तमिलनाडु विधानसभा में गरजे मुख्यमंत्री जोसेफ विजय, महिलाओं के सम्मान पर विपक्ष को दी कड़ी चेतावनी भारत एक घंटा पहले 7
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने विधानसभा में विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी राजनीतिक सफलता के पीछे महिलाओं का बड़ा हाथ है और वे उनके खिलाफ किसी भी तरह की अभद्र टिप्पणी बर्दाश्त नहीं करेंगे।

तमिलनाडु विधानसभा के सत्र के दौरान सूबे के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय का बेहद आक्रामक रूप देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने सदन के भीतर विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए साफ शब्दों में चेतावनी दी है। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उनकी इस बड़ी राजनीतिक कामयाबी के पीछे देश और प्रदेश की मातृशक्ति यानी महिलाओं का सबसे बड़ा योगदान है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे महिलाओं के खिलाफ की जाने वाली किसी भी तरह की अमर्यादित या अभद्र टिप्पणी को कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे।

राजनीतिक आलोचना और महिलाओं का सम्मान

विधानसभा के भीतर अपने संबोधन में मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने कहा कि सूबे की जनता ने हमेशा से ही अन्ना, एमजीआर, एनटीआर और अब विजय जैसे जननेताओं को अपना भरपूर समर्थन और जनादेश दिया है। उन्होंने महिलाओं के मुद्दे पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए कहा कि उनकी जीत का मुख्य आधार महिलाएं ही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक आलोचना तीखी हो सकती है और वे इसका स्वागत करते हैं, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं है कि महिलाओं को निशाना बनाया जाए। महिलाओं के खिलाफ की जाने वाली किसी भी अपमानजनक टिप्पणी को सहन नहीं किया जाएगा।

DMK पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

इसके साथ ही मुख्यमंत्री विजय ने विपक्षी दल DMK पर भी जमकर हमला बोला। उन्होंने पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी और उनके करीबियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इन लोगों ने मिलकर सुनियोजित तरीके से भ्रष्टाचार को अंजाम दिया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पूर्व मंत्री और उनके सहयोगियों ने TASMAC की हर एक दुकान से 10 रुपये से लेकर 100 रुपये तक की अवैध वसूली की थी। विधानसभा में उन्होंने इस गुट को 'करूर गैंग' के नाम से संबोधित किया। मुख्यमंत्री ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि जहां भी DMK सक्रिय रहती है, वहां पर गलत और गैर-कानूनी काम होना निश्चित है।

फाइल खोलने की चुनौती और सरकारिया आयोग

मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि DMK ने उन्हें सरकार के 3 विभागों की फाइलें खोलने की खुली चुनौती दी थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ही साफ कर दिया था कि DMK के शासनकाल के दौरान इन विभागों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ था। लेकिन फाइलों को खोलने से पहले वे साल 1988 में गठित किए गए सरकारिया आयोग की उस रिपोर्ट को गहराई से पढ़ना चाहते हैं, जो DMK सरकार के भ्रष्टाचार की जांच के लिए बनाई गई थी।

मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि सरकारिया आयोग ने अपनी रिपोर्ट में आरोप लगाया था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री करुणानिधि ने मुख्यमंत्री के तौर पर अपने पद का दुरुपयोग किया था। इसके अलावा उन्होंने केंद्रीय एजेंसी ED के आरोपों का भी जिक्र किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि ED ने भी यह संगीन आरोप लगाया है कि DMK ने पार्टी फंड के नाम पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार को अंजाम दिया। उन्होंने दावा किया कि पिछली सरकार में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, उप-मुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन और मंत्री सेंथिल बालाजी ने पार्टी फंड के नाम पर पैसे इकट्ठा किए थे।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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