भारत में बदल रही है शादियों की तस्वीर, आखिर क्यों विवाह के बंधन से दूरी बना रही हैं युवतियां? जीवनशैली एक घंटा पहले 6
भारत में शादी को सात जन्मों का पवित्र रिश्ता माना जाता है, लेकिन हालिया सर्वेक्षणों के आंकड़े बताते हैं कि अब बड़ी संख्या में महिलाएं विवाह से किनारा कर रही हैं। सामाजिक बंधनों और व्यक्तिगत आजादी की चाहत के बीच यह बड़ा बदलाव क्यों आ रहा है, जानिए इसकी वजह।

शादी को लेकर बदलती सोच

भारत को परंपराओं और पारिवारिक मूल्यों वाला देश कहा जाता है। यहां शादी को केवल दो व्यक्तियों का मिलन नहीं, बल्कि सात जन्मों का अटूट रिश्ता माना जाता है। समाज में पति को देवता का दर्जा दिया जाता है और परिवार को सबसे ऊपर रखा जाता है। लेकिन, हाल ही में सामने आए एक सर्वेक्षण ने इन स्थापित मान्यताओं को चुनौती दी है। सर्वे के नतीजे बताते हैं कि भारत की युवतियों की प्राथमिकता सूची में शादी अब नीचे खिसक गई है और वे इस बंधन से बचने की राह तलाश रही हैं।

सामाजिक बंधन और घुटन

ऊपर से देखने पर भारतीय विवाह प्रणाली बहुत सुंदर और भावनात्मक लग सकती है, लेकिन वास्तविकता का दूसरा पहलू काफी कठोर है। अक्सर परिवार की इज्जत के नाम पर महिलाओं पर कई तरह के प्रतिबंध थोप दिए जाते हैं। कई जगहों पर उन्हें चारदीवारी के भीतर रहने, घुंघट में मुंह छिपाने और अपनी मर्जी से निर्णय न लेने के लिए मजबूर किया जाता है। घर की मान-मर्यादा के नाम पर उनका व्यक्तिगत अस्तित्व ही खो जाता है।

अस्तित्व की लड़ाई और व्यक्तिगत आजादी

आज के दौर की महिलाएं अपनी शर्तों पर जीना चाहती हैं। हालांकि देश के कई हिस्सों में स्थितियां बदली हैं, लेकिन अभी भी ऐसे कई घर और इलाके मौजूद हैं जहां महिलाओं को अपनी पसंद के कपड़े पहनने या अपनी मर्जी से जीवन जीने की आजादी नहीं है। वहां एक महिला की पहचान केवल पिता, भाई या पति के नाम से होती है, उसका अपना स्वतंत्र व्यक्तित्व गौण हो जाता है। यही कारण है कि जब सर्वेक्षण में यह बात सामने आई कि महिलाएं शादी से परहेज कर रही हैं, तो यह कोई हैरानी की बात नहीं लगती। वे उन बंधनों से बचना चाहती हैं जहां उनकी स्वतंत्रता का दम घुटता हो। शिक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता ने उन्हें यह साहस दिया है कि वे अपनी खुशी को सामाजिक दबावों से ऊपर रख सकें।

प्रिया नायर पाबना की लाइफस्टाइल एवं फैशन एडिटर हैं, जो फैशन, ब्यूटी और लाइफस्टाइल ट्रेंड्स कवर करती हैं। रिश्तों, संस्कृति और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर भी वे लिखती हैं। उनका लेखन आधुनिक और भारतीय जीवनशैली का संतुलन पेश करता है।

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