दक्षिण कोरिया में कुत्तों का रहस्य: मीट बैन से पहले अचानक कहां गायब हो गए 4 लाख से अधिक कुत्ते? विश्व एक घंटा पहले 2
दक्षिण कोरिया में अगले साल से डॉग मीट पर प्रतिबंध लगने जा रहा है, लेकिन आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार लाखों कुत्तों के गायब होने से हड़कंप मचा है। सरकार के पास इन कुत्तों का कोई हिसाब-किताब नहीं है, जिससे पशु अधिकार संगठनों में भारी नाराजगी है।

डॉग मीट पर प्रतिबंध और रहस्यमयी स्थिति

दक्षिण कोरिया में अगले वर्ष से कुत्तों के मांस पर पूरी तरह से रोक लगाने की तैयारी चल रही है, लेकिन इस बड़े फैसले के लागू होने से पहले ही एक गंभीर रहस्य गहरा गया है। देश में मांस के लिए पाले जा रहे लाखों कुत्तों का कोई अता-पता नहीं चल रहा है। सरकारी आंकड़ों की मानें तो पिछले कुछ वर्षों में कुत्तों की संख्या में भारी गिरावट आई है, लेकिन प्रशासन के पास यह बताने के लिए कोई पुख्ता दस्तावेज नहीं है कि ये जानवर आखिर गए कहां। सरकार द्वारा डॉग मीट उद्योग को बंद करने के फैसले के बाद से ही यह सवाल पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है कि क्या लाखों कुत्तों को कानून लागू होने से पहले ही समाप्त कर दिया गया या उनका उपयोग कर लिया गया।

कुत्तों की संख्या में आई भारी गिरावट

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में दक्षिण कोरिया के भीतर मांस के उद्देश्य से लगभग 4 लाख से 4.5 लाख कुत्तों को पाला जा रहा था। यह संख्या अब घटकर केवल 20 हजार के आसपास रह गई है। इस बड़े अंतर ने सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जनवरी 2024 में दक्षिण कोरियाई संसद ने एक ऐतिहासिक कानून को मंजूरी दी थी, जिसका उद्देश्य फरवरी 2027 तक डॉग मीट उद्योग को पूरी तरह समाप्त करना है। इस नए कानून के तहत कुत्तों को मांस के लिए पालना, उन्हें मारना और उनके मांस का व्यापार करना अपराध माना जाएगा। कानून का उल्लंघन करने वाले दोषियों को 3 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही, सरकार ने फार्म मालिकों को अपना व्यवसाय बंद करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु प्रति कुत्ता 6 लाख वॉन तक का मुआवजा देने की घोषणा की थी।

क्या खा लिए गए लाखों कुत्ते?

लाखों कुत्तों के अचानक गायब होने के पीछे के कारणों पर जब एक फार्म मालिक से सवाल किया गया, तो उनका जवाब बेहद चौंकाने वाला था। एक मीडिया रिपोर्ट में उन्होंने बताया कि दक्षिण कोरिया में खाने के लिए पाले जाने वाले कुत्तों और घरों में रखे जाने वाले पालतू कुत्तों को समाज हमेशा अलग नजरिए से देखता रहा है। उन्होंने आशंका जताई कि संभव है कि गायब हुए ज्यादातर कुत्तों को पहले ही मांस के तौर पर इस्तेमाल कर लिया गया हो। इस बयान ने पशु अधिकार कार्यकर्ताओं के बीच आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। पशु प्रेमियों का तर्क है कि अगर इतनी भारी तादाद में कुत्तों को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित किया जाता या उन्हें गोद दिया जाता, तो इसकी जानकारी उन तक जरूर पहुंचती।

प्रशासन की भूमिका पर सवाल

इस पूरे मामले में कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी ने अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि सरकार का प्राथमिक दायित्व केवल यह सुनिश्चित करना है कि फार्मों से कुत्तों को हटा दिया गया है या नहीं। उनके अनुसार, उन कुत्तों का भविष्य क्या होगा, यह सरकार की जिम्मेदारी के दायरे में नहीं आता है। सरकारी आंकड़ों की अगर बात करें तो अब तक आधिकारिक तौर पर केवल 623 कुत्तों को गोद लिया गया है, जबकि 500 से भी कम कुत्तों को शेल्टरों में भेजा गया है। कुल मिलाकर लाखों कुत्तों का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड न होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है।

फार्म मालिकों का असंतोष

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल डॉग फार्मों में से 82 प्रतिशत यानी करीब 1265 फार्म मालिकों ने अपना कारोबार बंद करने के लिए आवेदन दिया है। हालांकि, कई फार्म मालिकों का आरोप है कि सरकार ने उनकी रोजी-रोटी का जरिया छीन लिया है और उन्हें अन्य व्यवसायों में शिफ्ट होने के लिए पर्याप्त सहायता नहीं दी गई है। वर्तमान में यह मामला केवल डॉग मीट प्रतिबंध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक अनसुलझी पहेली बन चुका है कि क्या वास्तव में कानून का पालन करते समय इन जानवरों के साथ क्रूरता हुई है। फिलहाल, लाखों कुत्तों के गायब होने के इस मामले का कोई स्पष्ट उत्तर सरकार के पास मौजूद नहीं है।

साहिल चौहान पाबना के वर्ल्ड अफेयर्स रिपोर्टर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय खबरें और वैश्विक मामले कवर करते हैं। विदेश नीति, कूटनीति और दुनिया भर के घटनाक्रमों पर उनकी अच्छी पकड़ है। वे जटिल वैश्विक मुद्दों को भारतीय नजरिए से समझाते हैं।

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