यूक्रेन में यूरोपीय सैनिकों की तैनाती सीधा युद्ध है: भारत दौरे पर व्लादिमीर पुतिन की यूरोप को दो टूक भारत 58 मिनट पहले 4
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत में अपनी उपस्थिति के दौरान यूरोपीय देशों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यूक्रेन में उनके सैनिकों का कदम रखना सीधे तौर पर रूस के खिलाफ युद्ध माना जाएगा।

यूक्रेन में विदेशी सैनिकों की तैनाती पर रूस की सख्त चेतावनी

यूक्रेन के साथ जारी सैन्य टकराव के बीच, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोपीय देशों को बेहद स्पष्ट शब्दों में चेतावनी जारी की है। भारत की यात्रा पर आए पुतिन ने कहा कि यदि यूरोपीय देश यूक्रेन की सरजमीं पर अपने सैनिकों को भेजते हैं, तो इस कदम का सीधा मतलब रूस के साथ सीधे सैन्य संघर्ष की शुरुआत होगा। हालांकि, पुतिन ने यह भी साफ किया कि रूस की तरफ से यूरोपीय देशों को धमकाने या डराने जैसा कोई विचार नहीं है। उन्होंने इन दावों को सिरे से खारिज किया कि यूरोप को रूस से कोई खतरा है। पुतिन का मानना है कि इस तरह की चिंताएं निराधार हैं।

रूस को यूरोप से कोई समस्या नहीं

राष्ट्रपति पुतिन ने इस बात पर जोर दिया कि रूस और यूरोपीय देशों के बीच किसी भी तरह के संघर्ष का कोई आधार नहीं है। उन्होंने कहा, 'ऐसा कोई खतरा मौजूद नहीं है और न ही भविष्य में था। हम यूरोपीय राष्ट्रों को किसी भी तरह की धमकी नहीं दे रहे हैं और न ही हमारा ऐसा करने का कोई इरादा है। आखिर हम ऐसा क्यों करेंगे?' रूसी राष्ट्रपति के अनुसार, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की व्यवस्था और सोवियत संघ के विघटन के बाद जो नियम तय किए गए थे, उन्हें रूस की पूर्ण सहमति के बाद ही लागू किया गया था।

पुतिन ने आगे स्पष्ट किया कि इन अंतरराष्ट्रीय समझौतों का उल्लंघन करना रूस के हितों पर सीधा प्रहार माना जाएगा और यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के बुनियादी सिद्धांतों के विरुद्ध होगा। यूक्रेन में सैनिकों को भेजने के मुद्दे पर उन्होंने अपनी बात को और मजबूती से रखते हुए कहा, 'अब वे लोग इस बात पर विचार कर रहे हैं कि यूक्रेन की जमीन पर सैनिक कैसे भेजे जाएं। लेकिन उन्हें यह समझ लेना चाहिए कि ऐसा करना सीधे तौर पर रूस के साथ जंग की घोषणा होगी।'

लंबे समय से खिंचा युद्ध और कूटनीतिक कोशिशें

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहा यह संघर्ष फरवरी 2022 में शुरू हुआ था, जो अब अपने पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है। इस दौरान यूरोप के कई देशों ने यूक्रेन को सैन्य और आर्थिक रूप से बड़ी सहायता प्रदान की है। वहीं, अमेरिका की ओर से भी लगातार इस तनाव को कम करने और मध्यस्थता की कोशिशें की जा रही हैं। हाल ही में अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने मॉस्को का दौरा किया था और उसके बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से भी मुलाकात की थी ताकि बातचीत का कोई रास्ता निकल सके।

भारत के साथ पुतिन की रणनीतिक बातचीत

वर्तमान में रूसी राष्ट्रपति 18वें BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत पहुंचे हुए हैं। इसी क्रम में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में पुतिन के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। शिखर सम्मेलन के औपचारिक उद्घाटन से ठीक पहले हुई इस मुलाकात में दोनों नेताओं ने भारत और रूस के बीच आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई देने पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में प्रोग्राम फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन 2030 को प्रभावी ढंग से लागू करने के साथ ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, रक्षा तकनीक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने पर सहमति बनी।

दो सप्ताह के भीतर दूसरी बार मिले मोदी और पुतिन

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की यह मुलाकात महज दो सप्ताह के भीतर दूसरी बार हुई है। इससे पहले दोनों नेताओं की भेंट 31 अगस्त को बिश्केक में आयोजित SCO सम्मेलन के दौरान हुई थी। BRICS के मंच से पुतिन का यह संदेश ऐसे नाजुक समय में आया है जब पूरी दुनिया यूक्रेन मामले में पश्चिमी देशों की भूमिका को लेकर बहस कर रही है। पुतिन ने अपनी नीति स्पष्ट करते हुए दोहराया है कि यूक्रेन के भीतर किसी भी यूरोपीय सैनिक की मौजूदगी को रूस अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा खतरा मानते हुए इसे युद्ध के रूप में देखेगा।

देवेंद्र पांडेय पाबना के राजनीतिक संवाददाता हैं और राष्ट्रीय राजनीति, सरकार तथा नीतियों पर रिपोर्टिंग करते हैं। चुनाव, संसद और बड़े सियासी घटनाक्रमों का वे गहराई से विश्लेषण करते हैं। उनकी रिपोर्टिंग निष्पक्ष और तथ्यों पर आधारित होती है।

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