मध्य प्रदेश
एक घंटा पहले
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विचारों
सागर की रफ्तार के लिए वरदान या जानलेवा खतरा
कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक फैले देश के सबसे लंबे नेशनल हाईवे यानी NH-44 के बारे में सभी जानते हैं। यह हाईवे सागर जिले के लिए विकास की एक नई इबारत लिख रहा है। इस हाईवे का कुल 162 किलोमीटर का हिस्सा सागर जिले से होकर गुजरता है। इस मार्ग ने सागर को सीधे तौर पर देश के 11 राज्यों और 30 से अधिक जिलों से जोड़ दिया है। इस कनेक्टिविटी के चलते सागर जिले में आर्थिक और सामाजिक बदलाव की एक नई लहर देखी जा रही है। हाईवे के किनारे तेजी से नए औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो रहे हैं, जिसके साथ ही होटल, रिसॉर्ट, रेस्टोरेंट और ढाबों का कारोबार भी दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की कर रहा है। रियल स्टेट के क्षेत्र में भी उछाल आया है और जमीनों की कीमतें आसमान छू रही हैं। किसानों को भी अपनी उपज बड़ी मंडियों तक पहुंचाने में काफी आसानी हुई है, जिससे उनकी आय के नए रास्ते खुले हैं। लेकिन, इस विकास के चमकते हुए चेहरे के पीछे एक बेहद डरावना और दर्दनाक पहलू भी छिपा है, जिसे नजरअंदाज करना अब संभव नहीं है।
6 सालों में उजड़ गए कई परिवार
सागर जिले की सीमा से गुजरने वाले इस हाईवे पर पिछले 6 सालों के भीतर 100 से ज्यादा लोग सड़क हादसों की भेंट चढ़ चुके हैं। यह महज एक सांख्यिकीय आंकड़ा नहीं है, बल्कि उन परिवारों का दर्द है जो सड़क दुर्घटनाओं के कारण हमेशा के लिए बिखर गए हैं। अक्सर इन हादसों में अपनी जान गंवाने वाला व्यक्ति अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सहारा होता है। उसकी असामयिक मृत्यु के बाद बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी और मासूम बच्चों के सिर से न केवल साया उठ जाता है, बल्कि वे आर्थिक और सामाजिक रूप से असहाय भी हो जाते हैं। इन 100 से अधिक मौतों ने न जाने कितने ही घरों को पूरी तरह तबाह कर दिया है।
खतरनाक अवैध कटों का जाल
सवाल यह उठता है कि शानदार तकनीक से बने इस नेशनल हाईवे पर आखिर इतनी जानलेवा दुर्घटनाएं क्यों हो रही हैं? जांच में इसका सबसे चौंकाने वाला कारण सामने आया है और वह है हाईवे पर बने 50 अवैध कट। ये अवैध कट मुख्य रूप से हाईवे के किनारे बने ढाबों, होटलों, पेट्रोल पंपों और ग्रामीण बस्तियों के पास स्थानीय लोगों द्वारा बना लिए गए हैं। इन अवैध रास्तों से अचानक दोपहिया और चौपहिया वाहन मुख्य हाईवे पर आ जाते हैं, जबकि हाईवे पर बड़े वाहन काफी तेज रफ्तार में चल रहे होते हैं। अचानक सामने आने वाले इन वाहनों के कारण तेज रफ्तार गाड़ियां न तो संभल पाती हैं और न ही रुक पाती हैं, जिससे भयानक टक्कर होती है और मौके पर ही मौतें हो जाती हैं।
ब्लैक स्पॉट और प्रशासन की चुनौतियां
हाईवे पर सुरक्षा की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां 13 ऐसे ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए गए थे, जहां हर 500 मीटर के दायरे में 10 या उससे अधिक मौतें दर्ज की गई थीं। हालांकि, प्रशासन का दावा है कि इनमें से 5 ब्लैक स्पॉट को दुरुस्त कर लिया गया है, लेकिन चिंता की बात यह है कि अभी भी 8 ऐसे खतरनाक स्पॉट मौजूद हैं, जहां हादसे लगातार हो रहे हैं। इसके अलावा कुल 47 ब्लैक स्पॉट की पहचान मालथौन से महाराजपुर के बीच की गई है। इनमें कैंट क्षेत्र का गढ़पहरा तिराहा, गौरझामर की नीम घाटी, गुरु चोपड़ा, देवरी क्षेत्र का चीमा ढाना, बीना चौराहा, बांदरी क्षेत्र में पीली तिराहा और झिकनी घाटी, तथा सिविल लाइन का बम्होरी बीका तिराहा प्रमुख हैं। ट्रैफिक डीएसपी मयंक चौहान के अनुसार, हाईवे पर मौजूद ये 47 ब्लैक स्पॉट ही सबसे बड़े हादसों का कारण बने हुए हैं, जिनमें से अधिकांश अवैध रूप से बनाए गए रास्ते ही हैं।
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