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एक घंटा पहले
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उत्तर प्रदेश और बिहार में चुनावी घमासान
शुक्रवार को उत्तर प्रदेश और बिहार में MLC चुनाव की प्रक्रिया के दौरान कई स्थानों पर जबरदस्त हंगामा, मारपीट और बूथ कैप्चरिंग के गंभीर आरोप सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर, मुजफ्फरनगर, गोरखपुर, आगरा, वाराणसी और कौशांबी जैसे जिलों में राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच तीखी झड़पें हुईं, जिससे मतदान प्रक्रिया प्रभावित हुई। इन घटनाओं को लेकर बीजेपी और समाजवादी पार्टी के नेता एक दूसरे पर लगातार आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। वहीं, बिहार में भी जनसुराज, बीजेपी और जेडीयू के समर्थकों के बीच हुई झड़पों ने तनाव पैदा कर दिया है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने इस पूरी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मतपत्र प्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर उठते सवाल
MLC चुनावों में आम चुनावों की तरह सभी लोग मतदान नहीं करते हैं, बल्कि एक निर्धारित मतदाता सूची के आधार पर मतपत्र के माध्यम से मतदान होता है। इस चुनाव में बूथ कैप्चरिंग, फर्जी वोटिंग और बैलेट पेपर के दुरुपयोग की शिकायतों ने एक बड़ी बहस को जन्म दिया है। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था की कमी और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच बार-बार हो रही झड़पों ने चुनाव आयोग की भूमिका पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।
फतेहपुर में बूथ कैप्चरिंग का आरोप
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में खागा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत विजयीपुर ब्लॉक स्थित एक पोलिंग बूथ पर हंगामे की स्थिति बन गई। एक मतदाता ने शिकायत की कि जैसे ही वह वोट डालने के लिए आगे बढ़ा, कुछ लोगों ने जबरन बूथ के अंदर प्रवेश किया और मुख्य द्वार बंद कर दिया। आरोप यह भी है कि इन लोगों ने ड्यूटी पर तैनात चुनाव अधिकारियों को डराया-धमकाया और वहां लगे सीसीटीवी कैमरों को भी बंद करवा दिया। इसके बाद, बैलेट पेपर का एक पूरा बंडल लेकर वहां कथित रूप से फर्जी मतदान किया गया। इस घटना के बाद बीजेपी और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए और मामला मारपीट तक पहुंच गया, जिसके बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे।
पुलिस का रुख और दावों की सच्चाई
फतेहपुर की घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने बूथ कैप्चरिंग की खबरों को सिरे से नकार दिया है। पुलिस अधीक्षक के अनुसार, यह कोई बूथ कैप्चरिंग का मामला नहीं था, बल्कि बीजेपी और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच आपसी विवाद हुआ था। प्रशासन का कहना है कि स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में ले लिया गया था, जबकि स्थानीय मतदाता अब भी फर्जी मतदान और कैमरों को जानबूझकर बंद करने के अपने दावों पर कायम हैं।
मुजफ्फरनगर में पहचान पत्र को लेकर विवाद
मुजफ्फरनगर ग्रेजुएट सीट के लिए डीएवी डिग्री कॉलेज में बनाए गए मतदान केंद्र पर बीजेपी और सपा कार्यकर्ताओं के बीच हाथापाई हुई। यूपी सरकार के मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने दावा किया कि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के नाम वाले कार्ड का इस्तेमाल करके कुछ अनधिकृत लोग पोलिंग एजेंट बनकर बूथ के भीतर घुस आए थे। उनका आरोप था कि सपा कार्यकर्ता चुनाव को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे थे। दूसरी ओर, सपा के जिलाध्यक्ष जिया चौधरी ने पलटवार करते हुए कहा कि मंत्री कपिल देव अग्रवाल खुद नियम तोड़कर बूथ में घुसे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री अंदर जाकर मतदाताओं को धमका रहे थे और चुनाव को प्रभावित कर रहे थे।
गोरखपुर और आगरा की स्थिति
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट पर सपा उम्मीदवार संजय त्रिपाठी जब डीएवी पीजी कॉलेज में अपना वोट डालकर बाहर आए और मीडिया से बात करने लगे, तो बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उन्हें बूथ क्षेत्र से हटने को कहा। इस दौरान वहां तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। उधर, आगरा शिक्षक सीट पर तो स्थिति और भी भावुक हो गई, जब सपा उम्मीदवार आकाश अग्रवाल मंडल आयुक्त कार्यालय के बाहर रोते हुए पहुंचे। उन्होंने दावा किया कि उनके पास सबूत हैं कि चुनाव में बूथ लूटे गए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग और पुलिस पर सुरक्षा देने में विफल रहने का गंभीर आरोप लगाया है।
वाराणसी और कौशांबी में आचार संहिता का उल्लंघन
वाराणसी में सपा उम्मीदवार आशुतोष सिन्हा पर बीजेपी समर्थकों ने आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया। उनका कहना था कि आशुतोष सिन्हा मतदान केंद्र के आसपास मौजूद थे, जो नियमों के खिलाफ है। इसी प्रकार कौशांबी के नेवादा ब्लॉक में दो निजी गाड़ियों के अंदर जाने को लेकर विवाद छिड़ गया। बीजेपी जिलाध्यक्ष धर्मराज मौर्य ने आरोप लगाया कि सपा कार्यकर्ता पुलिस के संरक्षण में बूथ कैप्चरिंग कर रहे थे, जबकि सपा उम्मीदवार मान सिंह यादव ने बीजेपी पर ही धमकाने और फर्जी वोटिंग कराने का आरोप लगाया।
अखिलेश यादव का चुनाव आयोग पर निशाना
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इन घटनाओं को लेकर चुनाव आयोग को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर कई वीडियो साझा करते हुए कहा कि चुनाव आयोग इस समय गहरी नींद में है। उन्होंने दावा किया कि 30 से अधिक शिकायतें आयोग को भेजी गई हैं और वोटरों को उनके मताधिकार का प्रयोग करने से रोका जा रहा है। अखिलेश ने आयोग की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं।
बीजेपी का पलटवार
अखिलेश यादव के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए यूपी सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव को पहले यह तय कर लेना चाहिए कि उन्हें ईवीएम खराब लगती है या मतपत्र। राजभर के मुताबिक, अखिलेश हर चुनाव के बाद हार का नया बहाना ढूंढ लेते हैं। वहीं, मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने कहा कि बूथ कैप्चरिंग के दावे पूरी तरह मनगढ़ंत हैं, क्योंकि अगर ऐसा कुछ हुआ होता तो मतदाता भी शिकायत जरूर करते, लेकिन सिर्फ सपा नेता ही शोर मचा रहे हैं।
बिहार में चुनावी हिंसा का दौर
बिहार में भी MLC चुनाव का दिन शांतिपूर्ण नहीं रहा। कोसी ग्रेजुएट सीट और लखीसराय में बीजेपी, जनसुराज और जेडीयू समर्थकों के बीच मारपीट की घटनाएं सामने आईं। मोकामा में तो पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तीन लोगों को हिरासत में लेना पड़ा। तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि सरकार ने आरजेडी उम्मीदवार के घर पुलिस भेजकर उन्हें डराने की कोशिश की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसके सबूत के तौर पर वीडियो भी पोस्ट किए और सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का मुद्दा उठाया है।
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