रांची की अनोखी 'ठेचा चटनी': महाराष्ट्र के पारंपरिक व्यंजन में घुला आदिवासी ज़ायका, मात्र 2 मिनट में ऐसे करें तैयार जीवनशैली 11 घंटे पहले 1
झारखंड की राजधानी रांची में महाराष्ट्र के मशहूर व्यंजन 'ठेचा चटनी' को एक खास देसी और आदिवासी अंदाज में बनाया जाता है। सरसों तेल और हरी मिर्च के अनोखे मेल से बनने वाली यह चटनी स्वाद में इतनी लाजवाब है कि इसके आगे सब्जी भी बेअसर लगती है।

भारतीय रसोई में चटनियों का एक अलग ही महत्व है। हर राज्य और हर शहर की अपनी एक खास चटनी होती है जो भोजन के स्वाद को कई गुना बढ़ा देती है। ऐसा ही एक अनोखा स्वाद झारखंड की राजधानी रांची में देखने को मिल रहा है। यहां महाराष्ट्र की बेहद लोकप्रिय और तीखी 'ठेचा चटनी' को एक बहुत ही खास स्थानीय और पारंपरिक अंदाज में बनाया जा रहा है। रांची के लोग इस महाराष्ट्रीयन डिश में थोड़ा सा आदिवासी टच मिलाकर इसे बिल्कुल देसी बना देते हैं, जो खाने में गजब का स्वाद देती है।

इस अनूठी रांची स्टाइल ठेचा चटनी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सरसों के तेल और पकी हुई मिर्च का बेहतरीन इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा इसमें कुछ ऐसी पारंपरिक चीजें मिलाई जाती हैं जो इसे एकदम स्थानीय स्वाद प्रदान करती हैं। इस चटनी का स्वाद इतना लाजवाब होता है कि इसके साथ आपको खाने में किसी भी तरह की सब्जी या दाल की जरूरत महसूस नहीं होगी। आइए जानते हैं रांची की रहने वाली गृहणी उषा से इस लाजवाब चटनी को बनाने की बेहद आसान और त्वरित विधि।

ठेचा चटनी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री

रांची की गृहणी उषा के अनुसार, इस बेहद स्वादिष्ट और देसी ठेचा चटनी को बनाने के लिए आपको बहुत ज्यादा तामझाम की आवश्यकता नहीं है। इसके लिए रसोई में आसानी से मिलने वाली निम्नलिखित सामग्रियों की जरूरत होगी:

  • 3 बड़ी हरी मिर्च
  • थोड़ा सा ताजा धनिया पत्ता
  • थोड़े से मूंगफली के दाने
  • 4 से 5 बड़ी लहसुन की कलियां
  • शुद्ध सरसों का तेल
  • थोड़ा सा कच्चा आम (यदि उपलब्ध हो)

तैयार करने की संपूर्ण विधि

इस चटनी को बनाने की प्रक्रिया बेहद सरल है और इसे कोई भी आसानी से घर पर तैयार कर सकता है। इसकी तैयारी को इन चरणों में समझा जा सकता है:

सामग्रियों को हल्का भूनना: सबसे पहले एक कढ़ाई या पैन में बिल्कुल थोड़ा सा तेल गर्म करें। अब इसमें तीन बड़ी हरी मिर्च, चार-पांच बड़ी लहसुन की कलियां और मूंगफली के दाने डालें। इन सभी चीजों को तेल में हल्का फ्राई करना है। ध्यान रखें कि इन्हें बहुत ज्यादा नहीं पकाना है, बस मूंगफली के अच्छी तरह पकने और चटकने तक ही फ्राई करें।

कूटने की प्रक्रिया: जब सभी भुनी हुई सामग्रियां हल्की ठंडी हो जाएं, तो इन्हें पीसने की बारी आती है। उषा विशेष रूप से सलाह देती हैं कि इस चटनी को बनाने के लिए भूलकर भी मिक्सी का उपयोग न करें। मिक्सी में पीसने से इसका पारंपरिक दरदरापन खत्म हो जाता है। इसके बजाय, आप सिलबट्टे का इस्तेमाल करें या फिर किसी कुटनी की मदद से इन्हें अच्छे से कूट लें। इसे अच्छी तरह से कूटने के बाद एक बर्तन में निकाल कर अलग रख लें।

रांची का आदिवासी ट्विस्ट: अब इस कुटी हुई चटनी में रांची का असली स्थानीय स्वाद जोड़ने का समय है। यदि आपके पास कच्चा आम उपलब्ध है, तो यह बहुत ही बढ़िया रहेगा। कच्चे आम का एक छोटा सा टुकड़ा लें और उसे भी कुटनी में डालकर हल्का सा कूट लें और चटनी में मिला दें। इसके बाद इसमें ऊपर से थोड़ा सा कच्चा सरसों का तेल डालें। सरसों का तेल इस चटनी को वह तीखा और बेहतरीन स्वाद देता है जो झारखंड के व्यंजनों की विशेषता है। यदि आपके पास धनिया पत्ता है, तो उसे भी कूटकर इस मिश्रण में मिला सकते हैं।

अंतिम मिलावट: अंत में, इन सभी सामग्रियों को एक साथ बहुत अच्छी तरह से मिला लें। ऊपर से थोड़ा और सरसों का तेल डालें और अपने हाथों की मदद से इसे अच्छी तरह से मिक्स करें। हाथों से मिलाने पर सभी मसालों और तेल का स्वाद आपस में पूरी तरह से रच-बस जाता है। आपकी स्वादिष्ट, तीखी और चटपटी रांची स्टाइल ठेचा चटनी अब परोसने के लिए पूरी तरह तैयार है।

इन व्यंजनों के साथ लें चटनी का आनंद

मात्र 2 मिनट में तैयार होने वाली यह अनूठी ठेचा चटनी खाने में इतनी स्वादिष्ट लगती है कि इसके साथ आपको किसी सब्जी की कमी महसूस नहीं होगी। आप इसका आनंद कई तरीकों से ले सकते है:

  • आप इसे गरमा-गरम पराठों के साथ सुबह के नाश्ते या रात के भोजन में खा सकते हैं।
  • इसे विशेष रूप से सादे चावल के साथ मिलाकर खाया जाता है, जो बेहद तृप्त करने वाला अनुभव देता है।
  • यदि किसी दिन आपका दाल या सब्जी बनाने का बिल्कुल मन न हो, तो आप महज 2 मिनट में इस चटनी को बनाकर चावल के साथ मिलाकर खा सकते हैं।
  • यह चटनी इतनी अनोखी है कि आप इसे अपने घर आने वाले मेहमानों को एक नई और बेहतरीन डिश के रूप में परोस सकते हैं।
अंजलि सिंह पाबना की राज्य संवाददाता हैं, जो विभिन्न राज्यों की क्षेत्रीय खबरें और खानपान कवर करती हैं। स्थानीय घटनाओं, संस्कृति और जायके की कहानियों को वे करीब से रिपोर्ट करती हैं। अलग-अलग राज्यों की विविधता उनकी रिपोर्टिंग में नजर आती है।

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