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2 घंटे पहले
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उत्तर प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहन क्रांति की ओर बड़ा कदम
भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती मांग को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। राज्य के अलीगढ़ जिले में जल्द ही एक विशाल बैटरी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का निर्माण शुरू होने जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कुल ₹700 करोड़ का निवेश किया जाएगा। मैक्सवोल्ट एनर्जी इंडस्ट्रीज लिमिटेड द्वारा लगाए जा रहे इस प्लांट के माध्यम से न केवल इलेक्ट्रिक वाहनों के क्षेत्र में उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि ऊर्जा भंडारण समाधानों को भी मजबूती मिलेगी। इस पहल को रोजगार सृजन और औद्योगिक विकास की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
परियोजना का स्वरूप और क्षमता
आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, मैक्सवोल्ट एनर्जी का यह नया प्लांट अलीगढ़ में 6 एकड़ जमीन पर तैयार किया जाएगा। कंपनी ने इस परियोजना का भूमि पूजन कार्यक्रम भी सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है। इस प्लांट को दो चरणों में पूरा करने की योजना है। जब यह प्रोजेक्ट अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य करना शुरू कर देगा, तो यहां सालाना 10 GWh बैटरी का उत्पादन हो सकेगा। कंपनी की पहले से संचालित दुहाई यूनिट की क्षमता को इसमें जोड़ दिया जाए, तो कुल वार्षिक उत्पादन क्षमता 12.5 GWh तक पहुंच जाने का अनुमान है।
विभिन्न श्रेणियों के वाहनों के लिए होगी बैटरी
अलीगढ़ का यह संयंत्र मुख्य रूप से आधुनिक मोबिलिटी और एनर्जी स्टोरेज की जरूरतों को पूरा करने पर केंद्रित होगा। यहां दो-पहिया, तीन-पहिया और चार-पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अत्याधुनिक बैटरियां बनाई जाएंगी। इसके अतिरिक्त, कंपनी ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स यानी OEMs के लिए विशेष उत्पादन लाइनें स्थापित करेगी ताकि उन्हें उनकी मांग के अनुसार बैटरी की आपूर्ति की जा सके। इससे देश के भीतर बैटरी की आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी और इलेक्ट्रिक वाहन उद्योग को आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
हजारों युवाओं को मिलेंगे रोजगार के अवसर
इस उद्योग के आने से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के द्वार खुलेंगे। अनुमान है कि इस फैक्ट्री के चालू होने से 1,500 से 2,000 लोगों को सीधे तौर पर रोजगार मिलेगा। इसके साथ ही 7,500 से 10,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की उम्मीद है। इन अप्रत्यक्ष अवसरों में लॉजिस्टिक्स, इंजीनियरिंग, बैटरी कंपोनेंट की आपूर्ति और सप्लाई चेन प्रबंधन जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
आर्थिक प्रभाव और औद्योगिक विकास
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह प्लांट पूरी क्षमता के साथ संचालित होने पर सालाना ₹6,800 करोड़ से अधिक का टर्नओवर उत्पन्न करने की क्षमता रखता है। उत्तर प्रदेश के इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार के अनुसार, इस तरह के बड़े निवेश से राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण का एक संपूर्ण औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि राज्य में औद्योगिक विकास की गति तेजी से बढ़ रही है और वर्ष 2025-26 में कुल 4,500 औद्योगिक इकाइयों ने अपना संचालन शुरू किया है, जो राज्य की औद्योगिक प्रगति का प्रमाण है।
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