दुकान के पेड़े बड़े-बड़े राजनेताओं और हस्तियों की पसंद रहे हैं। कहा जाता है कि देश के अमर शहीद लाला जगत नारायण भी इस दुकान के पेड़ों के मुरीद थे। यहाँ पेड़ों के अलावा गाजर का हलवा, बर्फी और घेवर भी बेहद चाव से खाया जाता है।

मानसून का राजा: रबड़ी वाला घेवर

बरसात का मौसम आते ही सहारनपुर में 'मोधू की दुकान' पर रबड़ी वाले घेवर की भारी मांग बढ़ जाती है। सीजन के दौरान इस दुकान पर रोजाना 100 किलो से ज्यादा घेवर हाथों-हाथ बिक जाते हैं। इस घेवर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पूरी तरह शुद्ध और घरेलू सामग्रियों से तैयार किया जाता है। इसके ऊपर लगाई जाने वाली मलाईदार रबड़ी को एक विशेष पारंपरिक विधि से बनाया जाता है। घेवर को चाशनी में डुबोया नहीं जाता, जिससे उसका कुरकुरापन लंबे समय तक बना रहता है। प्रदेश के कई मंत्री और बड़े अधिकारी भी इस घेवर को बेहद पसंद करते हैं। बाजार में इसकी कीमतें ₹300 प्रति किलो से शुरू होकर ₹500 प्रति किलो तक रहती हैं।

सरसावा की प्रसिद्ध पनीर वाली जलेबी

सहारनपुर के सरसावा कस्बे में स्थित 'चावलाज स्वीट्स' की पनीर वाली जलेबी ने मिठाई प्रेमियों के दिलों में एक अलग जगह बनाई है। यह जलेबी आम जलेबियों से काफी अलग और अत्यधिक नरम होती है। इसे खाने के लिए हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पड़ोसी राज्यों से लोग बड़ी संख्या में यहाँ पहुंचते हैं। पनीर का सही मिश्रण इसे एक अनोखा स्वाद देता है जो एक बार खाने वाला बार-बार इसकी तलाश करता है।

नागल की अनोखी 'पलंग तोड़' मिठाई

सहारनपुर के नागल कस्बे में हाईवे के किनारे मिलने वाली 'पलंग तोड़' मिठाई अपने नाम के साथ-साथ अपने स्वाद के लिए भी चर्चा में रहती है। दिखने में यह साधारण खोए की बर्फी जैसी लग सकती है, लेकिन इसका स्वाद दूसरी सभी मिठाइयों से काफी अलग है। इस मिठाई की कहानी यह है कि कभी यह केवल ₹40 प्रति किलो के भाव से बिकती थी, लेकिन समय के साथ इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि आज यह ₹300 प्रति किलो के भाव से बिक रही है। अपने अनोखे नाम के कारण यह राहगीरों और पर्यटकों के बीच हमेशा चर्चा का विषय बनी रहती है।

पौष्टिक ड्राई फ्रूट लड्डू

सरसावा के 'चावलाज स्वीट्स' पर बनने वाले ड्राई फ्रूट के लड्डू स्वास्थ्य और स्वाद का बेहतरीन मेल माने जाते हैं। इन्हें विशेष ऑर्डर पर तैयार किया जाता है। इन लड्डुओं में शुद्ध देसी घी के साथ बादाम, काजू, किशमिश, पिस्ता, छुआरा और गोंद जैसे पौष्टिक मेवों का भरपूर उपयोग होता है। सर्दियों के मौसम में इन लड्डुओं की मांग कई गुना बढ़ जाती है। इनकी गुणवत्ता और सामग्री के आधार पर इनका मूल्य ₹300 से लेकर ₹600 प्रति किलो तक होता है।

निष्कर्ष

सहारनपुर की इन मिठाइयों ने यह साबित कर दिया है कि यदि स्वाद में दम हो, तो वह किसी भी भौगोलिक सीमा का मोहताज नहीं होता। चाहे वह गंगोह का सदियों पुराना पेड़ा हो या फिर सरसावा की पनीर वाली जलेबी, इन सभी मिठाइयों ने सहारनपुर को देश के मिष्ठान मानचित्र पर एक गौरवशाली स्थान दिलाया है। यदि आप भी खाने-पीने के शौकीन हैं, तो सहारनपुर का यह जायका आपके लिए एक बेहतरीन अनुभव हो सकता है।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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