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2 घंटे पहले
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अफगानिस्तान की गुफाओं का रहस्य और 12 फीट का दैत्य
अफगानिस्तान के कंधार से जुड़ी एक ऐसी कहानी जो पिछले दो दशकों से रहस्यों की परतों में दबी हुई है, एक बार फिर लोगों के बीच बहस का मुद्दा बन गई है। यह चर्चा तब तेज हुई जब रिसर्चर टिमोथी अल्बेरिनो ने जो रोगन के प्रसिद्ध पॉडकास्ट में इसका जिक्र किया। लोग इसे 'कंधार का जायंट' के नाम से जानते हैं। दावा किया जाता है कि एक समय अफगानिस्तान में अमेरिकी सैनिकों का सामना एक ऐसे जीव से हुआ था जो सामान्य मानव नहीं था। इस जीव की लंबाई 12 फीट बताई गई थी, जिसके शरीर का वजन लगभग 500 किलोग्राम था। सबसे चौंकाने वाला दावा यह है कि उस जीव के हाथों और पैरों में छह-छह उंगलियां थीं और उसके बाल लाल रंग के थे।
घटना की कथित शुरुआत और सैन्य संघर्ष
इस कहानी के अनुसार, अफगानिस्तान युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिकों की एक टुकड़ी अपने नियमित गश्त के दौरान अचानक लापता हो गई थी। जब बाकी सैनिकों की टीम उनकी खोज में निकली, तो वे एक पहाड़ी इलाके में एक बड़ी गुफा के पास पहुंचे। दावा है कि जैसे ही सैनिक गुफा के करीब पहुंचे, एक विशालकाय मानव जैसा जीव बाहर निकला और उसने सैनिकों पर जानलेवा हमला कर दिया। इस संघर्ष के दौरान एक अमेरिकी सैनिक की मौत हो गई। इसके बाद, जवाबी कार्रवाई में अन्य सैनिकों ने उस जीव पर लगातार गोलियां बरसाईं, जिससे उसकी मौत हो गई।
जीव की शारीरिक बनावट के हैरान करने वाले विवरण
कथाओं के अनुसार, मारे गए इस जीव की बनावट बेहद डरावनी थी। इसकी त्वचा का रंग सफेद या हल्के रंग का था और उसका शरीर अत्यंत शक्तिशाली था। उसके बाल लाल या भूरे बताए जाते हैं। लेकिन सबसे अजीब पहलू उसकी शारीरिक संरचना में छह-छह उंगलियों का होना था, जो इसे किसी सामान्य इंसान से अलग खड़ा करता था। यह कहानी सालों से इंटरनेट और रेडियो कार्यक्रमों में घूमती रही है, लेकिन अब इसे एक बार फिर से मुख्यधारा की चर्चाओं में जगह मिली है।
क्या अमेरिकी सैन्य विमान से ले जाया गया था शव?
इस पूरे प्रकरण का सबसे रहस्यमय हिस्सा अमेरिकी सैन्य विमान से संबंधित है। रिसर्चर टिमोथी अल्बेरिनो ने दावा किया कि उन्होंने एक ऐसे पायलट से बात की थी जिसने अमेरिकी सैन्य विमान उड़ाया था। उस पायलट का कहना था कि उसने विमान में एक बहुत बड़ा शरीर तिरपाल से ढका हुआ देखा था। पायलट ने दावा किया कि उसने तिरपाल के भीतर से उस जीव के हाथ, पैर और सिर के कुछ हिस्से देखे थे, जिनमें लाल बाल और छह उंगलियां स्पष्ट दिखाई दे रही थीं। पायलट के मुताबिक, जब उस शरीर को पैलेट के साथ तौला गया था, तो कुल वजन करीब 1500 पाउंड यानी लगभग 680 किलोग्राम था। पैलेट का वजन घटाने के बाद, जीव का वास्तविक वजन 500 किलोग्राम के आसपास होने का अनुमान लगाया गया था। हालांकि, इस पायलट की पहचान का कोई ठोस प्रमाण कभी सामने नहीं आया है।
जो रोगन के पॉडकास्ट के बाद क्यों बढ़ी चर्चा?
जुलाई 2026 में टिमोथी अल्बेरिनो ने जो रोगन के पॉडकास्ट पर इस पूरे मामले का विस्तार से विश्लेषण किया। जो रोगन ने भी इस बात को स्वीकार किया कि कंधार जायंट की कहानी अन्य रहस्यमयी कथाओं में सबसे ज्यादा आकर्षित करने वाली है। अल्बेरिनो का कहना है कि उन्होंने अफगानिस्तान में तैनात रहे कई लोगों से बातचीत की है। उनका तर्क है कि इन विशालकाय जीवों की कहानियों को पूरी तरह से नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने यहां तक दावा किया कि जब उन्होंने एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी से इस बारे में सवाल किया, तो वे स्पष्ट उत्तर नहीं दे पाए और खामोश रह गए।
क्या केवल एक ही दैत्य था?
अल्बेरिनो की बातें इस कहानी को और भी पेचीदा बनाती हैं। उन्होंने दावा किया कि यह मामला केवल एक जीव तक सीमित नहीं था। उन्होंने इसे 'कंधार का जायंट' के बजाय 'कंधार के जायंट्स' (बहुवचन) कहकर संबोधित किया। उनके अनुसार, अमेरिकी सेना को ऐसे और भी जीवों की मौजूदगी के बारे में जानकारी थी। हालांकि, इन दावों के समर्थन में आज तक कोई आधिकारिक सैन्य दस्तावेज या सबूत सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
इतिहास और सबूतों की कमी
यह कहानी आज की नहीं है, बल्कि कम से कम 2005 से इंटरनेट पर चर्चा का विषय बनी हुई है। उस समय स्टीव क्वेल नामक रिसर्चर ने एक अमेरिकी वायुसेना अधिकारी का हवाला देते हुए इस घटना का जिक्र किया था। साल 2008 में भी एक सैन्य पायलट के बयानों के आधार पर इसे फिर से उछाला गया था। लेकिन, सबसे बड़ा सवाल आज भी वही है: सबूत कहां हैं? यह पूरी कहानी अभी तक केवल अनाम लोगों के बयानों, सुनी-सुनाई बातों और इंटरनेट पर चल रही कयासों पर आधारित है। कोई भौतिक अवशेष या सरकारी दस्तावेजी प्रमाण न होने के कारण वैज्ञानिक समुदाय इसे केवल एक लोककथा या शहरी किंवदंती मानता है।
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