आत्मनिर्भरता की मिसाल: बालोद कलेक्ट्रेट में 9 साल से चल रही 'गढ़ कलेवा' कैंटीन, 20 रुपए में परोसे जा रहे पारंपरिक व्यंजन छत्तीसगढ़ 3 महीने पहले 135
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में अन्नपूर्णा स्व-सहायता समूह की 11 महिलाएं पिछले 9 सालों से एक किफायती और लोकप्रिय कैंटीन चला रही हैं। यहाँ बेहद कम कीमत पर छत्तीसगढ़ी जायकों का स्वाद मिलता है, जो स्थानीय लोगों के साथ ही अधिकारियों की भी पहली पसंद बन चुका है।

नौ साल से सफलता की कहानी लिख रहीं महिलाएं

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में महिला सशक्तिकरण की एक बेहतरीन तस्वीर देखने को मिल रही है। जिला कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर 'अन्नपूर्णा स्व-सहायता समूह' के जरिए महिलाएं पिछले 9 साल से 'गढ़ कलेवा' नाम से एक कैंटीन का सफल संचालन कर रही हैं। यह कैंटीन न केवल रोजगार का एक बड़ा जरिया बन गई है, बल्कि क्षेत्र में छत्तीसगढ़ी पारंपरिक व्यंजनों की पहचान को भी मजबूती दे रही है। यहां काम करने वाली 11 महिलाएं अपनी मेहनत और लगन से लोगों का दिल जीत रही हैं।

सुबह से शाम तक चहल-पहल

इस कैंटीन की लोकप्रियता का आलम यह है कि यहां सुबह 9 बजे से ही ग्राहकों का तांता लगना शुरू हो जाता है और यह प्रक्रिया शाम 6 बजे तक निरंतर चलती है। समूह की सदस्य सेवती ठाकुर के अनुसार, इस कैंटीन की शुरुआत मुख्य रूप से स्थानीय महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाने और उन्हें रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से की गई थी। शुरुआत में काम का स्तर सीमित था, लेकिन समय के साथ गुणवत्ता और स्वाद ने इसे कलेक्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक कार्यालय के कर्मचारियों और वहां आने वाले आम नागरिकों के लिए पसंदीदा ठिकाना बना दिया है।

पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजनों का खजाना

गढ़ कलेवा कैंटीन की सबसे बड़ी विशेषता यहां परोसे जाने वाले पारंपरिक छत्तीसगढ़ी पकवान हैं, जो शायद ही कहीं और इतनी शुद्धता के साथ मिलते हों। यहां के मेन्यू में चीला, फरा, गुलगुल भजिया, चौसेला, ठेठरी, खुरमी और गुजिया जैसे व्यंजन शामिल हैं। हालांकि, स्थानीय लोगों की पसंद की बात करें तो यहां का 'देसी बड़ा' सबसे ज्यादा डिमांड में रहता है। इसके अलावा मीठे व्यंजनों में 'अरसा' की मांग हमेशा बनी रहती है। नाश्ते के तौर पर यहां समोसा, इडली, ढोकला और पूड़ी जैसी चीजें भी बड़ी तादाद में बनाई और परोसी जाती हैं।

महंगाई के दौर में किफायती दाम

मौजूदा दौर में जब बाहर नाश्ते की एक प्लेट की कीमत 25 से 30 रुपए तक पहुंच चुकी है, तब यह कैंटीन मात्र 20 रुपए में ताज़ा और स्वादिष्ट नाश्ता उपलब्ध कराकर मिसाल पेश कर रही है। आम लोगों के लिए यह एक बेहद किफायती विकल्प है। इस कैंटीन के जरिए जुड़ी 11 महिलाएं अपनी सामूहिक मेहनत से प्रतिदिन 3 हजार रुपए से अधिक की कमाई कर लेती हैं। यह आर्थिक लाभ न केवल उनके परिवारों के लिए मददगार है, बल्कि अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।

महिला सशक्तिकरण का सफल मॉडल

बालोद का यह गढ़ कलेवा कैंटीन केवल नाश्ता बेचने की जगह नहीं है, बल्कि यह आत्मनिर्भरता की एक पाठशाला है। यह सिद्ध करता है कि अगर महिलाओं को सही मंच और सहयोग मिले, तो वे अपने दम पर एक सफल व्यवसाय खड़ा कर सकती हैं। यह पहल स्थानीय खानपान को बढ़ावा देने के साथ-साथ जिले की सांस्कृतिक धरोहर को भी जीवित रखे हुए है। आज कलेक्ट्रेट परिसर में जाने वाले हर व्यक्ति के लिए यह कैंटीन स्वाद, रोजगार और महिला शक्ति का एक पर्याय बन चुकी है।

अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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