जीवनशैली
एक घंटा पहले
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विचारों
परंपरा और स्वाद का अनूठा संगम
बघेलखंड के ग्रामीण अंचलों में भादों के महीने के दौरान कई पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं, जो लोगों को उनकी जड़ों और पुरानी स्मृतियों से जोड़ते हैं। इनमें से एक विशेष व्यंजन है जिसे स्थानीय भाषा में रकचिया या पतौड़ा कहा जाता है। यह व्यंजन अरबी के पत्तों के उपयोग से बनाया जाता है, जिसका स्वाद लोगों को लंबे समय तक याद रहता है।
कैसे तैयार होती है रकचिया
इस व्यंजन की खासियत इसके बनाने की विधि है। अरबी के साधारण पत्तों के ऊपर बेसन और कई प्रकार के मसालों का लेप लगाया जाता है, जिसे रोल करके भाप में पकाया जाता है। बाहर से कुरकुरी और अंदर से मसालों के तीखेपन से भरपूर यह डिश हर किसी को पसंद आती है। इसे चाय के साथ नाश्ते के रूप में लिया जा सकता है या फिर दोपहर के भोजन में दाल-चावल के साथ एक बेहतरीन सब्जी के तौर पर परोसा जा सकता है।
मेहनत का मीठा फल
इस व्यंजन को बनाने वाली मीना द्विवेदी के अनुसार, रकचिया को तैयार करने की प्रक्रिया में काफी मेहनत और समय लगता है। हालांकि, जब यह पककर तैयार होती है और इसका जायका चखने को मिलता है, तो वह सारी मेहनत सार्थक लगने लगती है। स्वाद प्रेमियों के लिए यह बघेलखंड की एक ऐसी धरोहर है, जिसे आज भी ग्रामीण इलाकों में बड़े चाव से बनाया जाता है।
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