फिलीपींस में समुद्र का रहस्यमयी पीछे हटना, 200 मीटर तक दिखी सूखी जमीन विश्व एक घंटा पहले 3
फिलीपींस में 7.8 तीव्रता के भीषण भूकंप के बाद समुद्र का पानी अचानक 200 मीटर पीछे चला गया है, जिसके पीछे वैज्ञानिकों ने कोस्टल अपलिफ्ट की प्रक्रिया को जिम्मेदार माना है।

भूकंप के बाद बदला समुद्र का स्वरूप

फिलीपींस में आए एक विनाशकारी भूकंप के दो दिन बाद समुद्र के तट पर जो नजारा देखने को मिला, उसने विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है। 8 जून 2026 को मिंडानावो में 7.8 तीव्रता के भूकंप के झटकों के बाद तटीय इलाकों में समुद्र का पानी अचानक 200 मीटर पीछे हट गया। अब वहां पानी की जगह सूखी जमीन, समुद्री घास और सदियों पुरानी मूंगे की चट्टानें (कोरल रीफ) दिखाई दे रही हैं, जहां पहले नावें चलती थीं।

क्या है कोस्टल अपलिफ्ट का विज्ञान?

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कोई चमत्कार नहीं, बल्कि एक भूवैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसे कोस्टल अपलिफ्ट (तटीय उत्थान) कहा जाता है। फिलीपींस के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DOST) के सचिव रेनाटो सॉलिडम जूनियर के अनुसार, जब सक्रिय फॉल्ट पर अत्यधिक दबाव जमा हो जाता है, तो भूकंप के दौरान वह ऊर्जा अचानक रिलीज होती है। इससे जमीन और समुद्र की सतह ऊपर उठ जाती है।

इस घटना से जुड़ी 5 मुख्य बातें

  • कोटाबाटो ट्रेंच की हलचल: फिलीपींस के सीस्मोलॉजी संस्थान के अनुसार, भूकंप का केंद्र दक्षिणी मिंडानावो के पास कोटाबाटो ट्रेंच में था, जहाँ टेक्टोनिक प्लेटों के खिसकने से जमीन ऊपर की ओर धकेल दी गई।
  • जमीन का उठाव: भूकंप के बाद सारंगानी और दावाओ ऑक्सीडेंटल के तटीय इलाकों में जमीन का स्तर करीब 2 मीटर (6.6 फीट) ऊपर उठ गया है।
  • तटरेखा में विस्तार: जमीन के ऊपर उठने के कारण उथले पानी वाला 200 मीटर का क्षेत्र अब सूखी जमीन में बदल चुका है।
  • समुद्री जीवों पर खतरा: पानी के हटने से कोरल रीफ और समुद्री घास के मैदान हवा और धूप के संपर्क में आ गए हैं, जिससे समुद्री जैव विविधता को भारी नुकसान हुआ है।
  • स्थायी बदलाव: वैज्ञानिक इसे एक स्वाभाविक घटना मान रहे हैं। यह बदलाव स्थायी है, इसलिए भविष्य में कोई अन्य टेक्टोनिक हलचल होने तक पानी अपनी पुरानी जगह पर वापस नहीं लौटेगा।

मछुआरों और पर्यावरण पर असर

समुद्र की गहराई बदलने से स्थानीय मछुआरों के लिए नावों के रास्ते बदल गए हैं। इसके अलावा, कोरल रीफ के नष्ट होने से मछली पालन और स्थानीय रोजगार पर गहरा असर पड़ने की आशंका है। वैज्ञानिकों ने लोगों को सलाह दी है कि वे बाहर आई नाजुक चट्टानों पर न चलें और सावधानी बरतें। स्पष्ट किया गया है कि यह सुनामी का संकेत नहीं है, क्योंकि सुनामी में पानी क्षणिक रूप से पीछे हटता है, जबकि यहाँ जमीन के उठने के कारण भौगोलिक स्थिति हमेशा के लिए बदल गई है। इससे पहले साल 2013 में फिलीपींस के बोहोल में भी 7.2 तीव्रता के भूकंप के बाद ऐसी ही घटना दर्ज की गई थी।

चेतन शुक्ला
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चेतन शुक्ला (Chetan Shukla) Print & Broadcast News Agency (PABNA) में 'मुख्य संपादक' हैं। वह पत्रकारिता में 15 वर्ष से ज्यादा का अनुभव रखते हैं। ये मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं। इन्हें राजनीति और आम आदमी से जुड़ी खबरें लिखना पसंद है।

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