पश्चिम बंगाल
3 घंटे पहले
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कोर्ट से ममता खेमे को नहीं मिली राहत
पश्चिम बंगाल की राजनीति में चल रहे घमासान के बीच ममता बनर्जी के खेमे को कलकत्ता हाईकोर्ट से एक बड़ा झटका लगा है। कोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने मंगलवार को यह स्पष्ट कर दिया है कि बागी तृणमूल कांग्रेस (TMC) विधायक ऋतब्रत बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के पद पर बने रहेंगे। यह व्यवस्था फिलहाल एक अंतरिम आदेश के तहत लागू की गई है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यह स्थिति तब तक बनी रहेगी जब तक कि हाईकोर्ट की एक सिंगल बेंच इस नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना अंतिम निर्णय नहीं सुना देती। अदालत ने इस मामले को सुलझाने के लिए दो महीने की समय-सीमा तय की है।
डिवीजन बेंच ने दिया आदेश
इस पूरे मामले की सुनवाई जस्टिस शम्पा सरकार और जस्टिस अजय कुमार गुप्ता की डिवीजन बेंच कर रही थी। बेंच ने अपने निर्देश में कहा है कि ममता बनर्जी की पार्टी के विधायक शोभनदेव चट्टोपाध्याय द्वारा विधानसभा स्पीकर के फैसले को लेकर दायर की गई याचिका पर सिंगल बेंच सुनवाई करेगी। कोर्ट का लक्ष्य है कि अगले दो महीने के भीतर इस कानूनी विवाद पर फैसला आ जाए ताकि विधानसभा की कार्यवाही और पद की वैधता को लेकर स्थिति साफ हो सके।
क्या है पूरा कानूनी विवाद
विवाद की शुरुआत तब हुई जब 18 जून को हाईकोर्ट की एक सिंगल बेंच ने स्पीकर रथिंद्र बोस के उस फैसले पर कोई भी अंतरिम आदेश जारी करने से साफ इनकार कर दिया था, जिसके तहत उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता नियुक्त किया था। इस फैसले से असंतुष्ट होकर शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने डिवीजन बेंच का रुख किया। वरिष्ठ नेता चट्टोपाध्याय का तर्क था कि विपक्ष के नेता पद के लिए उनके नाम की अनदेखी की गई है, जिसके चलते उन्होंने कोर्ट में चुनौती पेश की थी।
पार्टी और चुनाव चिन्ह पर कब्जे की जंग
तृणमूल कांग्रेस वर्तमान में अपने अस्तित्व के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। हालिया विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही पार्टी में बिखराव की स्थिति है और कई प्रमुख नेता दूसरे दलों के साथ जुड़ रहे हैं। पार्टी पर नियंत्रण, नाम के मालिकाना हक और मशहूर 'घास-फूल' चुनाव चिन्ह को लेकर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के गुटों के बीच वर्चस्व की लड़ाई छिड़ी हुई है।
ऋतब्रत बनर्जी को जान से मारने की धमकियां
इस राजनीतिक तनाव के बीच ऋतब्रत बनर्जी ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उन्हें पिछले तीन महीने से जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। उनके करीबियों के मुताबिक, 3 मई से 9 अगस्त के बीच उन्हें बांग्लादेश के फोन नंबरों से लगातार WhatsApp कॉल आए। कॉलर ने उन्हें धमकी दी है कि उनका अंजाम भी बांग्लादेशी-अमेरिकी ब्लॉगर अभिजीत रॉय जैसा होगा, जिनकी वर्ष 2015 में ढाका में हत्या कर दी गई थी।
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