गाजीपुर: बाढ़ के बीच रेवतीपुर में बिजली संकट से हाहाकार, ग्रामीणों की दिनचर्या और बच्चों की पढ़ाई ठप उत्तर प्रदेश एक घंटा पहले 6
उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में बाढ़ की मार झेल रहे रेवतीपुर क्षेत्र के ग्रामीण बिजली की अघोषित कटौती से जूझ रहे हैं। बीते 10-15 दिनों से शाम और रात के समय घंटों बिजली गायब रहने से खाना पकाने और सुरक्षा जैसे बुनियादी काम प्रभावित हो रहे हैं।

बाढ़ और अंधेरे की दोहरी मार से जूझते ग्रामीण

गाजीपुर जिले का रेवतीपुर क्षेत्र इन दिनों दोहरी मुसीबत का सामना कर रहा है। एक ओर क्षेत्र में बाढ़ के हालात बने हुए हैं, तो दूसरी ओर पिछले 10 से 15 दिनों से बिजली की मनमानी कटौती ने ग्रामीणों का जीना दूभर कर दिया है। विशेष रूप से पकड़ी गांव के लोग इस समस्या से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां शाम होते ही बिजली गुल हो जाती है और स्थिति रात भर बनी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली की कमी के कारण उनके रोजमर्रा के काम पूरी तरह से बिगड़ चुके हैं।

खाना पकाने से लेकर पढ़ाई तक पर असर

पकड़ी गांव के निवासियों ने बताया कि बिजली कटौती के कारण उनके घर की व्यवस्था पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई है। महिलाओं को शाम के समय खाना पकाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा, छात्रों की पढ़ाई भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। गांव के निवासी सुनील यादव के अनुसार, पिछले 10-15 दिनों से शाम के वक्त 2 से 3 घंटे तक लगातार बिजली नहीं मिल रही है, जबकि ग्रामीण समय पर बिजली का बिल भर रहे हैं। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि बावजूद इसके उन्हें नियमित बिजली आपूर्ति नहीं मिल रही है, जो कि बेहद चिंताजनक है।

अंधेरे में सुरक्षा का बड़ा खतरा

बाढ़ के कारण पहले ही गांव के आसपास सांप और अन्य जहरीले कीड़े निकलने का डर बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली कटने के बाद रात के समय बाहर निकलना जोखिम भरा हो गया है। पहले लोग लालटेन का इस्तेमाल कर लेते थे, लेकिन अब ज्यादातर घरेलू उपकरण बिजली पर आधारित हैं, जिससे अंधेरे में लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्थानीय निवासी अनूप राय ने बताया कि रात में 9 से 11 बजे या फिर 11 से 1 बजे के बीच बिजली काटी जा रही है। उन्होंने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय को ई-मेल के जरिए अपनी शिकायत दर्ज कराई है और मांग की है कि बिजली विभाग कटौती का स्पष्ट कारण और समय बताए।

फीडर के लोड का मुद्दा

ग्रामीणों का आरोप है कि इस संकट के पीछे बिजली के फीडर पर अत्यधिक लोड होना एक बड़ा कारण है। अनूप राय ने बताया कि पकड़ी गांव के फीडर से ही पूरे रेवतीपुर क्षेत्र को जोड़ा गया है, जिससे लोड काफी बढ़ जाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि रेवतीपुर के लिए अलग फीडर की व्यवस्था की जाए, तो इस समस्या का समाधान संभव है। हालांकि, तकनीकी रूप से इस फीडर से जुड़े गांवों की वास्तविक संख्या और बिजली विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज लोड की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन ग्रामीणों का मानना है कि बुनियादी ढांचे में सुधार की सख्त जरूरत है।

अधिकारियों का तर्क: इमरजेंसी रोस्टरिंग

इस पूरे मामले पर जब जेई आशीष यादव से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि क्षेत्र में इमरजेंसी रोस्टरिंग के तहत बिजली आपूर्ति को नियंत्रित किया जा रहा है। जेई के मुताबिक, यह कटौती स्थानीय स्तर के तय शेड्यूल के अनुसार नहीं है, बल्कि उन्हें ऊपर से मिलने वाले निर्देशों का पालन करना पड़ता है। आशीष यादव ने कहा कि कभी शाम 5 बजे, तो कभी 6 बजे या 7 बजे बिजली बंद करने के आदेश मिलते हैं। उनका तर्क है कि लोड को प्रबंधित करने के लिए ही इस व्यवस्था को लागू किया गया है। उन्होंने यह स्वीकार किया कि ग्रामीणों को इससे परेशानी हो रही है और वे उच्च अधिकारियों के साथ बातचीत कर समाधान ढूंढने का प्रयास कर रहे हैं।

क्या है इमरजेंसी रोस्टरिंग का अर्थ?

विद्युत विभाग की शब्दावली में इमरजेंसी रोस्टरिंग का आशय ऐसी स्थिति से है, जब किसी क्षेत्र में लोड बहुत अधिक हो जाए या ग्रिड एवं फीडर पर तकनीकी दबाव बन जाए। ऐसी स्थिति में ग्रिड को बचाने के लिए अस्थायी रूप से बिजली बंद करनी पड़ती है। यह सामान्य कटौती से भिन्न है और इसका समय पूर्व निर्धारित नहीं होता है। ग्रामीणों की शिकायतों और विभाग के दावों के बीच, अब यह स्पष्ट करने की आवश्यकता है कि वास्तव में उन्हें कितने घंटे बिजली मिल रही है। इसके लिए बिजली विभाग के फीडर लॉग और शटडाउन रिकॉर्ड की गहन जांच आवश्यक है, ताकि ग्रामीणों की पीड़ा का वाजिब हल निकाला जा सके।

चेतन तिवारी पाबना के उत्तर प्रदेश संवाददाता हैं और राज्य की राजनीति, प्रशासन तथा जमीनी मुद्दों को कवर करते हैं। लखनऊ में रहते हुए वे जिलों से लेकर विधानसभा तक की खबरें संतुलित रिपोर्टिंग के साथ पाठकों तक पहुंचाते हैं। आम लोगों के मुद्दों और स्थानीय घटनाओं पर उनका खास फोकस रहता है।

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