पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने पर बढ़ा विवाद, नौशाद सिद्दीकी ने डीजीपी को लिखा पत्र पश्चिम बंगाल एक घंटा पहले 2
पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से माइक्रोफोन हटाए जाने की कार्रवाई को लेकर हंगामा खड़ा हो गया है। विधायक नौशाद सिद्दीकी ने पुलिस पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुए डीजीपी से शिकायत की है।

ध्वनि प्रदूषण को लेकर राज्य में तनाव

पश्चिम बंगाल में मस्जिदों से माइक्रोफोन हटाए जाने का मुद्दा इन दिनों काफी गरमाया हुआ है। इंडियन सेक्युलर फ्रंट के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को एक पत्र लिखकर पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस बिना किसी कानूनी नोटिस के मस्जिद समितियों को डरा-धमका रही है और जबरन माइक्रोफोन हटा रही है। दूसरी तरफ, कोलकाता की नाखोदा मस्जिद के इमाम ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि वे सर्वोच्च न्यायालय और कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेशों का पूरी तरह सम्मान करते हैं, लेकिन पुलिस द्वारा अपनाए जा रहे दमनकारी तरीके और दबाव को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। मस्जिद प्रबंधन का कहना है कि वे अदालती निर्देशों का पालन करने के लिए तैयार हैं, लेकिन कार्रवाई तय कानूनी प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए, न कि मनमानी तरीके से। इस घटनाक्रम के बाद से पूरे राज्य में ध्वनि प्रदूषण नियमों के क्रियान्वयन और पुलिस की भूमिका को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है।

ध्वनि प्रदूषण नियमों पर सख्ती

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अब पश्चिम बंगाल में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए अभियान तेज कर दिया है। इसके पीछे मुख्य आधार वर्ष 2,000 में कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा जारी किया गया वह निर्देश है, जिसमें ध्वनि प्रदूषण को सीमित करने के कड़े नियम तय किए गए थे। अदालत के इस आदेशानुसार, सुबह 6 बजे से पहले और रात 10 बजे के बाद सार्वजनिक स्थलों पर माइक्रोफोन के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध है। दिन के समय भी यदि लाउडस्पीकर या माइक्रोफोन का उपयोग करना है, तो इसके लिए पुलिस की पूर्व अनुमति अनिवार्य है। साथ ही, इन उपकरणों में साउंड लिमिटर लगाना भी जरूरी किया गया है। नियमों के अनुसार, दिन के समय औद्योगिक क्षेत्रों में ध्वनि की सीमा 70 डेसिबल, व्यावसायिक क्षेत्रों में 65 डेसिबल और आवासीय क्षेत्रों में 55 डेसिबल से अधिक नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी स्पष्ट किया है कि इन आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

मस्जिदों में कार्रवाई से मचा घमासान

राज्य के अलग-अलग जिलों से मस्जिदों में पुलिस की मौजूदगी और माइक्रोफोन हटाए जाने की तस्वीरें सामने आने के बाद समुदाय विशेष में काफी नाराजगी है। भांगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक नौशाद सिद्दीकी ने डीजीपी को लिखे अपने पत्र में इस पूरी कार्रवाई का कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने संकेत दिए हैं कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो मामला कलकत्ता उच्च न्यायालय तक ले जाया जाएगा। उधर, नाखोदा मस्जिद के इमाम का कहना है कि कानूनी आदेशों का पालन करना एक नागरिक जिम्मेदारी है, लेकिन पुलिस की धमकियां अनुचित हैं। इस संवेदनशील विषय पर टीएमसी विधायक कुणाल घोष ने किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से साफ इनकार कर दिया है।

नौशाद सिद्दीकी के पत्र के मुख्य बिंदु

विधायक नौशाद सिद्दीकी ने अपने पत्र में पुलिस के व्यवहार पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा कि राज्य के कई हिस्सों से खबरें मिल रही हैं कि स्थानीय पुलिस बिना किसी नोटिस के मस्जिदों में जाकर समिति के सदस्यों को धमका रही है। यहाँ तक कि कुछ इलाकों में फज्र की अजान के लिए भी माइक्रोफोन का उपयोग बंद करने का दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि, ध्वनि प्रदूषण नियमों के तहत माइक्रोफोन की आवाज कम करने का सरकारी निर्देश पालन किया जा रहा है, लेकिन पुलिस का वर्तमान व्यवहार लोगों में डर पैदा कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ध्वनि प्रदूषण की शिकायत है, तो उसे कानूनी प्रक्रिया, नोटिस और सुनवाई के माध्यम से निपटाया जाना चाहिए। किसी भी धार्मिक स्थल के खिलाफ मौखिक आदेश या बल का प्रयोग करना अनुच्छेद 14, 19, 21 और 25 से 28 के तहत प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने डीजीपी से मांग की है कि यदि कोई निर्देश जारी किए गए हैं, तो उनकी एक प्रति मस्जिद समितियों को उपलब्ध कराई जाए और पुलिस की मनमानी के खिलाफ तत्काल जांच करते हुए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तय की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि पुलिस का यह अवैध व्यवहार भविष्य में सांप्रदायिक सद्भाव के लिए खतरा पैदा कर सकता है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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